नित-नए ऑनलाइन एंट्री कार्य व कार्यक्रमों, व जानकारी आदि से शिक्षक हलाकान,पढ़ाई हुआ गौण,अन्य सभी कार्य हुआ मुख्य
बालोद- शालाओं में अध्यापन के लिए नियुक्त शिक्षकों की चिंता अब इस कदर बढ़ीं हुई है कि कब कौन सी और क्या जानकारी मांग ली जाए। शिक्षकों को जोडकर बनी अधिकांश वाट्सएप ग्रुपों में वाट्सएप खोलते ही जानकारी , आयोजन के दो चार डाक जरूर मिलते हैं। ऐसे में पढा़ने की मानसिकता बदल कर डाक बनाने व अन्य गतिविधियों के आयोजन की ओर चली जाती है। इस सत्र में तो इन सभी से लगभग सभी शिक्षक हलाकान है। अभी शिक्षक एक माह रजत जयंती महोत्सव आयोजन, एंस्पायर अवार्ड पंजीयन आनलाईन, एक पेड़ माँ के नाम, मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान, क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा, राष्ट्रीय अविष्कार अभियान, एम डी एम आनलाईन एंट्री, पंद्रह दिनों की स्वच्छता पखवाड़ा, सितम्बर में अब तक स्वच्छ एवं हरित भारत पंजीयन, यूडाईस में स्कूल, शिक्षक, विद्यार्थी एंट्री, नवोदय विद्यालय पंजीयन, कर्मचारियों की आनलाईन जानकारी, ए आई फीचर साक्षरता सप्ताह, अकादमिक समझ हेतु एल एम एस कोर्स, एल एल एफ आनलाईन कोर्सेस, प्राथमिक, माध्यमिक, हाई व हायर सेकेंडरी में अब तक बुक स्केनिंग, मिशन लाईफ पोर्टल में अपलोड चल ही रहा है। उपर से विभिन्न गतिविधियों के आयोजन व उनके वीडियो फोटोग्राफ भेजना व अपडेट के कार्य तथा किसी भी जानकारी को अब चार प्रकार से जिसमें हार्ड कापी, साफ्ट कापी, एक्सल सीट व गूगल फार्म में एंट्री का चलन भी है। विभागीय नियमित जानकारियों के अलावा विभिन्न एप डाउनलोड करने व जानकारी एवं आयोजन की अधिकता, प्रतिवेदन व अपलोड ने शिक्षण के कार्यों को गौण कर दिया है। सभी शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहन तो करना चाह रहे हैं, लेकिन नित नए विभागीय ऑनलाइन कार्य, विभिन्न प्रशिक्षण, विषयवार एवं अन्य प्रशिक्षण चल रहा था, जिस पर अभी रोक लगाई गई है व आए दिन संस्थाओं में विभिन्न दिवसों, कार्यक्रमों व आयोजनों के निर्देश के चलते अपने मूल कार्यों से परे होते जा रहे हैं।स्कूलों में, आनलाईन इंट्री व डाक बनाने तथा अन्य लगातार कार्यक्रमों के चलते अध्यापन के लिए कम समय मिलना शिक्षकों की चिंताए बढ़ा दी है।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बालोद के जिलाध्यक्ष दिलीप साहू, जिला संयोजक रामकिशोर खरांशु, कामता प्रसाद साहू एवं शिव शांडिल्य, वीरेंद्र देवांगन, नीलेश देशमुख, पवन जोशी, कांतु लाल चंदेल, नरेंद्र साहू, पवन कुम्भकार , हरीश साहू, शिवेंद्र बहादुर साहू, महेंद्र टांडिया, रघुनंदन गंगबोईर, लेखराम साहू, शेषलाल साहू, राजेश चंद्राकर, संजय ठाकुर, रवींद्र नाथ योगी सहित सभी पदाधिकारियों ने कहा कि विभाग की ओर से वर्तमान में दिए जा रहे नित-नए ऑनलाइन कार्यों से शिक्षक का मूल कार्य गौण होते जा रहा है और ऑनलाइन कार्य ही मुख्य होकर रह गया है। जब भी कोई जानकारी मांगा जाता है, वे सभी के सभी अर्जेन्ट व उसी दिन व्हाट्सएप्प में देने के लिए कहा जाता है। अब प्रश्न उठता है कि आखिर सभी जानकारी अर्जेन्ट उसी दिन उसी समय देने की आवश्यकता क्यों पड़ता है? शिक्षक को हर एक घण्टे मोबाइल खोलकर देखना पड़ता है कि कहीं कोई जानकारी देने से छूट न जाए। यदि कोई जानकारी कहीं छूट गया तो स्पष्टीकरण व बचाव के लिए मिन्नते करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। किसी कारण से मध्यान्ह भोजन की ऑनलाइन एंट्री छूटने पर स्पष्टीकरण आए दिन निकलते ही रहता है। ऑनलाइन कार्यों की इस आपा-धापी में शिक्षक ये सोंचने पर मजबूर हो जाता है कि उनकी नियुक्ति शिक्षक के पद पर हुआ है या कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर? ऐसे भी ज्यादातर शासकीय विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है, इसके बावजूद उनसे लगातार ऑनलाइन कार्य कराए जाने से अध्यापन व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है। शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है कि पढाएं कब? विभाग की ओर से मोबाइल के उपयोग व एप तथा एंट्री आदि के लिए अतिरिक्त मोबाइल भत्ते की भी प्रावधान की आवश्यकता है। छ. ग. टीचर्स एसोसिएशन बालोद के सभी पदाधिकारियों ने बताया कि विभागीय उच्चाधिकारियों के लिए यह विचारणीय विषय है। उन्हें शिक्षकों को अध्यापन में रत रखने के लिए इस समस्या का सार्थक समाधान निकालने की आवश्यकता है।
