इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति की आड़ लेकर अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया: भूपेंद्र सवन्नी



बालोद। लोकतंत्र का काला अध्याय, आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने एवं कांग्रेस के लोकतंत्र पर कुठाराघात के 50 वर्ष पर प्रेस कॉन्फ्रेंस लेने अध्यक्ष अक्षय ऊर्जा विकास अधिकरण (क्रेडा) प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी बालोद पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि संविधान की आत्मा को कुचलते हुए इंदिरा ने लोकतंत्र को एक झटके में तानाशाही में बदल दिया और पूरी व्यवस्था को ही कठपुतली बनाकर रखने का षड्यंत्र रच दिया था। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका सहित लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को बंधन बनाकर सत्ता के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। प्रेस की स्वतंत्रता पर भी ऐसा हमला हुआ कि बड़े-बड़े अखबारों की बिजली काट दी गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया था। आपातकाल के दौरान एक ही परिवार को संविधान से ऊपर रखने वाली कांग्रेस आज भी राहुल प्रियंका के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है, तंत्र आज भी परिवार के चरणों में समर्पित है। भूपेंद्र सवन्नी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर भारत पर आपातकाल ठोक दिया। यह निर्णय किसी युद्ध या विद्रोह के कारण नहीं बल्कि अपने चुनाव को रद्द किए जाने और सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया था। कांग्रेस पार्टी ने इस काले अध्याय में न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को रौंदा बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिक के मौलिक अधिकारों को कुचलकर या स्पष्ट कर दिया कि जब-जब उनकी सत्ता संकट में होती है वे संविधान और देश की आत्मा को ताक में रखने से पीछे नहीं हटती। आज 50 वर्ष बाद भी कांग्रेस इस मानसिकता के साथ चल रही है। आज भी सिर्फ तरीकों का बदलाव हुआ है नियत आज भी वैसी ही तानाशाही वाली है। मार्च 1971 में लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बावजूद इंदिरा गांधी की वैधानिकता को चुनौती मिली। उनके विपक्षी उम्मीदवार राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनाव को भ्रष्ट आचरण और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आधार पर चुनौती दी। देश की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही थी। जिससे जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा था। देश पहले से ही आर्थिक बदहाली महंगाई और खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था। बिहार और गुजरात में छात्रों के नेतृत्व में नवनिर्माण आंदोलन खड़ा हो चुका था। 8 में 1974 को जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में ऐतिहासिक रेल हड़ताल ने पूरे देश को जगा लिया। इस आंदोलन को रोकने के लिए 1974 में गुजरात में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया। यही राष्ट्रपति शासन 1975 में लगने वाले आपातकाल की एक शुरुआत था। इसके साथ ही बिहार में कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा और 1975 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। 12 जून 1975 को कोर्ट ने इंदिरा गांधी को चुनाव में दोषी ठहराया और उन्हें 6 वर्षों तक किसी भी निर्वाचन पद पर रहने से अयोग्य करार दिया। इसके बाद राजनीतिक अस्थिरता तेजी से बढ़ी जिससे घबराकर इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आंतरिक अशांति का हवाला देकर राष्ट्रपति से आपातकाल लगा दिया।

रातों-रात प्रेस की बिजली काटी गई। नेताओं को बंदी बनाया गया और 25 जून की सुबह देश की तानाशाही की सूचना रेडियो के माध्यम से दी गई। संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को रौंदा गया। सांसद और न्यायपालिका को अपंग बना दिया गया। यह सिलसिला किसी युद्ध या बाहरी हमले से नहीं बल्कि एक व्यक्ति के कुर्सी खोने के भय से शुरुआत और पूरे राष्ट्र को मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया। 1975 आपातकाल की घोषणा कोई राष्ट्रीय संकट का नतीजा नहीं बल्कि एक करीबी प्रधानमंत्री की सत्ता बचाने की राजनीति थी। जिसे न्यायपालिका से मिली चुनौती से बौखलाकर थोपा गया।
इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति से अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया। अपनी कुर्सी को बचाने की जिद थी। संविधान की आत्मा को कुचलते हुए उन्होंने लोकतंत्र को एक झटके में तानाशाही में बदल दिया और पूरी व्यवस्था को ही कठपुतली बनाकर रखने का षड्यंत्र रच दिया। कार्यपालिका, विधायक और न्यायपालिका सहित लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को बंधक बनाकर सत्ता के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। प्रेस की स्वतंत्रता पर ऐसा हमला हुआ कि बड़े-बड़े अखबारों की बिजली का काट दी गई, सेंसरशिप लगा दी गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया। कांग्रेस शासित राज्य में कानून व्यवस्था का हाल यह है कि वहां विरोध का दमन धार्मिक तुष्टिकरण और सत्ता का अहंकार खुलेआम दिखता है। इंदिरा इज इंदिरा एण्ड इंदिरा इज इंदिरा जैसे नारे कांग्रेस की उसी मानसिकता को दर्शाते थे। जिसके तहत इंदिरा गांधी ने देश को व्यक्ति पूजा और परिवारवाद की प्रयोगशाला बना दिया था।
आपातकाल के दौरान एक परिवार को संविधान से ऊपर रखने वाली कांग्रेस आज भी राहुल प्रियंका के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है,तंत्र आज भी परिवार के चरणों में समर्पित है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख रूप से सांसद भोजराज नाग,जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख, वरिष्ठ नेता यशवंत जैन, पवन साहू , कृष्णकांत पवार , वरिष्ठ नेता प्रीतम साहू ,वरिष्ठ नेता यज्ञदत्त शर्मा , प्रदेश कार्य समिति सदस्य अभिषेक शुक्ला ,जिला महामंत्री राकेश छोटू यादव ,नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी , जिला मीडिया प्रभारी कमल पनपालिया, सोशल मीडिया जिला संयोजक संदीप सिन्हा आदि मौजूद रहे।

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