कादम्बिनी का मानना है कि “कार्यो से मिली पहचान ही असली पहचान है”
डीबी डिजिटल मीडिया बालोद। डौंडीलोहारा ब्लॉक के बड़गांव हायर सेकेंडरी स्कूल में जीव विज्ञान की व्याख्याता कादम्बिनी लोकेश पारकर यादव एक बेहतर शिक्षिका के साथ समाजसेविका के रूप में भी पहचान बना चुकी हैं। जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहने वाली कादम्बिनी के कदम शिक्षा में नवाचार के साथ समाज सेवा की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं और नए-नए मिसाल और प्रेरणा पेश कर रही हैं। मृत्यु उपरांत देहदान करने की घोषणा भी उनके द्वारा अपने पति सहित की जा चुकी है। तो वही बच्चों को सही मार्गदर्शन देने का काम भी करती हैं। क्योंकि वह करियर गाइडेंस की जिला स्रोत शिक्षिका भी है। जिसके कारण कुछ महीने पहले उन्हें राज्य का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला था और भोपाल में विशेष प्रशिक्षण लेने के लिए छत्तीसगढ़ के अन्य तीन शिक्षकों सहित गई थी। विज्ञान किट में भी जिला स्तर पर छात्रों के साथ प्रथम स्थान उन्होंने प्राप्त किया था। विज्ञान किट में विज्ञान विषय को सरल बनाने छोटे-छोटे प्रयोग का समावेश किया गया है। जिसका प्रदर्शन छात्र द्वारा किया गया। एफ एल एन में जिला नोडल का दायित्व भी वह निभा चुकी है। साथ ही जिला की विभिन्न क्षेत्र की बेहतर स्त्रोत शिक्षिका के रूप में पहचानी जाती हैं, शिक्षकीय गतिविधि के साथ साथ व्यक्तिगत जीवन में भी उनके द्वारा विशेष अनुकरणीय कार्य किए जाते हैं। जैसे अपने पिता की पुण्यतिथि पर अपनी तीनों बहनों संग कई नेक कार्य करती रहती है।
साथ ही अभिप्रेरणा ग्रुप के जरिए पर्यावरण और समाज सेवा के कार्य में भी तल्लीन है। घरौंदा आश्रम, जहां मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे रहते हैं, उनके विकास के लिए भी कादम्बिनी समय समय पर दान करती रहती है। स्कूल बच्चों को प्रोजेक्ट कार्य,संस्कृतिक कार्यक्रम, क्राफ्ट बनाने, विज्ञान क्लब विज्ञान किट तैयार करने में भी उनकी विशेष भूमिका रहती है। इन अपने विशिष्ट कार्यों के लिए वे समय-समय पर विभिन्न संगठन, समाज और शासन द्वारा भी सम्मानित हो चुकी है। जिसमें प्रमुख रूप से अजीम प्रेमजी फाऊंडेशन रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है तो साथ ही कलिंगा यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें 2024 में बेस्ट स्कूल टीचर्स अवार्ड ,अक्षय अलंकरण द्वारा बेस्ट शिक्षक के रूप में भी नवाजा गया है। योग के क्षेत्र में भी उनका बेहतर प्रदर्शन रहा है। राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के रूप में भी उन्होंने प्रशिक्षण लिया है और स्कूली बच्चों को मीडिटेशन सिखाया है। अभिप्रेरणा ग्रुप के जरिए पर्यावरण बचाने और बेजुबानों की सेवा करने के लिए सकोरा से सुकून की पहल अभियान चलाया और घर घर सकोरा वितरण किया जाता है। जो काफी सफल रहा और इससे सैकड़ो लोग जुड़कर इस अभियान को आगे बढ़ाने सक्रिय हुए। बालोद जिला में सुवा महोत्सव की शुरुआत भी इनके समूह के द्वारा किया गया है ,जो प्रतिवर्ष कराया जा रहा है।
रक्तदान कर बचाती है दूसरों का जीवन
आमतौर महिलाओं में रक्तदान को लेकर भ्रांतियां होती है और वो इससे दूर भागती है। लेकिन कादम्बिनी समय-समय पर जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए रक्तदान कर उनका जीवन बचाती है। स्वयं रक्तदान कर लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करती है। ब्लड डोनेशन और ब्लड दिलवाने के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए और आर्थिक सहयोग के लिए भी सदा तत्पर रहती है।
उजियारा कार्यक्रम का कर रही नेतृत्व
कैरियर मार्गदर्शन में उजियारा प्रोग्राम की जिला स्रोत शिक्षक के रूप में भूमिका निभाते हुए वह बच्चों और युवाओं के करियर को मार्गदर्शन कर नई दिशा दे रही है। शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक आयोजन में भी वह बढ़कर हिस्सा लेती है। करियर काउंसलिंग एवं उपचारात्मक शिक्षण में राज्य ट्रेनर की भूमिका भी निभा रही हैं। उनके प्रयास से बाल विज्ञान कांग्रेस में छात्रों का लगातार 2 बार विज्ञान प्रोजेक्ट का चयन नेशनल स्तर तक और कई बार राज्य तक हुए। प्रोजेक्ट का चयन पूरे छत्तीसगढ़ से अकेले सरकारी स्कूल बड़गांव का ( RIVIAIC) Science centrel gwl. mp and National council for science & technology
communication (DST) govt of India new delhi ) में हुआ था। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक की बुक ” अवसर” में लेखक के रूप में महती भूमिका निभा चुकी हैं। राज्य कैंपेनिंग में “गुरु तुम्हें सलाम” में जिला बालोद का प्रतिनिधित्व की है। शिक्षा मंत्री जी के सम्मुख ऑनलाइन क्लास का फीडबैक प्रस्तुत करने का अवसर उन्हे प्राप्त हुआ है। जिला नोडल एवं स्त्रोत शिक्षिका की भूमिका भी निभा चुकी हैं। वर्तमान में वह “छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा एवं “जिला एस्ट्रोनॉमी क्लब” एवं “विज्ञान क्लब” एवं NTCF की सदस्य भी हैं।
यह सम्मान भी हैं उनके नाम
शिक्षा विभाग से अक्षय अलंकरण के अलावा स्टार एफ.एस.आई. ए द्वारा सुपर वूमेन का अवार्ड , अंचल के गौरव सम्मान सहित भावना फाउंडेशन, बिमला देवी फाउंडेशन अन्य समाजसेवी फाउंडेशनसे भी सम्मानित हो चुकी हैं। आर्ट ऑफ लिविंग बालोद की भी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं, बच्चों को लगातार नेशनल स्तर तक और कई बार राज्य स्तर तक ले जाने वाली मार्गदर्शक शिक्षिका के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई। पर्यावरण प्रेमी के रूप में भी उनकी अलग पहचान है। रेडक्रास काउंसलर है एवं रेडक्रास में निक्षय मित्र भी बनी है, टीबी के मरीज को प्रतिमाह पोषक आहार प्रदान करने का कार्य करती हैं। और इस पुनीत कार्य हेतु कलेक्टर सर से सम्मान भी प्राप्त हो चुका हैं। डाइट दुर्ग के मार्गदर्शन में जिला से 4 शिक्षकों ने शोध पत्र पर कार्य किया है ,उसमें इनका भी शोध पत्र प्रस्तुत एवं प्रकाशित हो चुकी हैं। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में राज्य स्तर पर भी उनकी भागीदारी रही है। इस तरह बहुमुखी प्रतिभा एवं सक्रिय शिक्षिका के रूप में जिला से राज्य तक उनकी अपनी अलग पहचान हैं।
