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नन्हे कदमों की छाप बनी यादगार, सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर की अनूठी पहल

बालोद/जगन्नाथपुर। बच्चों के जीवन में विद्यालय का पहला दिन एक नई शुरुआत और सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ाया गया पहला कदम होता है। इसी खास पल को हमेशा के लिए यादगार बनाने के उद्देश्य से सरस्वती शिशु मंदिर, जगन्नाथपुर ने एक भावनात्मक और प्रेरणादायी पहल की।

विद्यालय के शिक्षकों ने नवप्रवेशी बच्चों के नन्हे-नन्हे कदमों की लाल रंग से छाप लेकर उन्हें कोरे पन्नों पर अंकित किया और प्रत्येक बच्चे का नाम लिखकर यह विशेष स्मृति-चिह्न उनके पालकों को भेंट किया। इस अनूठे प्रयास ने बच्चों के पहले विद्यालय दिवस को अविस्मरणीय बना दिया।

विद्यालय परिवार का मानना है कि शिक्षा के मंदिर में रखा गया पहला कदम केवल स्कूल में प्रवेश नहीं, बल्कि उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है। बच्चों के कदमों की यह छाप आने वाले वर्षों में उनके शैक्षणिक सफर की मधुर याद बनकर परिवारों को प्रेरित करती रहेगी।

इस अवसर पर सिद्धिविनायक शिक्षण समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद हरदेल ने कहा कि बच्चों के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को संजोना उन्हें विद्यालय से भावनात्मक रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। वहीं प्रधानाचार्य ताराचंद साहू ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदनाएं और व्यक्तित्व विकास को भी समान महत्व देता है।

कार्यक्रम में विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। शिक्षकों की इस सराहनीय पहल की पालकों ने भी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे बच्चों के शैक्षणिक जीवन की सुंदर और यादगार शुरुआत बताया।

नन्हे कदमों की यह छाप सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि उपस्थित सभी लोगों के दिलों में भी एक मधुर स्मृति बनकर अंकित हो गई। यह पहल शिक्षा के साथ संवेदनाओं और रिश्तों को सहेजने का प्रेरक उदाहरण बन गई है।

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