यह “गंगा” नहीं “गंदा सागर” तालाब है, मूर्तियां विसर्जित करने के लिए भी नहीं बची जगह, शासन प्रशासन नहीं ले रहा कोई सुध



बालोद l बालोद शहर के हृदय स्थल बस स्टैंड के पास स्थित गंगा सागर तालाब की दुर्दशा साफ दिख रही है। जहां छोटी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन शनिवार से शुरू हुआ है पर हालत यह है कि शहर के मुख्य विसर्जन के लिए जानी जाने वाले गंगासागर तालाब में ही गंदगी का अंबार है। लोग इसे अब “गंगा” नहीं बल्कि “गंदा सागर” तालाब कहने लगे हैं। तस्वीर में ही आप देख सकते हैं कि किस तरह तालाब के चारों हिस्से जलकुंभी और अन्य झाड़ियों से पटे हुए हैं। जहां पानी से बदबू भी उठने लगी है।

शनिवार को कुछ श्रद्धालु घर पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करने के लिए पहुंचते रहे। पर उन्हें यहां विसर्जन करने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं मिली। भले ही पालिका द्वारा एक दिन पहले ही विसर्जन कुंड की साफ सफाई कराई गई थी। लेकिन अधिकतर श्रद्धालु तालाब के अलग-अलग किनारो पर बने हुए पचरी में जाकर विसर्जन करते रहे। विसर्जन कुंड भी काफी छोटा है, ऐसे में शहर के सैकड़ो घरों में विराजित गणेश प्रतिमा को तालाब के बड़े हिस्से में विसर्जन करने की जरूरत पड़ती है। पर गंगासागर तालाब इन दिनों पूरी तरह से गंदगी से भरा है। इस कारण बप्पा की विदाई में भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी । इस तालाब को संवारने के लिए कई प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा के कार्यकाल में मई 2024 में इस तालाब को पूरी तरह से खाली करवा कर गहरीकरण कराया गया था। साथ ही साफ-सफाई और सुंदरीकरण का कार्य हुआ था। सभी आसपास के पार्षद और नगर पालिका अध्यक्ष ने अपने फंड से राशि जुटाकर इसका काम करवाया था। लेकिन वर्तमान में लगभग 15 महीने के बाद फिर गंगासागर वापस अपनी दुर्दशा भरी तस्वीर में आ गई है। लोग अब यहां जाने से भी कतराते हैं। बप्पा को विसर्जन करने के लिए पहुंचे एक वार्ड वासी मनीष कुमार ने बताया कि पहले बप्पा को विसर्जन करने के लिए तालाब साफ सुथरा रहता था लेकिन आज स्थिति काफी उलट हो चुकी है। जलकुंभी के कारण विसर्जन करने में काफी परेशानी हुई। मुश्किल से नजदीक में ही दो-तीन सीढ़ी उतरकर बप्पा को विसर्जित करना पड़ा। ऐसे में गंगासागर में यह गंदा नजारा लोगों की आस्था पर ही प्रहार करता है। शासन प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। जिम्मेदार अगर ध्यान देंगे तो इस ऐतिहासिक गंगा सागर तालाब को बचाया जा सकता है। वरना वह दिन दूर नहीं जब लोग इसे “गंगा” के बजाय सिर्फ “गंदा सागर” ही कहने लगे।

बड़ी गणेश प्रतिमाओं का भी होता है यही विसर्जन, पर हालात है बद्तर

बालोद की छोटी गणेश प्रतिमाओं का तो विसर्जन यहां होता ही है, कई बड़ी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी तालाब में होता आ रहा है। विसर्जन शोभायात्रा झांकी के बाद शहर में विराजित बड़ी गणेश प्रतिमाओं को बिदाई देने सब कई तालाब में आते हैं। पर जिस तरह तालाब में इन दिनों गंदगी देखने को मिल रही है उससे गणेश स्थापित करने वाले युवाओं के मन में भी निराशा है कि हम कैसे भला बप्पा को यहां विदाई देंगे? पहले हर साल कम से कम गणेश विसर्जन, दुर्गा विसर्जन के समय तालाब साफ सुथरा रहता था. लेकिन अभी स्थिति खराब है। पूरी तरह से चलकुंभी और झाड़ियों से पटा है। समय रहते इसकी साफ सफाई भी नहीं कराई गई। जिसका खामियाजा अब बप्पा के भक्त और आम नागरिक भुगत रहे हैं।

कभी हो रही थी बोटिंग, अब बोट भी हो चुके कबाड़

बालोद के इस प्रमुख तालाब में कुछ साल पहले तक जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन द्वारा एक समूह के जरिए बोटिंग (नौका चालन) की सुविधा शुरू की गई थी।लेकिन आज तालाब को देखते हुए बोट चलाना भी मुश्किल है नतीजन बोट (नांव) भी कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। जिन्हें लाखों खर्च करके शुरू किया गया था।

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