अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस विशेष: बालोद जिले के 18 से 35 वर्ष के युवा है शराब, गांजे और नशे की गोली के गिरफ्त में, नशा मुक्ति केंद्र में अब तक के आए मामलों से हुआ खुलासा



सुप्रीत शर्मा, अतिथि संपादक,बालोद। हर साल 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मनाया जाता है । यह दिन नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और कार्रवाई को मजबूत करने के लिए समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर 1987 को इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को नशे की लत के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें नशे से छुटकारा दिलाने के लिए जागरूक करना है। साल 2025 का थीम, बाधाओं को तोड़ना और सभी के लिए रोकथाम, उपचार और पुनरप्राप्ति है। बालोद जिला मुख्यालय के पाररास में भी एक नशा मुक्ति केंद्र संचालित है। जिसके जरिए नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के जीवन को संवारने का एक विशेष प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यहां लगातार सामने आ रहे मामलों पर अगर गौर करें तो अधिकतर 18 से 35 आयु वर्ग के युवा नशे की गिरफ्त में है। बालोद जिले में खास तौर से शराब, गांजा और नशे की गोली की जकड़ में युवा हैं। जिससे उनका भविष्य खराब हो रहा है। हालांकि नशा मुक्ति केंद्र में ऐसे युवाओं के आने के बाद उनमें 80% सुधार देखने को मिला है। इस दिवस पर हमने नशा मुक्ति केंद्र के संचालक समता जनकल्याण समिति के अध्यक्ष शिशुपाल खोबरागढ़े से बात की तो संचालित केंद्र में अब तक आए मामलों से कई खुलासे हुए, जो चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि बालोद के पाररास क्षेत्र में 10 जून 2022 से नशा मुक्ति केंद्र का संचालन किया जा रहा है। जिसका क्रियान्वयन समता जन कल्याण समिति राजनांदगांव और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा है। अब तक इस केंद्र में 426 लोग भर्ती हो चुके हैं जिसमें से 340 लोगों में सुधार आ चुका है। यानी 80% लोग यहां भर्ती होने के बाद लाभ ले चुके हैं। कुछ प्रमुख केस हैं,जिनमें सुधार आया है उनके उदाहरण इस तरह है, जैसे…

केस 1. शराब के पैसे जुगाड़ने पत्नी और माता-पिता को करता था परेशान

डामन साहू उम्र 33 वर्ष पता ग्राम सरेखा तहसील गुरुर जिला बालोद, जिनकी केंद्र में भर्ती अवधि 35 दिन हैं। जो भर्ती हुए तो शराब की नशे के शिकार थे। वह शराब के नशे में 24 घंटे रहते थे। पैसे के लिए पत्नी और माता-पिता को बेहद परेशान करते, मारपीट करते थे। ससुराल वाले डामन के विरोध में सामाजिक बैठकें में भी किए। अंत में लड़की( पत्नी) को अपने साथ मायके ग्राम कोचेरा डौंडीलोहारा ले गए । लगभग आठ माह तक उसकी पत्नी मायके में रही। फिर नशा मुक्ति केंद्र बालोद में 35 दिनों के लिए भर्ती कराई। अब डामन पूर्ण स्वस्थ हो गया। सामाजिक बैठक कर पत्नी को ससम्मान घर ले आया और आज अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। परिवार खुश है और कृषि कार्य में संलग्न है।

केस 2. शराब और गांजे की लत में परिवार बिखर गया था…

दुष्यंत कुमार साहू ग्राम साजा तहसील गुंडरदेही,बालोद उम्र 30 वर्ष भर्ती अवधि 35 दिन जो गांजा, शराब और तंबाकू आदि नशे का आदी था। इसके नशे के कारण पूरा परिवार बिखर गया था । पत्नी बच्चों के साथ रायपुर के किराए के मकान में एवं दुष्यंत की मां वृद्धाश्रम बालोद में सहारा लिए रह रही थी। नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती होने से वह पूर्ण स्वस्थ हो गया और लगभग 7 वर्षों से पत्नी अलग थी वह भी अब साथ-साथ रह रहे हैं। परिवार खुश है। कृषि कार्य में संलग्न है।

केस 3. शराब के लिए चोरी ,लूटपाट और मारपीट करता था…

अजय यादव उम्र 27 वर्ष निवासी आमापारा रायपुर,जो गांजा, शराब, गुटका, तंबाकू सबका नशा करता था। अजय यादव नशा करने के लिए चोरी भी करता था। जिसके कारण वह जेल भी जा चुका था। नशा के लिए कुछ भी कर लेता था। लूटपाट मारपीट जैसी घटना भी अंजाम दे चुका था। उनके चाचा द्वारा नशा मुक्ति केंद्र बालोद में 35 दिनों के लिए भर्ती किया गया। बहुत अच्छा परिणाम आया। वर्तमान में नशा से पूर्ण मुक्त है और एक नामी कंपनी में रायपुर में कार्य कर रहे हैं।

कुछ बातें जो अब तक केस में सामने आई

1.अधिकतर किस उम्र के लोग नशे का शिकार पाए गए हैं: बालोद जिले में 18 से 35 आयु वर्ग के लोग नशे की गिरफ्त में हैं।

2.कितने दिनों में ठीक होते हैं : 30 से 35 दिन में

3.कितने दिन तक भर्ती रखते है:अधिकतम 30 से 45 दिनों तक भर्ती रखते है

4.ज्यादातर किस तरह का नशा हो रहा है: बालोद जिले में अधिकतर गांजा, शराब, नशे की गोली का सेवन किया जा रहा है।

नशा मुक्ति केंद्र में इस तरह होता है उपचार

नशा मुक्ति केंद्र में योग, प्राणायाम, काउंसलिंग, थेरेपी एवं विशेषज्ञ के परामर्श से भर्ती लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्थिति अनुसार उपचार किया जाता है।

क्या-क्या उपाय किए जाते हैं

नशे के गिरफ्त में आए लोगों को केंद्र में व्यस्त रखा जाता है। मनोरंजन, खेलकूद, ड्राइंग,रीडिंग के माध्यम से एकाग्र रखने का प्रयास किया जाता है।

सुधार के बाद क्या होता है

50% हितग्राही दोबारा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं उन्हें फिर से भर्ती कर उपचार की प्रक्रिया पूर्ण कर नशा से मुक्त करने का प्रयास किया जाता है।

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