ये तो गलत बात है: बिच्छीबाहरा प्राइमरी स्कूल में बदहाल है सिस्टम, बच्चे बता रहे: शराब के नशे में रोजाना स्कूल आते हैं एचएम!



नियमित निगरानी ना होने से वनांचल के गांव में है यह दुर्दशा, विभाग के अफसर तक शिकायत के बाद भी नहीं लेते कोई संज्ञान

बालोद जिले में पहले भी सामने आ चुके हैं शराबी शिक्षकों का मामला

ग्राउंड रिपोर्टिंग, दीपक देवदास

बालोद/ गुरुर। बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक के जगतरा संकुल अंतर्गत प्राइमरी स्कूल बिच्छीबाहरा में बच्चे अपने शराबी प्रधान पाठक से परेशान है। यहां पदस्थ भुवनेश्वर मंडावी नाम के प्रधान पाठक आए दिन शराब के नशे में स्कूल आते हैं। जिससे वे ना तो स्कूल में पढ़ा पाते हैं ना ही कोई विभागीय कार्य कर पाते है। कई बार उन्हें ग्रामीणों द्वारा समझाइश दी गई है लेकिन वह अपनी हरकतों में जरा भी सुधार नहीं ला रहे हैं। मामले की जब हमें जानकारी मिली तो हमने स्कूल पहुंचकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वहां के बच्चों, शिक्षक व ग्रामीणों से भी जानकारी हासिल की। जो शिकायत प्राप्त हो रही थी उसमें पूरी सच्चाई पाई गई। कई बच्चों ने हमारे सामने ही बताया कि प्रधान पाठक भुवनेश्वर मंडावी की हरकतें कितनी खराब है…। बच्चों ने खुलकर कहा कि सर शराब पीकर स्कूल आते हैं, ठीक से पढ़ा नहीं पाते हैं। धीरे-धीरे बोलते हैं। उनकी जुबान लड़खड़ाती है और हमें उनका पढ़ाया हुआ समझ भी नहीं आता है। खुलेआम स्कूल में भी जाम छलकाते हैं। बच्चे अगर उन्हें मना करते हैं तो उन्हें गंदी-गंदी गालियां तक देते हैं। यहां पदस्थ एक शिक्षिका लक्ष्मी सिन्हा ने बताया कि शराब के नशे में प्रधान पाठक का स्कूल आना यहां आम बात हो गई है। पालक समिति की बैठक में कई बार उन्हें समझाइश दे चुके लेकिन वह सुधर नहीं रहे हैं। विभाग के हर काम भी मुझे ही करने पड़ते हैं। कहीं भी विभागीय काम से जाना होता है तो प्रधान पाठक की जगह मुझे ही जाना पड़ता है। स्थिति यह है कि अगर किसी दिन मैं छुट्टी में रहूं तो उस दिन भी प्रधान पाठक स्कूल नहीं आते हैं। बीच में ऐसी शिकायत आई थी तो पालकों ने काफी नाराजगी जताई थी। पर प्रधान पाठक के व्यवहार में सुधार नजर नहीं आ रहा है। इससे बच्चे और पालक भी परेशान है और हम भी। इस स्कूल में 15 बच्चे पढ़ाई करते हैं। जिन्हें संभालने की अकेले जिम्मेदारी मानो शिक्षिका लक्ष्मी सिन्हा के ऊपर आ गई है। क्योंकि प्रधान पाठक तो सिर्फ नाम के रह गए हैं। वह यहां आते हैं जाम छलकाते हैं और चले जाते हैं। पढ़ाई के नाम पर उनके द्वारा कुछ प्रयास नहीं किया जाता है। जानकारी है कि पहले भी जिस स्कूल में पदस्थ रहे वहां भी उनकी इसी तरह की हरकत थी । जिसके चलते उन्हें वहां से हटा कर दूसरे स्कूल भेजा गया था। अब अपने गृह ग्राम से लगे हुए स्कूल में पद स्थापना पाने के बाद भी उक्त प्रधान पाठक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। बच्चों ने हमें बताया कि स्कूल में वे अधिकतर समय शराब के नशे में ही रहते हैं। कई बार तो वे पानी के बोतल में शराब भरकर लाते हैं और स्कूल के बाउंड्री वाल के पास शराब पीते रहते हैं। बच्चे मना करते हैं तो उन पर गाली-गलौज कर उन्हें धमकाते हैं। गुटखा खाते हुए भी में पढ़ाते रहते हैं और इधर-उधर कहीं पर भी थूक देते हैं। बच्चों ने बताया कि प्रधान पाठक को पढ़ाना भी नहीं आता, वे तो नशे में बेसुध रहते हैं और जब पढ़ा नहीं पाते तो हमें कहते हैं गाइड देखकर लिख लो। जिस दिन मैडम लक्ष्मी सिन्हा स्कूल नहीं आती उस दिन तो वे शराब लेकर स्कूल आ जाते हैं। गांव वालों को भी उनकी हरकतों के बारे में पता है। कई बार शिकायत हो चुकी है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।

विभाग के काम में भी होती है लापरवाही

विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि प्रधान पाठक द्वारा विभागीय काम में भी लापरवाही बरती जाती है । अगर कोई आवश्यक काम हो तो उनका मोबाइल नंबर अक्सर बंद बताया जाता है या अक्सर वे स्कूल से बिना बताए गायब हो जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर मीटिंग में भी उन्हें समझाते रहते हैं ।पर वे सुधरते नहीं है। कई बार मीटिंग का दिन तय होता है तो उस दिन ही वे गायब हो जाते हैं। जबकि उन्हें पहले से ही सूचना दे दिए रहते हैं। जिम्मेदारी नाम की उक्त प्रधान पाठक में कुछ भी नजर नहीं आता है। इस बात से विभाग के उच्च अधिकारी भी अवगत है। पर अब तक उक्त प्रधान पाठक पर मेहरबानी भी दिखाई जा रही है। क्यों इस तरह की लापरवाही को आखिर विभाग के अधिकारी बर्दाश्त कर रहे हैं यह सवाल बना हुआ है शिक्षिका ने बताया कि विभागीय काम करने के दौरान तो कुछ लिखते समय प्रधान पाठक के हाथ कांपते हैं इसलिए डाक बनाने या जो भी रिकॉर्ड तैयार करने होते हैं वह प्रधान पाठक के बजाय मुझे ही करना पड़ता है। ऊपर से पूरे 5 क्लास के बच्चों को अकेले संभालना भी मुश्किल होता है। स्कूल में भी वे शराब के नशे में रहते हैं। जब स्कूल में प्रवेश करते हैं तो बदबू आने लगती है, इसी स समझ जाते हैं कि सर आज भी पीकर आए है। जुलाई 2024 में प्रधान पाठक भुवनेश्वर मंडावी इस प्राइमरी स्कूल पदस्थ हुए हैं। पर अभी तक उनके रवैया में कोई सुधार नहीं आया है। इधर मामले में जब हमने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकर से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि आपके जरिए प्रधान पाठक की करतूत के बारे में पता चल रहा है। मामले को गंभीरता से लेंगे। अगर ऐसी किसी भी तरह से लापरवाही की जा रही है तो मामले की जांच कर संबंधित प्रधानपाठक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करवाएंगे।

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