बालोद। किरण कुमार जांगड़े, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बालोद (छ.ग.) के द्वारा आरोपी गंगा प्रसाद आ० हिरऊराम हल्बा, उम्र 35 वर्ष, निवासी केरीजुंगेरा, थाना-डौण्डीलोहारा, तात्कालीन जिला-दुर्ग (छ.ग.). वर्तमान जिला-बालोद (छ.ग.) को धारा-302 भा.दं.सं. के अपराध में आजीवन कारावास 500/- रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अभियोजन की ओर से प्रकरण की पैरवी सनद कुमार श्रीवास्तव, अतिरिक्त लोक अभियोजक के द्वारा किया गया, जिसके अनुसार दिनांक 09 जुलाई 2002 को प्रार्थी नेतराम भाण्डेकर थाना-डौण्डीलोहारा, जिला-बालोद (छ.ग.) में उपस्थित होकर मौखिक रूप से रिपोर्ट दर्ज कराया कि उसका बड़ा भाई राजकुमार भाण्डेकर तेंदूपत्ता प्रबंधक के पद पर लोहारटोला समिति के कार्यालय केरीजुंगेरा में रहकर निवास करता है। केरीजुंगेरा के कुछ आदमी उसे आकर बताये कि घटना दिनांक 08-07-2002 को रात्रि 10:00 बजे गंगाप्रसाद हल्बा उर्फ राठी उसके बड़े भाई राजकुमार भाण्डेकर के पेट में चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दिया है तथा राजकुमार का लाश कार्यालय में ही रखा हुआ है। घटना को आस-पास के लोग देखे सुने हैं। प्रार्थी के उपरोक्त मौखिक रिपोर्ट के आधार पर थाना डौण्डीलोहारा में आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रमांक-61/2002 अंतर्गत धारा-302 भा.दं.वि. के अंतर्गत अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। विवेचना के दौरान साक्षी महेश साहू के अनुसार घटना दिनांक 08-07-2002 को रात्रि 09:30 बजे से 09:45 बजे की है, उस समय वह अपने घर के दरवाजा में ताला लगाकर घर के आंगन में सोया हुआ था तब मृतक राजकुमार उसे आवाज देकर बोला था कि उसे चाकू मार दिये है, उस समय राजकुमार और उसके घर की लाईट बंद थी. तब वह अपने घर का ताला खोलकर बाहर निकलकर देखा तब गंगा प्रसाद, मृतक राजकुमार की गली की ओर से आ रहा था. अपने हाथ में कुछ रखा था, परन्तु अंधेरा होने के कारण उसे दिखाई नहीं दिया। जब गंगा प्रसाद दूर निकल गया तब वह गांव वालों को आवाज देकर उठाया और बताया कि मैनेजर राजकुमार को चाकू मार दिये हैं। थोड़ी देर बाद आरोपी गंगा प्रसाद अपने घर तरफ जा रहा था तब वह कुछ लोगों के साथ मृतक राजकुमार के घर तरफ जाकर देखा तब राजकुमार की मृत्यु हो गई थी। साक्षी मंगल सिंह ने बताया कि आरोपी गंगाप्रसाद उसके घर में उसके सामने राजकुमार भाण्डेकर को आपसी रंजिशवश देख लूंगा बोला था और दूसरे दिन उसे पता चला कि राजकुमार भाण्डेकर की हत्या हो गयी है। प्रकरण में आये साक्ष्य के आधार पर आरोपी को उक्त दण्ड से दण्डित किया गया। प्रकरण की विवेचना उप पुलिस अधीक्षक एस.एस. मौर्य व स.उ.नि.-दिनेश सिंह के द्वारा किया गया।
आपसी रंजिश के चलते केरी जुंगेरा में हुई थी तेंदूपत्ता प्रबंधक की कार्यालय में हत्या, दोषी को मिला आजीवन कारावास, 2002 का है मामला, 23 साल बाद आया फैसला
