नारायणपुर पुलिस ने किया है मामले का पर्दाफाश,4 तस्कर गए जेल
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि बालोद जिले से ही औने पौने दाम में खरीद कर लाते थे मवेशी, पहुंचाते थे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कत्ल खाने तक
छत्तीसगढ़ में कट रही गौ वंश, शासन प्रशासन अब तक बेखबर, बाजारों की आड़ में भी हो रही तस्करी : गोरेलाल सोनी
हाल ही में नगर पंचायत डौंडी के गौठान से गायब हुए मवेशियों की भी तस्करी की है आशंका,सामाजिक कार्यकर्ता सहित विभिन्न संगठनों ने उठाया है मुद्दा
बालोद। विगत दिनों नारायणपुर पुलिस द्वारा एक अंतरराज्यीय गौ तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। जो 6 सालों से इस कृत्य में सक्रिय था। हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि उक्त गिरोह के लोग कहीं और से नहीं बल्कि हमारे बालोद जिले के करहीभदर के बाजार से मवेशी ले जाते थे। बाजार की आड़ में तस्करी किए जाने की चर्चा अक्सर होती रही है। लेकिन सबूत हाथ नहीं लग पा रहे थे। अब नारायणपुर पुलिस की कार्रवाई में 25 गौ वंश को कत्लखाने ले जाने से बचाया भी गया और चार तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे करहीभदर बाजार से औने पौने दाम में मवेशियों को खरीद कर लाते थे और अलग-अलग जगह पर उन्हें पहुंचा कर गिरोह के सदस्यों द्वारा ही तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कत्ल खानों में ले जाकर पशुओं को बेचते थे। नारायणपुर पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से बालोद जिला एक बार फिर गौ तस्करी के नाम से चर्चा में आ गया है। पूर्व में भी यहां के बाजार संचालन की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सवाल उठता आया था। पकड़े गए सभी आरोपियों के विरुद्ध पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्यवाही की गई है। तो वही इस अंतरराज्य गिरोह के लोगों ने बताया कि विगत 6 सालों से भी वे यह कार्य कर रहे हैं और मवेशियों की खरीदी बिक्री, परिवहन एवं व्यापार करने का उनके पास कोई वैध दस्तावेज भी नहीं है। छुड़ाए गए 25 पशुओं की कीमत 125000 रुपए है । वहीं पकड़े गए सभी गौ तस्कर दंतेवाड़ा जिला के ग्राम कलेपार मोलसनार थाना कुआंकोंडा और एक श्यामगिरी थाना कुआंकोंडा का रहने वाला है । इस तरह देख सकते हैं कि कहां दंतेवाड़ा तस्करों का तार बालोद जिले के करहीभदर बाजार तक जुड़ा हुआ था। ज्ञात हो कि करहीभदर बाजार में वर्षों से मवेशी बाजार लगता है। यहां हर रविवार को सुबह से ही बाजार लग जाता है और सोमवार की सुबह तक मवेशी यहां से हटा दिए जाते हैं। चर्चा है कि इस बाजार के आड़ कमजोरी मवेशियों को भी बाजार में कत्ल खाने पहुंचाने के लिए लाया जाता है। इन्हें औने पौने दाम में तस्कर किसानों और कोचियों से खरीदते हैं और उन्हें कत्लखाने ले जाकर उन्हें बेच देते हैं। क्योंकि कमजोर हो चुके मवेशी को किसानों द्वारा निर्दयता दिखाते हुए बेच दिया जाता है। कोचिए और तस्कर उनके इसी सोच का फायदा उठाते हैं कि कमजोर मवेशी अब किसी काम के नहीं हैं। कोचियों के जरिए तस्कर खरीदी करके उन्हें कत्लखानों तक पहुंचाते हैं। यह खुलासा गौ वंश के संरक्षण और सरकार के प्रयासों पर भी सवाल खड़ा करता है। एक तरफ सरकार जहां गौठानो के पुनरुद्धार को लेकर बात कहती है,गौशाला गौ अभयारण्य बनाने को लेकर वादे होते हैं पर असलियत में गौ माता की कैसे खुलेआम तस्करी हो रही है वह चिंता का विषय है। इधर हाल ही में डौंडी नगर पंचायत में भी 350 मवेशियों की गौठान से गायब होने पर भी तस्करी की आशंका जताई गई है ।जिसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता गोरेलाल सोनी सहित अन्य संगठन के लोगों ने थाने में शिकायत कर जांच की मांग की है। इसमें एक कोचिए को भी गिरफ्तार किया गया है।
