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संगवारी कृषि केंद्र में यूरिया देने का वादा कर गायब हो गए संचालक, पर्ची में भी गड़बड़ी,खाद छिपान का राज खुला तो विभाग ने सील की दुकान

गोरेलाल सोनी,डौंडी। मथाई चौक स्थित संगवारी कृषि केंद्र में बुधवार को 24 किसानों से 35 बैग यूरिया देने का वादा कर संचालक ने पोस मशीन में अंगूठा लगवाया। बाद में स्टॉक खत्म होने की बात कह दी। इससे नाराज किसान दुकान में धरने पर बैठ गए। किसानों ने बताया कि संचालक ने पहले पर्ची दी, फिर यूरिया नहीं दिया। पर्चियों में तारीखों की गड़बड़ी भी सामने आई। पर्ची नंबर 1816 में तारीख नहीं थी। 1829 में 9-7-25 और 1940 में 7-6-25 लिखा था। कई किसानों को सादे कागज पर तीन बोरी बाद में देने का वादा कर पिछले महीने से टरकाया जा रहा है। डौंडी सहकारी समिति में मंगलवार को 438 और बुधवार को 225 बैग यूरिया वितरण के लिए आए। चेकबुक में नाम दर्ज होने के बाद भी किसानों को यूरिया नहीं मिला। इससे किसान निजी केंद्रों से महंगे दामों पर यूरिया खरीदने मजबूर हो गए। सूचना पर डौंडी तहसीलदार देवेंद्र नेताम, आरआई एसएन सोनेश्वर और आवारी सर्कल आरआई भारत भूषण मौके पर पहुंचे। कृषि केंद्र संचालक गायब मिला।कर्मचारियों ने भी संचालक की जानकारी नहीं दी। शाम पांच बजे कृषि विभाग के जिला एसडीओ महेश कुमार केंद्र पहुंचे, तब भी संचालक नहीं आया। फोन पर भी वह अधिकारियों का कॉल के अलावा किसी का फोन रिसीव नहीं किया। पोस मशीन और गोदाम की चाबी भी दुकान से गायब कर दी गई। गोदाम में ताला लटका मिला। कर्मचारी खोमेंद्र ने अधिकारियों को बताया कि गोदाम में यूरिया स्टॉक मौजूद है। इससे साफ हो गया कि संचालक ने जानबूझकर किसानों और अधिकारियों को गुमराह किया। तहसीलदार ने पुलिस बुलाकर पंचनामा बनवाया और दुकान व गोदाम को सील कर दिया। रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी जाएगी। सीलिंग के दौरान कांग्रेस नेता कोमलेंद्र चंद्राकर ने तहसीलदार से तीखी बहस की। अधिकारी चाहते तो शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। किसानों को कार्रवाई से थोड़ी राहत मिली, लेकिन सहकारी समिति और निजी केंद्रों की मनमानी से वे अब भी परेशान हैं। इस पूरे मामले में स्थानीय उर्वरक निरीक्षक अधिकारी की भूमिका संदेह के दायरे में आ रहा है। उनके द्वारा निजी कृषि केंद्र में जानबूझकर निरीक्षण इस सत्र के अलावा पूर्व सत्र में भी नहीं किया गया है। एक्सपायरी नैनो यूरिया वितरण सप्लाई के बाद वे अवकाश लेकर जिम्मेदारी से बच रहे है। उनके अनुपस्थिति से जिला स्तर के अधिकारियों को किसानों के प्रदर्शन किए जाने पर उनके स्थान पर आकर कार्यवाही की भूमिका निभाना पड़ रहा है।

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