डीबी डिजिटल मीडिया बालोद । शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, नेवारीकला रजत जयंती वर्ष आयोजन ,भाषण प्रतियोगिता हुई।शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, नेवारीकला में “रजत जयंती के स्वर्णिम पटल पर – मेरे सपनों का स्कूल” विषयक भाषण प्रतियोगिता का भव्य आयोजन हुआ। जहाँ विचारों ने नई उड़ान भरी, कल्पनाओं ने स्वर पाया और नन्हे-मुन्ने बालमस्तिष्कों ने उज्ज्वल भविष्य की सुनहरी तस्वीर गढ़ी।प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं अपार उत्साह के साथ सहभागिता की।

किसी ने स्वच्छ, हरे-भरे विद्यालय का स्वप्न चित्रित किया, तो किसी ने स्मार्ट क्लास, समृद्ध पुस्तकालय और सुसज्जित प्रयोगशाला की आवश्यकता पर बल दिया। कुछ बच्चों ने अनुशासन और संस्कारों से युक्त आदर्श विद्यालय की परिकल्पना प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। जिज्ञासा ने भावपूर्ण शब्दों में कहा “मेरे सपनों का स्कूल वह है, जहां हर छात्र को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिले। जहां शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न होकर, जीवन के हर पहलू में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे।”मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास और उत्साह देखते ही बनता था। उनकी ओजस्वी वाणी और अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस प्रतियोगिता में जिज्ञासा, समृद्धि, नम्रता, आयुष, राधिका, प्रिया, पायल, मीनाक्षी, तनुजा, अनीता, इशिका एवं खुमेश्वरी ने भाग लिया। निर्णायक मंडल ने भाषा, उच्चारण, प्रस्तुति-शैली और आत्मविश्वास के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। विशेष अवसर पर हाल ही में आयोजित रजत जयंती क्विज़ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली रानी दुर्गावती दल की छात्राएँ – जिज्ञासा, भावना, तृषा, भूमि और प्रिया को सम्मानित किया गया। भाषण प्रतियोगिता में जिज्ञासा, आयुष, समृद्धि और खुमेश्वरी ने विजय प्राप्त की। उन्हें भी मंच पर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। श्री सी.आर. ठाकुर, श्री बेनेश्वर कुमार साहू, श्री हरीश कुमार बर्मन एवं श्रीमती आभा श्रीवास्तव ने प्रतियोगिता को गरिमामयी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला।कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री नंदकिशोर यादव ने भावविभोर होकर कहा कि “हमारे बच्चों के सपने ही हमारे विद्यालय की असली पहचान हैं। हमें गर्व है कि हमारे विद्यार्थी अपने विचार इतने सुंदर और सशक्त रूप में व्यक्त कर रहे हैं। यही हमारे भविष्य की आधारशिला है।”
