बालोद जिले की भूजल सर्वेक्षण रिपोर्ट हुई जारी: गुरुर क्रिटिकल जोन में, बालोद और गुण्डरदेही सेमी क्रिटिकल जोन में



भविष्य के लिए पानी बचाना है जरूरी, जिले में जल संचय- जन भागीदारी अभियान जारी, जल शक्ति मंत्रालय से मिली बालोद कलेक्टर को सराहना

बालोद। भूजल सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार जिले के डौण्डीलोहारा एवं डौण्डी विकासखण्ड को सेफ जोन, गुण्डरदेही एवं बालोद विकासखण्ड को सेमीक्रिटीकल जोन तथा गुरूर विकासखण्ड को क्रिटीकल जोन में रखा गया है। यह रिपोर्ट हमें यह संकेत देती है कि आने वाले भविष्य में पानी कितना जरूरी है। भले इन दिनों लोग बेमौसम बरसात से परेशान है लेकिन इससे भूजल स्रोत भी बढ़ेंगे। इस बार मानसून समय पूर्व आ रहा है तो बारिश की अच्छी संभावना भी जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में भूजल संरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और इस दिशा में काफी प्रयास किए जा रहे हैं।
बालोद जिले में भूजल स्तर की स्थिति की बात करें तो विगत कई साल से गुरुर विकासखंड रेड जोन में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, बालोद जिले के गुरुर विकासखंड में भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और “रेड जोन” में पहुंच गया है। इसका मतलब है कि वहां पानी 500 मीटर की गहराई पर मिल रहा है, जो खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि भविष्य में पानी की उपलब्धता और भी कम हो सकती है।

भूजल की गहराई ऐसी है

बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक में मानसून पूर्व भूजल स्तर बलुआ पत्थर में औसतन 6.50 मीटर और ग्रेनाइट क्षेत्र में औसतन 5.93 मीटर नीचे है। मानसून के बाद यह स्तर बलुआ पत्थर में औसतन 2.97 मीटर और ग्रेनाइट क्षेत्र में औसतन 2.48 मीटर नीचे आता है।

भूजल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास और उपलब्धियां

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान: जल संरक्षण की दिशा में बालोद जिले को देश में सातवां स्थान मिला है। यह एक बड़ी उपलब्धि है और जिले में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है। जल जतन अभियान: बालोद जिले में “जल जतन अभियान” की शुरुआत की गई है, जिसके तहत विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। “कैच द रेन” अभियान के तहत जल संचय में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर है, और बालोद जिला देश में तीसरे स्थान पर है। इस अभियान के तहत बालोद में 1.01 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य (जैसे तालाब, कूप, सोख्ता गड्ढा निर्माण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग) पूरे किए गए हैं, और हजारों कार्य प्रगति पर हैं। जिला प्रशासन बालोद द्वारा जिले में चल रहे जल जतन अभियान अंतर्गत जल संरक्षण, जन जागरूकता अभियान तथा फसल चक्र परिवर्तन एवं पौधरोपण किया जा रहा है। इस तरह जिले में जल संरक्षण के अंतर्गत विभिन्न कार्य किए जा रहे।

यह काम हुए पानी बचाने के लिए

विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 01 लाख 06 हजार 677 नवीन जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। पूर्व निर्मित 30 हजार 849 जल स्त्रोतों का सामूहिक श्रम के माध्यम से मरम्मत एवं साफ सफाई की व्यवस्था की गई। ग्राम पंचायतों के माध्यम से जल भराव वाले स्थानों का चिन्हांकन कर नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों में 10 हजार वाटर रिचार्ज पिट का निर्माण किया गया है। वन क्षेत्र में जल संरचनाओं के साथ मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य अंतर्गत 03 लाख 88 हजार पौधरोपण किया गया। अभियान से प्रेरित होकर ग्रामीणों द्वारा स्वप्रेरणा एवं निजी राशि से 27 हजार से अधिक घरों में सोकपिट संरचना का निर्माण किया गया है। जिले में 01 लाख 09 हजार 0273 स्टेगर्ड कंटूर टेंच का निर्माण किया गया है। जिले में कुल 140 अमृत सरोवर का निर्माण किया गया है। जिले में 01 हजार 944 सामुदायिक तालाब, 06 हजार 160 निजी डबरी/तालाब निर्माण किया गया है। जिले में 399 मिनी परकुलेशन टैंक, 06 हजार 614 लूज बोल्डर चैक डेम, 672 नदियों का पुनरूद्धार किया गया है। जिले में 69 स्टाॅप डेम, 316 गेबियन चेक डेम, 423 कुंआ का निर्माण किया गया है। कुल 44 हजार 49 वाटर रिचार्ज पिट का निर्माण किया गया है।