लगातार आ रही तस्करी से जुड़ी शिकायतें
नगरपंचायत डौंडी गोठान से 350 गौ वंश तस्करी का मामला सामने आने के बाद जिले में उसी सप्ताह दैहान जंगल पर सैकड़ों गौ को रात्रि तस्करी करते पुलिस व ग्रामीणों ने पकड़ा था,तस्कर मौके से खाना सामाग्री व बाईक छोड़कर नौ दो ग्यारह हो गए थे जो जिले में गौ तस्करी की पोल खोलकर रख दिया है। जिले में लगातार हो रही गौ तस्करी मामले ने गौ रक्षकों को भी खुली चुनौती दें दिया है। गौरतलब है कि डौंडी के सामाजिक कार्यकर्ता गोरेलाल सोनी ने डौंडी निकाय के सरकारी गौठान से 14 जुलाई सुबह से 350 गौ वंश की तस्करी किए जाने की नामजद रिपोर्ट डौंडी थाना में दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट पर पुलिस जांच प्रारंभ शुरू की गई और मामले में कोचिया परदेशी राम बांदे को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस जांच अभी भी जारी है। सोनी के नामजद रिपोर्ट पर पुलिस गंभीरता से जांच करते हुए बस्तर क्षेत्र के नक्सलियों के मांद जंगल तक पहुंची। इसमें बस्तर पुलिस से सहारा लेकर गौ तस्करी के गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई। जिसमें नारायणपुर पुलिस प्रशासन को बड़ी सफलता भी मिली है।
बालोद जिला में तस्करी का बड़ा रैकेट लंबे समय से है सक्रिय, मुरिया लोगों का है बोबलाला
मुद्दा उठाने वाले गोरेलाल सोनी ने कहा प्रारंभिक पतासाजी में सूत्रों से यह मालूम हुआ कि बालोद जिले में गौ तस्करी का बड़ा रैकेट लंबे समय से सक्रिय है। जो हिंदू धर्म के आस्था के साथ खिलवाड़ करते हुए कृषि जीव का वध कराने में अहम भूमिका निभा रहे है। गौ वध हेतु छत्तीसगढ़ राज्य से शुरू होकर तेलंगाना,कर्नाटक, तमिलनाडु,महाराष्ट्र नागपुर,यवतमाल जैसे प्रमुख स्थानों के कत्लखाना तक कोचियों के माध्यम से मवेशी पहुंचाया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य में गौ वंश वध कर मांस बिक्री बालोद जिला के आदिवासी ब्लाक डौंडी के अंतिम सीमा के आगे साल्हे ग्राम से महज तीन चार किमी दूर एक ग्राम में लंबे समय से खास त्यौहार पर होते आ रही है, जिससे शासन प्रशासन भी बेखबर है। वहीं डौंडी ब्लाक में बस्तर के मुरिया कोचिया आकर कृषि जीव खरीद इसे अपने बस्तर क्षेत्र के उन स्थल ग्रामों में ले जाकर वध कर मांस विक्रय करते है जो बीहड़ जंगल व नक्सली गढ़ कहा जाता है। जहां पुलिस और पत्रकार भी नहीं पहुंच पाते। प्राप्त जानकारी के अनुसार मवेशी खरीदी बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में बैल बाजार खुले हुए है। बालोद जिला में सबसे मुख्य बड़ा बाजार करहीभदर को बताया जा रहा है। जहां विभिन्न ब्लाक, जिला क्षेत्रों के आए हुए काेचिए बैल,भैंस,गाय व बछड़ों को खरीददारी कर यह मवेशी दूसरे स्थान के दलाल को मोलभाव कर बेचते है। यह प्रक्रिया आगे और दलाल तक चलता है,जिसमें कत्लखाना ले जाने की मुख्य भूमिका बालोद जिला में बस्तर क्षेत्र से आए हुए मुरिया जनजाति के कुछ लोग इसमें सहभागिता सदियों से निभाते आ रहे है। यदि छत्तीसगढ़ में गौ हत्या के राज से पर्दा उठाकर इस खेल को पूर्णतः लगाम लगाना है तो सबसे पहले डौंडी ब्लाक के बैल कोचियों की पूरी लिस्ट निकालकर उनसे गौ वंश को किन मुरिया के हवाले विक्रय करते है यह पता लगाने से छत्तीसगढ़ में गौ वध किस किस स्थल में किया जाता है यह मुरिया कोचिया पुलिस प्रशासन की कड़ी पूछताछ में पूरी राज उगल देंगे।
