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पेवारी काण्ड: वन विभाग की टीम पर हमला करने वाले सिर्फ 6 ग्रामीण गिरफ्तार, टीम का आरोप: 50 से 60 लोग थे हमलावर में शामिल….

गोरेलाल सोनी, अतिथि संवाददाता,डौंडी/बालोद। वनकर्मियों पर हमला करने वाले पेवारी ग्राम के छह आरोपी सोमनाथ,बेदूराम,अर्जुन, तुलसीराम, तुलाराम और भोलाराम को मंगलवार शाम को गिरफ्तार कर जिला जेल भेज दिया गया है। उन पर बीएनएस की धारा 132,121,221,351,191 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। वहीं मजदूरों पर हमला करने वाले आरोपितों की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। इस मामले में मंगलवार को घायल वनकर्मियों के साथ बालोद जिले के समस्त वन कर्मियों ने डीएफओ के साथ बैठक लेकर कार्यवाही के अभाव में उग्र आंदोलन की रणनीति बनाई गई,लेकिन छह आरोपी ग्रामीणों की गिरफ्तारी के बाद इस ओर वन विभाग के अगला रुख पर प्रशासनिक निगाहे टिक गई है।बता दें कि पांच दिन पहले वन विभाग की टीम पर हुए हमले के आरोपियों को बचाने के लिए राजनीतिक दबाव शुरू हो गया है। इसी दबाव के चलते अब तक सिर्फ छह लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जबकि घायल कर्मियों ने हमले में 50 से 60 लोग शामिल होना बताए थे। बताया जा रहा है कि भाजपा के एक पदाधिकारी आरोपियों को बचाने में लगे हुए हैं। इससे वन विभाग के कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। घटना ग्राम पेवारी की है। चार दिन पहले वन विभाग की टीम वाटरशेड स्थल पेवारी का निरीक्षण करने पहुंची थी। टीम में रेंजर और अन्य कर्मचारी शामिल थे। तभी वहां 50 से 60 ग्रामीण लाठी-डंडों से लैस होकर पहुंचे। इन लोगों ने अचानक हमला कर दिया। वनकर्मियों की बेरहमी से पिटाई की गई। हमले में डिप्टी रेंजर और कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। चर्चा है कि वन कर्मचारी संघ के दबाव के बाद ही पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। बाकी आरोपियों के खिलाफ न तो अभी तक रिपोर्ट दर्ज की गई और न ही कोई गिरफ्तारी हुई। इससे साफ है कि पूरा मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि वे शासन का काम कर रहे थे। ऐसे में विभाग को उनकी सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लेकिन विभाग के उच्च अधिकारी भी चुप हैं। कोई खुलकर कर्मचारियों के साथ खड़ा नहीं हो रहा।वन कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी एक दिन पहले डीएफओ से मिले। उन्होंने आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद ही कुछ लोगों की गिरफ्तारी हो सकी। संघ का कहना है कि जब तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन कभी भी जारी रहेगा। घटना के बाद से वन विभाग के कर्मचारी डरे हुए हैं। वे अब फील्ड में जाने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि जब शासन के आदेश पर काम करने पर भी सुरक्षा नहीं मिलती, तो ऐसे में काम करना मुश्किल हो जाता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें सख्त सजा दी जाए।
वन विभाग के अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक विभाग खुद अपने लोगों के साथ नहीं खड़ा होगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। फिलहाल पूरा मामला राजनीतिक दबाव में उलझ गया है। पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता से कर्मचारियों में नाराजगी है। अब देखना होगा वन संघ इस दिशा में आगे क्या रुख अख्तियार करेगी। इस मामले में डौंडी टीआई उमा ठाकुर कह चुकी है कि फारेस्ट कर्मियों का बयान अभी बाकी है,जिसके बाद आगे की कड़ी और जुड़ेगी।

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