बिना किसी सरकारी मदद के 40 ज्यादा बीमार और दिव्यांग गौ माताओं की सेवा हो रही अभी
भागवत कथा के दौरान मिलने वाली दानराशि सहित स्वयं के आय से अर्जित धन का अंश गौशाला में लगाया जाता है
बालोद। आज शनिवार को छत्तीसगढ़ में पोला पिठौरा का त्यौहार मनाया जा रहा है। जो कि मुख्य रूप से पशुधन की पूजा अर्चना का त्यौहार होता है। इस पोला के पारंपरिक उत्सव पर हम गुरूर ब्लॉक के ग्राम कन्हारपुरी में संचालित हो रहे एक ऐसी गौशाला आश्रम के बारे में बता रहे हैं, जो सिर्फ दिव्यांग और बीमार गौ माताओं के लिए बना हुआ है। लगभग 2 साल से संचालित इस गौशाला आश्रम में वर्तमान में 40 से ज्यादा गौ माता की सेवा हो रही है, वह भी बिना किसी सरकारी मदद के।

आपस में ही कथा वाचक दास बंटी गोपाल कुंभज और उनके साथी अमृत सोनी, कमल नारायण साहू द्वारा मिलकर यह गौशाला आश्रम चलाया जा रहा है। जो कि जिले वासियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। इस गौशाला परिवार से जुड़े लोग अपनी-अपनी स्थिति के अनुसार गौ माता की सेवा के लिए अंशदान, अर्थदान आदि करते हैं। किसी का जन्मदिन होता है तो तुलादान के जरिए पशु आहार देने का काम भी यहां किया जाता है। पोला के 1 दिन पहले ही शुक्रवार को 13 साल की एक बच्ची पलक साहू ने अपने जन्मदिन पर अपने वजन के अनुसार तुलादान करते हुए पशु आहार गौ माता के लिए भेंट किया। इसके पहले भी अन्य गौ माता प्रेमी अपनी-अपने इच्छा से यहां पशुओं की सेवा कार्य के लिए दान करते हैं। गुरुर नगर की बात हो चाहे आसपास के कहीं भी ग्रामीण क्षेत्र, जहां भी गौ माता के घायल होने, बीमार होने की सूचना मिलती है तो गौशाला से जुड़े लोग स्वयं की गाड़ी लगाकर पहुंच जाते हैं और उन्हें उठाकर गौशाला में लाकर सेवा करते हैं। ऐसा पुण्य कार्य 2 साल से जारी है।

अन्य गौशालाओं की अपेक्षा विशेष है ये आश्रम रूपी गौशाला
जहां एक ओर कुछ गौशालाएं सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने मात्र के लिए खोली जाती है और सरकार से अनुदान लेकर गौ सेवा दिखाते हैं। पर उनकी अपेक्षा कन्हारपुरी का यह गौशाला एक आश्रम रूप और सेवा भाव से संचालित हो रहा है। दूसरों की अपेक्षा इस आश्रम की खास विशेषता है। कन्हारपुरी में भागवत कथा से जुड़े लोगों द्वारा मिलकर श्री शंकर गौरी गोपाल असहाय दिव्यांग गौसेवा संस्थान नाम से गौशाला आश्रम खोला गया है। गौशाला में खासतौर से दिव्यांग गौ माता की सेवा की जाती है। भागवत कथा आयोजन के दौरान मिलने वाली दान राशि को पूरी तरह से इस आश्रम गौशाला को चलाने में खर्च किया जाता है। इस गौशाला के बारे में श्री दास बंटी गोपाल कुंभज जी महाराज ने बताया कि जो दुर्घटना का शिकार होते हैं ऐसी गौ माता को यहां लाकर सेवा किया जाता है। वही ऐसे माता-पिता जिनके कोई सहारा नहीं है उन्हें भी यहां मदद की जाती है। भागवत कथा पुराण में जो भी आय होती है उसका पैसा इस आश्रम में लगाया जाता है। 20 से 25 गरीब बच्चों की भी मदद दान राशि से कर चुके हैं। जो बच्चे और दिव्यांग अपनी स्कूल का फीस नहीं पटा पाते उनकी भी मदद करते हैं। जहां गौशाला खुला है वह जमीन अमृत सोनी ज्योतिष आचार्य और कमल नारायण साहू की है। कुछ महीने पहले आश्रम में एक गरीब परिवार की बेटी की शादी भी मिलकर कराई गई थी।
गौ सेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है गौशाला की शुरुआत
गौशाला आश्रम प्रमुख दास बंटी गोपाल कुंभज महाराज ने बताया उन्होंने हरिद्वार से दीक्षा ली है। उन्होंने ऐसा करने के विचार के पीछे बताया कि मुझ पर ईश्वरी कृपा है। पेशे से वे एक मूर्तिकार चित्रकार है और भगवान के चित्र और मूर्तियां बनाते हुए भागवत की ओर प्रेरित हुए। यहां पर मुख्य उद्देश्य विकलांग गौ माता की सेवा करना है। साथ ही अतिअनाथ माता-पिता की भी सेवा यहां की जाएगी। भागवत कथा के माध्यम से जो भी दान आता है उसका इस्तेमाल यहां होता है। उन्होंने कहा कि आज लोग नारे तो देते हैं गौ हत्या बंद करो लेकिन वही गौ माता जब सड़क पर दुर्घटना का शिकार हो पड़ी रहती है तो उसे कोई उठाने तैयार नहीं होता। यही सीख हम समाज को देना चाहते हैं और गौ सेवा को बढ़ावा दे रहे हैं। गौ माता कहीं भी हो जो हमारी नजर में आते हैं तो उसे यहां लाते। गुरुर क्षेत्र में गौ माता की सेवा को बढ़ावा दिया जाएगा। इस गौशाला का आश्रम का नाम श्री शंकर गौरी गोपाल आश्रम कन्हारपुरी गुरुर रखा गया है। कहीं भी कोई गौ माता दुर्घटनाग्रस्त रहती है तो लोग यहां पहुंचा सकते हैं। पहुंचाने वाले को भी सहायता राशि दी जाती है। उन्हें गाड़ी का खर्चा दे दिया जाता है। लोगों से अपील की जा रही है कि कहीं भी गौ माता दुर्घटनाग्रस्त नजर आती है तो सूचना दें और यहां पहुंचाएं। यहां हम डॉक्टर बुलाकर उनकी सेवा करेंगे। कहीं गौ माता दिव्यांग है तो ऐसे गौ माता को जल्द से जल्द गौशाला लाकर उनकी सेवा की जाती है। विकलांग गायों का मुफ्त इलाज होता है।
