विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: वनांचल ग्राम मड़ियाकट्टा मिडिल स्कूल में बच्चों को पढ़ाया जाता है पुस्तकीय ज्ञान के साथ पर्यावरण शिक्षा का भी पाठ



राज्यपाल पुरस्कृत प्रधान पाठक दयालु राम ने बच्चों सहित पालको से की इको फ्रेंडली पर्यावरण निर्माण की अपील

बालोद/ डौंडीलोहारा । डौंडीलोहारा ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र के ग्राम मड़ियाकट्टा के मिडिल स्कूल में पदस्थ राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक दयालु राम पिकेश्वर बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ अपने आसपास के पर्यावरण की भी शिक्षा देते हैं। उनके द्वारा लगातार पर्यावरण को प्रोत्साहन देने के लिए स्कूल परिसर में गार्डनिंग सहित बच्चों के जरिए पालकों तक भी पौधों/वनों की सुरक्षा और अपने आसपास की स्वच्छता को लेकर प्रेरित किया जाता है। एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत भी यहां के बच्चों ने स्कूल के अलावा अपने घरों और खेत, बाड़ियों में भी पौधे लगाए हैं। जिनकी सुरक्षा बच्चे और पालक मिलकर कर रहे हैं। राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक दयालु राम का कहना है कि बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी देना जरूरी है। इसलिए वे समय-समय पर बच्चों को पर्यावरण से भी जोड़ते हैं और विविध आयोजनों के जरिए बच्चों को अपने आसपास के परिवेश की स्वच्छता, वनों की सुरक्षा और पर्यावरण के महत्व से परिचित कराते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर भी उन्होंने मीडिया के जरिए बच्चों सहित पालकों और समस्त जिले वासियों से अपील की है कि हम एक इको फ्रेंडली पर्यावरण का निर्माण करें । बढ़ते प्रदूषण के लिए अब यह जरूरी हो गया है। बेमौसम बारिश , देर से मानसून का आना, यह सब पर्यावरण को हुए नुकसान का ही परिणाम है। इसलिए हमें समय पर सचेत होना जरूरी है। उन्होंने कहा पर्यावरण जलवायु स्वच्छता, प्रदूषण तथा वृक्ष का सभी को मिलाकर बनता है और ये सभी चीजें यानी कि पर्यावरण हमारे दैनिक जीवन से सीधा संबंध रखता है और उसे प्रभावित करता है। मनुष्य और पर्यावरण एक दूसरे पर निर्भर होते है।
पर्यावरण शब्द दो शब्दो से मिलकर बना है,परि और आवरण जिसमें जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास या कह ले कि जो हमारे चारों ओर है। वहीं ‘आवरण ‘ का मतलब है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण जैसे जलवायु प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर और स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है। मानव की अच्छी बुरी आदतें जैसे वृक्षों को सहेजना,जलवायु,प्रदूषण रोकना,स्वच्छता रखना भी पर्यावरण को प्रभावित करती है।मनुष्य की बुरी आदतें जैसे पानी दूषित करना,बर्बाद करना,वृक्षों की अत्यधिक संख्या में कटाई करना आदि पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित करती है।जिसका नतीजा बाद में मानव को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करके भुगतना ही पड़ता है।

प्रकृति और पर्यावरण

प्रधान पाठक दयालु राम पिकेश्वर ने कहा पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े मकोड़े, सभी जीव जंतु और पेड़ पौधों के अलावा उनसे जुड़ी सारी जैव क्रियाएं और प्रकियाएं भी शामिल है। जबकि पर्यावरण के अजैविक संघटकों में निर्जीव तत्व और उसमें जुड़ी प्रक्रियाएं आती है, जैसे पर्वत, चट्टानें,नदी,हवा,और जलवायु के तत्व इत्यादि।सामान्य अर्थों में यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक तत्वों तथ्यों प्रक्रियाओं और घटनाओं से मिलकर बनी ईकाई है।यह हमारे चारों ओर व्याप्त है और हमारे जीवन की प्रत्येक घटना इसी पर निर्भर करती और संपादित होती हैं। मनुष्यों द्वारा की जाने वाली समस्त क्रियाएं पर्यावरण को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। इस प्रकार किसी जीव और पर्यावरण के बीच का संबंध भी होता है,जो एक दूसरे पर आश्रित है।

मानव हस्तक्षेप कर रहा पर्यावरण को प्रभावित

श्री पिकेश्वर ने कहा मानव हस्तक्षेप के आधार पर पर्यावरण को दो भागों में बांटा जा सकता है, जिसमें पहला है प्राकृतिक या नैसर्गिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण। यह विभाजन प्राकृतिक प्रक्रियाओं और दशाओं में मानव हस्तक्षेप की मात्रा की अधिकता और न्यूनता के अनुसार है। प्रकृति में बढ़ता मानव हस्तक्षेप पर्यावरण को लगातार प्रभावित कर रहा है।

ऐसे हुई थी दिवस की शुरुआत

श्री पिकेश्वर ने बताया संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता लाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। आज के युग में पर्यावरण प्रदूषण बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती जनसंख्या और बड़ी बड़ी इमारतों के कारण पर्यावरण की प्रकृति नष्ट हो रही है। हर जगह जगह घने वृक्ष काट कर बड़ी बिल्डिंगों का निर्माण करना पर्यावरण और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ है। इतना ही नहीं जहां वाहनों का धुंआ, मशीनों की आवाज खराब, रासायनिक जल आदि की वजह से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। जिसके कारण हमें अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। अत: आज हमें सबसे ज्यादा जरूरत है पर्यावरण संकट के मुद्दे पर आम जनता को जागरूक करने की। पर्यावरणीय समस्याए जैसे प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन इत्यादि मनुष्य को अपनी जीवन शैली के बारे में पुनर्विचार के लिए प्रेरित कर रही है और अब पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अत: आइए इस पर्यावरण दिवस पर संकल्प करें कि हम ना ही पर्यावरण और प्रकृति के खिलाफ कोई भी कार्य करेगें बल्कि अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर तथा लोगों में जागरूकता फैलाकर पर्यावरण को बचाएंगे। इस तरह सब मिलकर एक इको फ्रेंडली पर्यावरण का निर्माण करके एक अच्छे भविष्य का निर्माण करेंगे।

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