“महाराष्ट्र में तैयार हुई महिला कमांडो” एक दूसरे के लिए बन रही प्रेरणास्रोत



उन्नत भारत अभियान के लिए रोल मॉडल साबित हुआ बालोद जिला, जेडी कॉलेज ने गोद लेकर गांव में की महिला कमांडो की शुरुआत, प्रशिक्षण देकर लौटी “प्रणेता” पद्मश्री शमशाद बेगम

बालोद– पिछले दिनों पद्मश्री शमशाद बेगम जो महिला कमांडो की प्रणेता है, महाराष्ट्र प्रवास पर थी। उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर जिले के वलनी गांव और आसपास की तीन से चार गांव की महिलाओं को महिला कमांडो बनाने के साथ उन्हें कैसे काम करना है, इस पर प्रशिक्षण दिया। इस दौरान लगातार अलग-अलग गांव की महिलाओं के बीच पहुंची। उनकी समस्याओं से रूबरू हुई और कैसे समस्याओं का सामना कर उनका हल निकालना है और समाज की निस्वार्थ भाव स सेवा करनी है, इस पर कमांडो बन रही महिलाओं को प्रेरित और प्रशिक्षित किया गया। खास बात यह भी रहा कि महाराष्ट्र में जेडी इंजीनियरिंग कॉलेज नागपुर द्वारा उन्नत भारत अभियान के तहत पांच गांवों को गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं । इस क्रम में बालोद जिले की महिला कमांडो को एक रोल मॉडल के रूप में मानते हुए वलनी गांव को गोद लेकर वहां महिला कमांडो का प्रोजेक्ट चलाया गया। जिस पर वहां की 50 महिला कमांडो को तैयार करने शिक्षा मंत्रालय से फंड दिया गया था। अब वह प्रोजेक्ट सफल हुआ।

अब निस्वार्थ भाव से बिना किसी मानदेय की महिला कमांडो काम कर रही है। साथ ही आसपास के गांव को भी प्रेरित करेंगे। पद्मश्री शमशाद बेगम ने वलनी के साथ-साथ आसपास के खंडाला और पारडी व अन्य गांव की कमांडो को भी प्रशिक्षित किया। लगभग 10 गांव में कमांडो की टीम धीरे-धीरे तैयार हो रही है। जेडी कॉलेज को शिक्षा मंत्रालय की ओर से फंड जारी किया गया था। इस फंड से वलनी गांव की कमांडो के लिए ड्रेस, टोपी, सीटी आदि सामग्री दी गई। जिससे वे बेहतर कार्य कर सके और वे कार्य कैसे करेंगे? इसका मापदंड बालोद जिले की महिला कमांडो से लिया गया था। जिसकी बारीकी को समझाने के लिए पद्मश्री शमशाद बेगम को प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया गया था उनके साथ बोरी की महिला कमांडो भीमेश्वरी शांडिल्य भी गई हुई थी।

इंजीनियरिंग के छात्रों को भी पद्मश्री शमशाद बेगम ने किया संबोधित

महाराष्ट्र प्रवास के दौरान पद्मश्री शमशाद बेगम को जेडी कॉलेज में भी विशेष संबोधन के आमंत्रित किया गया। इस दौरान दो सत्र में उन्होंने करीब 800 इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्हें नशा पान से दूर रहने, बड़े होकर एक अच्छे इंसान बनने की नसीहत दी गई। साथ ही कैसे महिला कमांडो कार्य करती है, बच्चों के संरक्षण के लिए क्या प्रयास किए जाते हैं, इन सब के बारे में भी इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं को बताया गया।

स्वयं सरपंच बनी महिला कमांडो, गांव के पुरुष वर्ग भी ले रहे दिलचस्पी

महाराष्ट्र से लौटकर खास बातचीत में पद्मश्री शमशाद बेगम ने बताया कि महिला कमांडो बनने को लेकर महाराष्ट्र की महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। एक खंडाला गांव की सरपंच करिश्मा भी स्वयं महिला कमांडो बनी है। साथ ही अपने गांव की 50 महिलाओं को भी वह प्रेरित कर चुकी है। पारडी गांव के सरपंच आकाश भी गांव की महिलाओं को कमांडो बनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। महिलाएं ही नहीं पुरुष वर्ग भी इस अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जल्द ही कामठी क्षेत्र के ग्राम अजनी में भी कमांडो का गठन होना है, वहां भी प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित करने की तैयारी है। महिला कमांडो को बालोद जिले की तर्ज पर सिखाया गया कि कैसे गश्त करना है, कमांडो ताली कैसे बजाते हैं, शासन प्रशासन के अभियानों में हम कैसे योगदान दे सकते हैं, लोगों को किस तरह से जागरूक करते हैं, कानून को हाथ में नहीं लेना है, कमांडो के क्या मूल उद्देश्य हैं, डेली डायरी लिखना है, अपने-अपने गांव के सुधार, सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना है, इन सब के बारे में प्रशिक्षित किया गया।

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