नवरात्रि विशेष :इस गांव में है परेतिन दाई के प्रति लोगों में है विशेष आस्था, चढ़ता है यहां चना मुर्रा का प्रसाद और काली चूड़ियां



बालोद-

नवरात्रि के इस चौथे दिन पर हम बालोद जिले के एक विशेष गांव से परिचित करवा रहे हैं, जहां के लोगों के लिए परेतिन दाई किसी इष्ट देवी से कम नहीं है। गांव में कोई भी काम हो, कहीं जाना हो, कोई शुभ कार्य शुरू करना हो तो उसके पहले परेतिन दाई को लोग याद करते हैं। आपने अर्जुंदा के पास स्थित ग्राम झीका के परेतिन दाई के बारे में तो कई बार देखा, सुना पढ़ा होगा लेकिन हम आज बालोद जिले के ग्राम चेंद्रीबन नवागांव के परेतिन दाई से आपका परिचय करवा रहे हैं। जहां लोगों की विशेष आस्था जुड़ी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि कई पीढ़ियों से गांव के लोग परेतिन दाई को देवी की तरह पूजते आ रहे हैं। गांव के मुख्य मार्ग के पास पीपल पेड़ के नीचे ग्रामीणों ने आस्थावश परेतिन दाई के प्रतीक स्वरूप लगभग दो फीट की मूर्ति भी स्थापित की है। रोज सुबह शाम परेतिन दाई की यहां लोग पूजा करते हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि किसी के यहां बच्चे पैदा होता है और अगर वह बहुत रोने लगे तो लोग परेतिन दाई के पास जाकर काली चूड़ियां चढ़ाते हैं और बच्चा शांत हो जाता है। बच्चे को किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए बच्चा पैदा होते ही सबसे पहले परेतिन दाई में चना मुर्रा का प्रसाद और चूड़ी चढ़ाने का रिवाज यहां वर्षों से कायम है। आज की युवा पीढ़ी भी आधुनिक वैज्ञानिक दौर में भी इस आस्था को बरकरार रखी हुई है। लोगों की इस विशेष आस्था के बारे में जानने के लिए जब हम गांव पहुंचे तो परेतिन दाई की मूर्ति जहां स्थापित है उसी के बगल में निवास करने वाली सरोज बाई साहू ने बताया कि हमारा परिवार वर्षों से परेतिन दाई की पूजा करते आ रहे हैं। रोज शाम को हम यहां जिस तरह घर में दीपक जलाते हैं, उसी तरह परेतिन दाई के आगे दीप जलाकर आरती करते हैं। मूर्ति के चारों ओर सैकड़ों की संख्या में काली चूड़ियां अर्पित की हुई नजर आई जो यहां के लोगों की परेतिन दाई के प्रति खास लगाव और जुड़ाव को बताती है। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार के दिन गांव में बाजार लगता है इस दिन लोग अच्छा व्यवसाय हो इसके लिए भी कामना के साथ परेतिन दाई में मुर्रा चना चढ़ाते हैं।

गांव में हर शुभ काम के पहले याद करते हैं परेतिन माता को

पूर्व सरपंच सुनीता पटेल ने बताया कि गांव में कोई भी शुभ कार्य हो, शुरू करने से पहले परेतिन माता को याद किया जाता है। लोग अगर शादी हेतु लड़की देखने जा रहे हैं तो यहीं से पूजा पाठ करके निकलते हैं। शादी हो जाती है तो दूल्हा दुल्हन गृहस्थ जीवन की शुरुआत करने से पहले यहां पूजा करने के लिए आते हैं। कोई भी व्यापार करने वाले सबसे पहले माता को याद करते हैं। गांव में कोई भी त्यौहार होता है तो जिस तरह से ठाकुर देव आदि स्थलों में पूजा अर्चना की जाती है परेतिन दाई को भी उसी तरह से यहां के लोग मानते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अब इसे आस्था कहे या खौफ कहे एक धारणा यह भी बनी हुई कि अगर हम परेतिन दाई का ध्यान नहीं रखें तो उनका प्रकोप हम पर हावी हो जाएगा। इसलिए बुजुर्गों की बनाई परंपरा को आज भी लोग यहां निभा रहे हैं।

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