बच्चे बोलते हैं इन्हें “फ्यूचर गाइड”, मानते हैं “फैमिली मेंबर”



स्कूल में बच्चों से करती है एक मां की तरह व्यवहार

अपने उत्कृष्ट कार्यो के लिए मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण शिक्षादूत पुरस्कार पा चुकी है विमला बिंदिया रानी गंगबेर

इसी साल प्रधानपाठक रवेंद्र जाधव , सीएसी डिगेन्द्र गंगबेर के मार्गदर्शन में शासकीय प्राथमिक शाला भोथली की विमला बिंदिया रानी गंगबेर को मिला उत्कृष्ट शिक्षक का सम्मान

डीबी डिजिटल मीडिया गुरूर। कहते हैं अपने घर से ज्यादा बच्चे स्कूल में समय बिताते हैं, बच्चे मां बाप से ज्यादा अपने गुरुओं के करीब होते हैं। अगर गुरु सही मिल जाए तो बच्चों का भविष्य संवर जाता है। गुरुजनों का व्यवहार बच्चों के मन मस्तिष्क पर काफी प्रभाव डालता है। इस बात को ध्यान रखते हुए गुरूर ब्लॉक की भोथली प्राइमरी स्कूल में पदस्थ शिक्षिका विमला (बिंदिया) रानी गंगबेर बच्चों से शिक्षिका कम एक “मां” की तरह व्यवहार करती है,वह बच्चों की दोस्त भी बन जाती है तो कभी उन्हें मातृ प्रेम भी जताती है। नवचारी गतिविधियों, खेल-खेल में पढ़ाई का बोझ कम करते हुए उनके द्वारा शिक्षा दी जाती है। शाला प्रबंधन समिति के लोगों और ग्रामीणों के साथ उनके मधुर संबंध है। उनके द्वारा पढ़ाए बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए मार्गदर्शन देती है। नवाचारी गतिविधि और बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार उनकी विशेष पहचान है। उनके इन्हीं उत्कृष्ट कार्यो को देखते हुए इसी साल फरवरी में तत्कालीन कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण शिक्षा दूत पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके अलावा अन्य संगठनों के जरिए भी उन्हें सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। शिक्षिका श्रीमती गंगबेर पहले गुरूर ब्लॉक के ही बासिन संकुल में डांडेसरा स्कूल में पदस्थ थी, अब भोथली आ चुकी है लेकिन उनके पढ़ाए पुराने बच्चे आज भी उनसे स्नेहवश जुड़े हुए हैं। पढ़ चुके बच्चों को वह कैरियर मार्गदर्शन भी देती है। जिसके कारण बच्चे उन्हें “फ्यूचर गाइड” के रूप में भी पुकारते हैं। उनके अपनेपन व्यवहार के कारण उन्हें “फैमिली मेंबर” भी मानते हैं।

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान भी पा चुकी

श्रीमती गंगबेर की पठन पाठ्य शैली और उनके तौर तरीकों की चर्चा सिर्फ गुरूर ब्लॉक या बालोद जिला तक सीमित नहीं है, उनके कार्यों से पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तक भी परिचित है। जहां के शिक्षा संगठनों द्वारा उन्हें पिछले साल जुलाई में राष्ट्रीय नारी शक्ति से अवार्ड से नवाजा है। उक्त आयोजन यूपी के बदायूं में संत पाल राठौड़ स्मृति सम्मान समारोह के तहत हुआ था। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पर सम्मानित हो चुके शिक्षकों के संगठन द्वारा हर साल यह आयोजन किया जाता है। जिसमें देशभर से चुनिंदा और नवाचारी गतिविधियों में संलग्न शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के लिए चयन किया जाता है। इसी क्रम में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने का मौका शिक्षिका बिंदिया विमला रानी को भी मिला था।

बच्चे बोलते हैं फर्राटेदार अंग्रेजी

उनके द्वारा बच्चों को नवाचारी तरीके से शिक्षा दी जाती है। प्राइमरी स्कूल के बच्चे भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। साथ ही बच्चों और गांव की महिलाओं सहित बुजुर्गों से उनके व्यवहार की सराहना होती है। बच्चों से उनका व्यवहार ऐसा है कि बच्चे उन्हें मैम ना बोलकर सिर्फ मां के नाम से संबोधित करते हैं। बच्चों के घर में भी पारिवारिक सदस्य की तरह वह जुड़ी हैं। साथ ही उनकी माता और अन्य पालकों से भी वे लगातार जुड़ी रहती हैं और अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। साथ ही गांव की महिला समूह की प्रेरणा स्रोत भी वह है। उनके नेतृत्व में तीन से चार महिला समूह का गठन भी हुआ है और वे महिलाएं आर्थिक बचत कर अपनी जिंदगी सवार रही है।

