बालोद– इस नवरात्रि के तीसरे दिन हम बालोद जिले के ऐसे अनूठे मंदिर से आपका परिचय करवा रहे हैं जहां राजा, रानी की पूजा होती है। ये राजा रानी बस्तर इलाके के चुचरुंगपुर के निवासी बताए जाते हैं। कब से यहां उनकी मूर्ति बनी, कैसे वे यहां पहुंचे इसके पीछे कई तरह की किवदंती प्रचलित है। लोग इसके पीछे कई कहानी बताते हैं। उनमें कितनी सच्चाई है, हम तो उस पर नहीं जा रहे हैं लेकिन लोगों की आस्था आज यहां बनी हुई है। बात कर रहे हैं बालोद झलमला से घोटिया जाने वाले मार्ग पर स्थित रानी माई मंदिर मुल्लेगुड़ा/ नर्रा 12 गांव पठार की। जो 12 गांव की इष्ट देवी है। यहां पर आज बुधवार 24 सितंबर को देव दशहरा मेला का आयोजन हो रहा है।

नवरात्रि पर आने वाले प्रथम बुधवार के दिन यहां हर साल देव दशहरा होता है। इस मंदिर में राजा देश मात्र बाबा और रानी माई दोनों की मूर्ति स्थापित है। जिनकी 12 गांव के लोग पूजा करते हैं। देव दशहरा पर अपने गांव के देवी देवताओं रूपी डांग डोरी को लेकर ग्रामीण और बैगा पुजारी बड़ी संख्या में आज इकट्ठा होंगे और देव दशहरा मनाएंगे। वर्तमान में नवरात्रि में यहां 485 जोत जल रहे हैं। जिसमें 360 तेल और 125 घी के जोत हैं। रोचक बात ये भी है कि इस मंदिर से लगभग 10 से 15 किलोमीटर की दूरी बढ़भूम के आगे चारामा जाने वाले मार्ग पर भी एक रानी माई मंदिर है। दोनों को कोई आपस में देरानी जेठानी तो कोई बहन बताते हैं। बीच में नेगी बाबा का एक मंदिर भी है। लोगों में रानी माई मंदिर के प्रति विशेष आस्था है। लोग इसे शक्ति स्वरूपा मानकर उसकी पूजा अर्चना करते हैं। यहां मनोकामना के लिए जोत जलाते हैं। लोगों की मनोकामना पूरे होने के कारण हर साल यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि इस रानी माई मंदिर का मूल स्थान इस मंदिर से पांच किमी दूर कहीं जंगल में है, जहां पर हर कोई आते-जाते नहीं है। कुछ खास लोगों को ही वहां जाने की अनुमति है। जहां विशेष गोपनीय पूजा होती है। 12 गांव की इष्ट देवी के रूप में रानी माई और उनके पति राजा देश मात्रा बाबा की पूजा अर्चना की जाती है।
