शिक्षक दिवस पर नेवारीकला में गूँजी गुरु महिमा की वाणी



डीबी डिजिटल मीडिया बालोद।शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, नेवारीकला में शिक्षक दिवस का मंगलाचरण अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ ज्ञानदायिनी माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे सम्पूर्ण परिसर में पावनता और आभा का संचार हुआ। इस अवसर पर शिक्षकों ने भारत रत्न, महामानव, दार्शनिक एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरणादायी जीवन और उनके शिक्षा-दर्शन को स्मरण करते हुए शिक्षक दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन शिक्षा-जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना हम सभी के लिए गौरव का विषय है। साथ ही आदरणीय शिक्षकों ने अपने-अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व, संस्कार एवं अनुशासन की सीख भी दी। विद्यालयीन विद्यार्थियों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। नृत्य, समूहगान ,भाषण एवं काव्यपाठ जैसी विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने गुरु-शिष्य परंपरा के गौरव का गान किया तथा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन कु. तृसा एवं कु. प्रिया ने किया। उनकी मधुर वाणी, आत्मविश्वास एवं सुगठित प्रस्तुति ने समारोह में विशेष आकर्षण का संचार किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री लोमस साहू विराजमान रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में बच्चों को शिक्षा-पथ पर निरंतर अग्रसर रहने का आह्वान किया तथा गुरुजनों को जीवन के शाश्वत पथप्रदर्शक मानकर सदैव उनका सम्मान करने का संदेश दिया। समारोह में गुरुजनो के सम्मानार्थ ,श्री एन.के. यादव, प्रधानाध्यापक, पूर्व माध्यमिक शाला नेवारीकला;श्री विष्णु साहू, प्रधानाध्यापक, शासकीय प्राथमिक शाला; श्री सी.आर. ठाकुर, शिक्षक; श्री बेनेश्वर साहू, शिक्षक; श्री हरीशकुमार बर्मन, शिक्षक; श्रीमती आभा श्रीवास्तव, शिक्षिका; श्रीमती तरुण बघेल, सहायक शिक्षिका तथा श्रीमती साहू, सहायक शिक्षिका का अभिनंदन उपहार भेंट कर सादर सम्मानित किया गया। अंत में प्रधानाध्यापक श्री नंदकिशोर यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुरु केवल अध्यापक नहीं, अपितु वह प्रज्वलित दीप हैं जो अज्ञान रूपी तमस को चीरकर जीवन पथ को आलोकित करते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से इस आयोजन की सम्पूर्ण रूपरेखा तैयार करने और प्रत्येक प्रस्तुति को सफलतापूर्वक मंच पर उतारने वाले विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन बालक-बालिकाओं ने अपने श्रम, सृजनशीलता और समर्पण से यह सिद्ध कर दिया कि छोटी उम्र में भी यदि लगन और निष्ठा हो तो बड़े से बड़ा कार्य गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न किया जा सकता है। इस प्रकार डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति एवं गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा में संपन्न यह समारोह सर्वथा आनंदमय एवं अनुकरणीय सिद्ध हुआ।

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