क्या अब न्योता भोज भी युक्तियुक्तकरण पीड़ित नहीं करा सकते ?

बालोद – रघुननंदन गंगबोईर युक्तिकरण पीड़ित/शिक्षाश्री/राज्यपाल पुरस्कृत ने एक और सवाल उठाया है कि क्या अब न्योता भोज भी युक्तियुक्तकरण पीड़ित नहीं करा सकते ? उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इग्नाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल आमापारा बालोद में नवमी पितर व पुत्र के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में न्योता भोज कराने का .प्रस्ताव रखा था। इस संबंध में संस्था के जिम्मेदारों से चर्चा करने पर एक-दूसरे के ऊपर डालते हुए स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा रहा है। तथा यह भी कहा जा रहा है कि अभी आपका मुद्दा युक्तियुक्तकरण के कारण अलग स्थिति में है इसलिए सोचना पड़ रहा है। संस्था ने पहले तो संकुल समन्वयक बताएगा कह दिया बाद में दूसरे के माध्यम से जो उनके विचार आए वह सार्वजनिक रूप से कहना उचित नहीं लग रहा है । तो सवाल यह उठता है कि क्या युक्तिकरण प्रक्रिया जो निम्नानुसार सामान्य प्रशासन विभाग सिविल सेवा अधिनियम 1961 वरिष्ठता नियम 12 (क) क्र. F1-1/2017/1-3(पार्ट),दि. 20/05/24 में स्पष्ट कहा गया है कि वरिष्ठता निर्धारण हेतु संस्था में कार्यभार ग्रहण को ध्यान में ना रखते हुए पूर्ववर्ती चयन के परिणाम स्वरुप नियुक्त व्यक्ति पश्चातवर्ती चयन से नियुक्त से हमेशा वरिष्ठ होगा, उक्त सिविल सेवा अधिनियम नियमों के विरुद्ध की गई है। मेरी पत्नी श्रीमती पुष्पा गंगबोईर शिक्षक विषय अंग्रेजी का दो वर्ष पूर्व पदोन्नति के समय अंग्रेजी शिक्षक के 80% विद्यालयों में पद रिक्त होने के बावजूद नज़दीकी शालाओं को रिक्त नहीं दिखाए गए और ऐसे विद्यालय में पदांकन किया गया जहां पूर्व से अंग्रेजी के शिक्षक पदस्थ थे।
अर्थात् जानबूझकर अतिशेष किया गया जिसे वर्तमान युक्तिकरण की प्रक्रिया में निर्माण अनुसार अतिशेष हो गई । अभी भी युक्तियुक्तकरण में काउंसलिंग के समय उन 80% प्रतिशत से अधिक रिक्त विद्यालयों के पदों को नहीं दिखाया गया और पुनः दूरस्थ पदास्थना किया गया है इस प्रकार से बार-बार प्रशासनिक अनियमितता का शिकार होने की वजह से परेशान होकर हम दोनों न्यायालयीन निर्देश के शरणागत है। जहां से जिला और संभाग को अभिव्यावेदन लेकर 5 दिनों के भीतर निराकरण करने के निर्देश प्राप्त हुए हैं किंतु चार महीना बीत जाने के बाद भी मामला न्यायालय की अवमानना करते हुए अनिराकृत है तथा न्यायालयीन प्रकरण के बावजूद 4 महीना से वेतन भी अप्राप्त है। जिसमें वर्तमान संभाग स्तरीय समिति द्वारा समय अनुकूल निराकरण भी नहीं दिया जा रहा है, अब इसमें हम युक्तियुक्तकरण पीड़ित जो कोई संगीन अपराध तो नहीं किए हैं जिससे हमसे परहेज किया जाए।

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