हरित क्रांति अभियान भी चला रही गांव में,महिलाओं की एकजुट

इसके अलावा हरित क्रांति के तहत वह गांव में वृक्षारोपण भी करवा चुकी है। आज उनके नेतृत्व में लगाए पौधे सही देखभाल और संरक्षण के कारण पेड़ बनने लगे हैं। समय-समय पर महिलाओं को प्रोत्साहित करने का काम भी उनके द्वारा किया जाता है। सिर्फ भोथली, डांडेसरा गांव ही नहीं बल्कि अपने गृह ग्राम जेवरतला में भी वह महिलाओं को आगे लाने के लिए काम कर रही हैं। उनके इन्हीं कार्यों सहित गांव के विकास में भी छोटे-छोटे योगदान के चलते उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नारी शक्ति सम्मान मिला था ।

बच्चे हैं उनके व्यवहार के कायल

शिक्षिका के मधुर व्यवहार और पढ़ाई के तरीकों के बच्चे कायल है और यही वजह है कि स्कूल से पढ़कर निकल चुके बच्चों सहित वर्तमान में जो पढ़ रहे हैं वह भी उनसे एक मां और बच्चों के रिश्तों की तरह जुड़े हुए हैं। कहते हैं शिक्षक भी बच्चे बन जाए तो बच्चों की पढ़ाई आसान हो जाती है। ऐसे ही कुछ प्रयोग के जरिए शिक्षिका विमला (बिंदिया) रानी गंगबेर बच्चों को पढ़ाती है। वह बच्चों के साथ बच्चों की तरह उनके दोस्त और मां बन जाती है। उनके साथ कक्षा की गतिविधियों में जमीन पर ही बैठकर बच्चों को मित्रवत व्यवहार कर उनकी बातों और समस्याओं को सुनती, समझती है। पढ़ाई में खेल गीत नृत्य को विशेष रूप से शामिल कर सीखने सिखाने का माध्यम बनाती है। नैतिक शिक्षा का परिपालन, पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन कार्यक्रम आयोजित करती है। नवाचार के नित नए-नए प्रयोग से बच्चों की समझ को विस्तार करना उनका मुख्य उद्देश्य है। ग्रामीण स्तर पर खेले जाने वाले खेलों में पिंकी पिंकी व्हाट कलर से,,,, रंगों के नाम, पेड़ पौधों के नाम, विभिन्न सब्जियों के नाम, वस्तुओं के नाम को बच्चों में सीखने के माध्यम से पढ़ाई को रुचि कर बनाती है। 2008-10 बैच में पढ़ाए हुए बच्चों द्वारा उन्हें स्पोर्ट्स टीचर सम्मान दिया गया है। तो वही ग्रामीण स्तर पर पुराने पढ़ाए गए बच्चों को प्रेरित हेतु उन्हें फ्यूचर गाइडर टीचर सम्मान भी मिल चुका है।

इसके अलावा ये है उनकी खास उपलब्धियां

मतदान के सभी चरण जैसे विधानसभा, लोकसभा और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। मतगणना अधिकारी क्रमांक 1 के रूप में उन्होंने कार्य किया। जिला प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा निर्देश को बखूबी निर्वहन करने के लिए कलेक्टर द्वारा भी उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान मिल चुका है। एनटीसीएफ़ कार्यकर्ता के रूप में भी शिक्षा में नवाचार कर रही। समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ ऑनलाइन कैपसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम ,साइबर सुरक्षा, कोविड 19 हेतु जन आंदोलन जागरुकता व व्यवहार हेतु सम्मानित हुई है। इसके अलावा कोविड 19 में ऑनलाइन पढ़ाई हेतु, दिल्ली शिक्षण अधिगम और मूल्यांकन में आई. सी. टी. (सूचना एवं प्रौद्योगिकी) हेतु प्रमाण पत्र मिला है। योग एवम व्यायाम में ब्लॉक व जिला स्तर पर प्रथम, निरंतर दो वर्ष (बच्चों द्वारा) बेस्ट एक्टिविटी टीचर, युवा महोत्सव में संभाग स्तर पर प्रथम सामूहिक कर्मा नृत्य में, कोविड 19में लगातार बच्चों से संपर्क व ऑफलाइन क्लास सामुदायिक भवन डांडेसरा में, मास्क वितरण, 100 दिन पठन में ब्लॉक पीएलसी के रूप में कार्य, अंगना मां शिक्षा हेतु ब्लॉक स्तरीय कार्य,स्काउट गाइड में बुलबुल दल संचालन, एनटीसीएफ द्वारा बेस्ट डांस टीचर और बेस्ट मंच संचालन हेतु सम्मानित, डांडेसरा गांव में बेस्ट शिक्षिका,बेस्ट पालक संपर्क व एसएमसी से संपर्क,नवाचारी शिक्षक हेतु ब्लॉक स्तरीय प्रदर्शनी, डांडेसरा गांव में बेस्ट शिक्षिका,बेस्ट पालक संपर्क व एसएमसी से संपर्क हेतु, नवाचारी शिक्षक हेतु ब्लॉक स्तरीय प्रदर्शनों में सम्मानित हो चुकी हैं। उन्हे भारतीय दलित साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

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