राहत और आफत की दो तस्वीरें: सावन का स्वागत करते झलका तांदुला एनिकट,इधर बोरी में फिर इस बारिश में बह गई मुरुम की सड़क,टूटा पुल,आवागमन बंद 



बालोद| हिन्दू पंचांग के अनुसार आज 11 जुलाई से सावन मास की शुरुआत हो चुकी है।  मान्यता है कि पूरे सीजन में सबसे ज्यादा बारिश सावन में ही होती है। वैसे तो बालोद जिले में सावन लगने के तीन पहले से बारिश जारी है, इस बारिश के कारण कहीं राहत तो कहीं आफत की खबरें भी सामने आ रही है।  खासकर ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुल आदि टूटने आदि की समस्या आ गई है तो आवागमन तक अवरुद्ध हो गए हैं।  इस बीच तांदुला नदी में सुंदरा (जगन्नाथपुर) और देवीनवागांव (लाटाबोड़) के बीच एनिकट अब छलकने लगा है।  जिसका नजारा देख ऐसा लग रहा मानो ये नदी सावन का स्वागत कर रही हो।  तीन दिनों की झमाझम बारिश के साथ सावन के पहले दिन ही छलकते इस नदी से मनमोहक नजारा बन गया है।  एनिकट अब ओवरफ्लो हो चुका है,इसके साथ ही एक मनमोहक नजारा देखने को मिल रहा है।  पास में ही एक ओवर ब्रिज है ,जहां से इस नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।  ओवरफ्लो के बाद इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है।  कल- कल झरनों सी बहती पानी की ध्वनि लोगों को आकर्षित करती है तो वही बरसात का पानी खेतों, छोटे-छोटे नदी नालों से बहते हुए तांदुला के इस बड़ी नदी में आकर समाहित होती है, जिसके कारण पानी का रंग चाय की तरह नजर आता है।  लगभग 700 मीटर लंबाई के इस एनिकट में ओवरफ्लो का दृश्य हर साल बरसात में देखने को मिलता है और बारिश के सीजन में  कई दिनों तक यह स्थिति बनी रहती है। 

इधर बाढ़ ने तबाह किया रास्त,हर साल की तरह इस बार भी बोरी नाला टूट कर बहा, आवागमन बंद 

लगातार बारिश से कहीं राहत की खबरें है तो कहीं नुकसान भी देखने को मिल रहा है।  ऐसा ही कुछ नजारा लाटाबोड़ से हल्दी पसौद मार्ग पर है, जहां ग्राम बोरी में सेमरिया नाले पर एक बार फिर रपटा नुमा पुल बह जाने से आवागमन अवरुद्ध हो गया है।  एक दिन पहले तक दोपहिया वाहन जैसे तैसे इस रास्ते से पार हो रहे थे लेकिन लगातार नाले में बढ़ते जल स्तर से पुल को बचाए रखने के लिए डाला गया मुरूम का ढेर भी अब बह चुका है, जिससे एक बार फिर से इस मार्ग से आवागमन बंद हो चुका है।

टूटे पुल से कोई हादसे का शिकार ना हो जाए, रात में कहीं कोई गड्ढे पर जा ना गिरे इसलिए थोड़ी दूर पहले से ही सड़क पर घेरा करके लोगों ने रास्ता बंद कर दिया है।  इससे आसपास के लगभग 20 गांव का संपर्क एक दूसरे से कट गया है।  हर साल यह स्थिति देखने को मिलती है।  कई साल से ग्रामीण यहां ओवरब्रिज बनाने की मांग कर रहें लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। 

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