बालोद। शिक्षक दिवस वह अवसर है जब समाज अपने गुरुजनों को नमन कर उनकी उत्कृष्ट सेवाओं का सम्मान करता है। किंतु विडंबना यह है कि बालोद जिले में एक राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर सम्मानित शिक्षक को अपमानित करने वाली प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। यह वही शिक्षक हैं जिन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कारों से नवाजा गया, जिन्होंने शैक्षणिक नवाचारों से जिले का गौरव बढ़ाया और जिन्हें दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार हेतु राज्य शासन को अनुशंसित किया गया। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने उन्हें न केवल कनिष्ठ घोषित किया बल्कि “अतिशेष” की सूची में डालकर उनके स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंचाई। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा अधिनियम 1961 की धारा 12(क) में स्पष्ट प्रावधान है कि सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों की वरिष्ठता उनकी नियुक्ति हेतु की गई अनुशंसा के क्रम पर आधारित होगी, न कि कार्यभार ग्रहण करने की तिथि पर। किन्तु बालोद जिला प्रशासन ने इस नियम को दरकिनार करते हुए वरिष्ठ शिक्षक को अनुचित रूप से कनिष्ठ ठहराया और युक्तियुक्तरण प्रक्रिया में अतिशेष घोषित कर दिया। यह वही शिक्षक हैं जिन्हें विभाग ने स्वयं अति-श्रेष्ठ एवं अनुकरणीय माना, अनेक राष्ट्रीय मंचों से सम्मानित किया गया। ऐसे में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करना और गलत तरीके से “अतिशेष” घोषित करना न केवल नियम विरुद्ध है बल्कि यह संदेश देता है कि योग्य और ईमानदार शिक्षक भी प्रशासनिक अन्याय का शिकार हो सकते हैं। यह केवल एक शिक्षक का मामला नहीं है। शिक्षक दंपति — श्री रघुनंदन गंगबोईर एवं उनकी पत्नी श्रीमती पुष्पा गंगबोईर — दोनों ही प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की गलत व्याख्या के कारण प्रताड़ित हो रहे हैं। श्रीमती पुष्पा गंगबोईर को सहायक शिक्षक से शिक्षक पदोन्नति के समय अंग्रेजी विषय में स्नातक होने के बावजूद जिला मुख्यालय के रिक्त पदों से वंचित किया गया। अंग्रेजी विषय के 70–80% विद्यालयों में शिक्षक न होने के बावजूद, काउंसिलिंग में मुख्यालय की शालाओं के रिक्त पद छिपा लिए गए। परिणामस्वरूप उन्हें दूरस्थ विद्यालय भेजा गया और वर्तमान युक्तियुक्तरण में भी वही अन्याय दोहराया गया। सवाल यह उठता है — क्या जिला मुख्यालय के विद्यार्थियों को अंग्रेजी शिक्षक की आवश्यकता नहीं है, या इन पदों को जानबूझकर अन्य माध्यम से भरने की योजना बनाई जा रही है?दिनांक 15.07.25 को दाखिल आरटीआई आवेदन में मांगी गई जानकारी अधूरी और भ्रामक दी गई . वरिष्ठता नियम : प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।. युक्तियुक्तरण नीति (02.08.2024) : मांगे गए बिंदु की स्पष्ट प्रति नहीं दी गई।. विद्यालयवार सूची : “प्रश्नात्मक जानकारी” कहकर अस्वीकार कर दी गई, जबकि यह विभागीय आदेशों में दर्ज तथ्यात्मक सूचना है।यह सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) एवं 2(f), 2(i) का खुला उल्लंघन है। विडंबना यह है कि इग्नाइट सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल (पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा स्थापित) में भी अंग्रेजी विषय के पद को युक्तियुक्तरण के दौरान प्रदर्शित नहीं किया गया।
यह वही विद्यालय है जहाँ पूरे विकासखंड के जरूरतमंद विद्यार्थी पढ़ने आते हैं, किंतु उन्हें अंग्रेजी विषय के शिक्षक से वंचित रखा गया। जब पूरा देश शिक्षकों के योगदान का सम्मान कर रहा है, उसी दिन बालोद में सम्मानित शिक्षक दंपति को अपमानित करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। “राज्य से सम्मान, जिले से अपमान” — यही आज की सबसे बड़ी विडंबना है।
लंबे समय से वेतन रोके जाने और बार-बार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होने के बावजूद यह शिक्षक दंपति पूरी निष्ठा से शिक्षा कार्य में जुटा रहा है। अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन तात्कालिक हस्तक्षेप कर इस अन्याय का अंत करे। भगवान श्री गणपति से यही प्रार्थना है कि शासन को सद्बुद्धि मिले और शीघ्र ही न्यायपूर्ण समाधान निकाले, ताकि यह उत्कृष्ट शिक्षक पुनः पूर्ण मनोयोग से शिक्षा के अपने पवित्र कर्तव्य का निर्वहन कर सकें।
सम्मानित शिक्षक का अपमान : प्रशासन की लापरवाही ने छीना स्वाभिमान
