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शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मड़ियाकट्टा में एक पेड़ मां के नाम अभियान का 30 अगस्त को होगा समापन

पेड़ों के बिना धरती पर जीव और जीवन की कल्पना करना भी असंभव: दयालूराम पिकेश्वर

पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए पेड़ पौधे लगाना जरुरी है,एक पेड़ मां के नाम यानि हरे भरे स्वच्छ भविष्य का निर्माण

डीबी डिजिटल मीडिया डौंडीलोहारा। डौण्डी लोहारा विकास खण्ड आदिवासी वनांचल ग्राम मड़ियाकट्टा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान शुरू हुआ है, जिसमें विभिन्न कार्यक्रम आयोजन के साथ 30 अगस्त को समापन होगा। इस अवसर पर बच्चों, ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षकों द्वारा शाला परिसर में अपने घर और आसपास पौधा लगाया और सुरक्षा का संकल्प लिए हैं। बच्चें, शिक्षक हर रोज प्रार्थना सभा में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण का संदेश देतें है।


इस अवसर पर राज्यपाल पुरुस्कृत प्रधान पाठक दयालूराम पिकेश्वर ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और माताओ के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इसके तहत लोगों को अपनी माताओं के नाम पर पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।जिससे पर्यावरण संरक्षण जागरूकता फैले और एक स्थायी स्मृति बन सके। राज्यपाल पुरस्कृत प्रधान पाठक दयालूराम पिकेश्वर बताया कि एक पेड़ मां के नाम यह अभियान विभिन्न उद्देश्य को पूरा करता है जैसे:

पर्यावरण संरक्षण
पेड़ लगाने से पर्यावरण को स्वच्छ और हरा भरा रखने में मदद मिलती है,जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओ से निपटने में सहायक है।

मातृशक्ति का सम्मान

यह अभियान माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका है जो जीवन को पोषित करन और परिवार को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सामुदायिक भागीदारी

इस अभियान में समुदाय के सभी लोगों को शामिल किया जाता है,जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और लोग एक साथ मिलकर काम करते है।

स्थायी स्मृति

पेड़ लगाना एक स्थायी स्मृति छोड़ जाता है जो आने वाले पिढ़ियो को प्रेरित करता रहेगा। एक पेड़ मां के नाम अभियान एक सुन्दर पहल है जो पर्यावरण संरक्षण और मातृशक्ति के सम्मान को एक साथ लाती है।
राज्यपाल पुरस्कृत प्रधान पाठक दयालूराम पिकेश्वर ने बच्चों को सीड बाल बनाने के लिए विधि बताई। जिसके लिए बीज, मिट्टी, खाद और पानी की आवश्यकता होगी। सबसे पहले बीजो को मिट्टी और खाद के मिश्रण में लपेटा जाता है। फिर पानी डालकर उन्हे गेंदो के आकार दिया जाता है। इन गेंदो को धूप में सूखाकर फिर उपयुक्त स्थान पर फेका जाता है। जहां बारिश होने पर अंकुरित हो जाता है। पेड़ पौधे के बिना धरती पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती जब भी कोई मौका मिले हम सबको पौधा रोपण करना चाहिए। आजादी के अमृत उत्सव के अवसर पर एक विद्यार्थी एक पेड़ अभियान, एक पेड़ एक जिदंगी, अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण संदेश दिया जा रहा है। इस अवसर पर शिक्षक सुनिल कुमार अलेन्द्र, नारदराम भुआर्य, दीनदयाल अटल, गांधीराम बघेल, नारायण सिंह कोठारी,भूमिका मोवाड़े का सहयोग रहा।

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