फसल चक्र परिवर्तन अंतर्गत किए गए कार्य

जिले में विकासखण्ड गुरूर में 36 ग्रामों में ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को शून्य कर शत-प्रतिशत दलहन-तिलहन फसलों का क्षेत्र विस्तार किया गया है। इस प्रकार जिले में कुल 5733 है. में ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन-तिलहन फसलों का क्षेत्र विस्तार किया गया। जिले में कुल 7833 कृषकों को अभियान के माध्यम से जोड़ा गया है। जिले में कुल 491 कृषक चौपाल का आयोजन किया गया है।

जन जागरूकता अभियान जारी

प्रत्येक ग्राम पंचायत में कुल 436 जल वाहिनी समिति तथा जल जतन समिति का गठन किया गया है। जल के उपयोग/संचय के तरीके के संबंध में ग्रामीणों से चर्चा एवं लघु फिल्म की प्रस्तुति के माध्यम से जल संचय के संबंध में जागरूक किया जा रहा है। स्कूल, महाविद्यालय, एनसीसी, एनएसएस स्तर के विद्यार्थियों को जलमित्र के रूप में भागीदारी सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस तरह पड़ा अभियान का प्रभाव

वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 01 लाख 06 हजार 677 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। कुल 7442 हेक्टेयर भूमि अन्य फसल में परिवर्तित होने से 65-70 प्रतिशत भूमिगत जल की अनुमानित बचत हुई।
अभियान के माध्यम से किये गए प्रयासों से जल संरक्षण एवं जल संचय के प्रति जन सामान्य के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

कुछ चुनौतियां भी हैं जिले के किए

भूमिगत संरचना,अन्य फसलों की अपेक्षा धान की अधिक उत्पादकता फलस्वरूप ग्रीष्मकालीन धान का रकबा जिले के कुल रबी फसल क्षेत्राच्छादन में 25 से 35 प्रतिशत क्षेत्र में होना।

आगामी कार्ययोजना पर फोकस कर रही जिला प्रशासन

सेल्फ सफिशिएंट मॉडल पंचायत के रूप में ग्राम पंचायतो को विकसित करना। स्व सहायता समूह की महिलाओ की जन-जागरूकता कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करना।धान के बदले, कम जल खपत वाली अन्य फसल जैसे मक्का, चना उड़द आदि को प्रोत्साहित करना। इस वितीय वर्ष में 05 लाख पौधे के वृक्षारोपण का लक्ष्य है। सीएसआरफंड का उपयोग अधिक से अधिक जल संरक्षण एवं जल संरचनाओं के निर्माण व मरम्मत हेतु किया जाएगा।जिले के सभी विकासखंडों को सेफ जोन में शामिल करना है ।

कार्यों की जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार ने की सराहना

मंगलवार को जल शक्ति मंत्रालय द्वारा देश में भर में जल संचय, जन भागीदारी के तहत बेहतर कार्य करने वाले 34 जिलों का वर्चुअल माध्यम से प्रेजेंटेशन देखा गया। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बालोद जिले में जल संरक्षण हेतु किए गए एक लाख से अधिक कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री जल शक्ति मंत्रालय श्री सी.आर.पाटिल और सचिव जल शक्ति मंत्रालय सुश्री देवाश्री मुखर्जी ने बालोद जिले में हुए जल संरक्षण के कार्यों के लिए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की सराहना की।

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