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ऐसा स्कूल जहां छात्र-छात्राओं को पुकारते हैं भैया दीदी के संबोधन से, संस्कारों के बीच मना रक्षाबंधन का पर्व

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बालोद। सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में संस्कारों के साथ रक्षाबंधन मनाया गया। आपको बता दे की सरस्वती शिशु मंदिरों में छात्र-छात्राओं को भैया दीदी कह कर ही संबोधित किया जाता है। इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सिखाए जाते हैं और यही वजह है कि रक्षाबंधन जैसे स्नेह और संस्कारों से भरे पर्व का आयोजन यहां विशेष तरह से होता है। विधि विधान मंत्र उच्चारण के बीच छात्राएं ,छात्रों को रक्षा सूत्र राखी बांधते हैं। इस क्रम में जगन्नाथपुर के सरस्वती शिशु मंदिर में भी विशेष आयोजन किया गया। सोमवार को विद्यालय में बच्चों के बीच संस्कारों के साथ रक्षाबंधन मनाया गया। इस दौरान कक्षा अरुण से लेकर अष्टम तक की छात्राओं ने विद्यालय के एक-एक छात्रों को रक्षा सूत्र राखी बांधी और उनका आशीर्वाद लिया। वहीं छात्र भाइयों ने अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए तोहफे में पेन पेंसिल आदि भेंट किया। प्रधानाचार्य ताराचंद साहू सहित शिक्षकों ने बच्चों को इस दौरान रक्षा बंधन का महत्व समझाया। बच्चों को बताया गया कि यह एक प्रिय हिंदू त्योहार है जो भाई-बहनों के बीच के अनूठे बंधन का सम्मान करता है। “रक्षा बंधन” शब्द दो संस्कृत शब्दों से लिया गया है: “रक्षा,” जिसका अर्थ है सुरक्षा, और “बंधन,” जिसका अर्थ है बाँधना। इसलिए, यह त्योहार “सुरक्षा की गाँठ या बंधन” का प्रतीक है। रक्षा बंधन के दौरान, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी नामक एक पवित्र धागा बाँधती हैं, जो उनके भाइयों की भलाई के लिए उनके प्यार और प्रार्थना का प्रतीक है। बदले में, भाई जीवन भर अपनी बहनों की रक्षा और समर्थन करने का वचन देते हैं। प्रेम और कर्तव्य का यह उत्सव सिर्फ़ रक्त संबंधों तक ही सीमित नहीं है; यह चचेरे भाई-बहनों, बहनों और भाभी, चाची (बुआ), भतीजे (भतीजा) और अन्य करीबी रिश्तों के बीच भी मनाया जाता है। यह त्योहार इन बंधनों की स्थायी और सुरक्षात्मक प्रकृति को खूबसूरती से दर्शाता है। इस मौके पर शिक्षकों में रेखलाल देशमुख, खेमिन साहू, धनंजय साहू, रीना देशलहरे,भावना सुनहरे, लक्ष्मी साहू, चैन कुमारी नेताम,माधुरी यादव, त्रिवेणी यदु, किरण यादव,हरीश साहू,नुमेश्वरी विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।

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