युक्तियुक्तकरण 2025 के तहत शिक्षको की काउंसलिंग 2 एवं 3 जून को
बालोद। बालोद जिले में युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष शिक्षकों को काउंसलिंग के लिए बुलाया जाना है। इसके लिए सूचना जारी कर दी गई है लेकिन कौन से स्कूल में कितने शिक्षक अतिशेष है यह अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। देरी के चलते शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में नाराजगी है। तो शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठने लगा है। पारदर्शिता को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं। चर्चा है कि समय पूर्व काउंसलिंग में शामिल होने वाले शिक्षकों की सूची जारी नहीं किए जाने से दावा आपत्ति के लिए समय नहीं मिल सकता है। तो वही सूची अब तक सार्वजनिक नहीं किए जाने से गड़बड़ी की आशंका भी जताई गई है। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं रविवार की शाम तक सूची जारी कर दी जाएगी तथा संबंधित शिक्षकों को भी सूचित कर दिया जाएगा। अन्य जिलों में सूची सार्वजनिक की जा चुकी है पर बालोद जिले का शिक्षा विभाग इस मामले में पीछे नजर आ रहा है और इस देरी के चलते विभाग संदेह के दायरे में आ गया है।इधर विभिन्न शिक्षक संगठन युक्तियुक्तकरण का विरोध करने की तैयारी भी कर रहे हैं। विभिन्न संगठन इसके लिए रणनीति बना चुका है। काउंसलिंग के दिन माहौल गरमा गरम हो सकता है।
विभाग ने अब तक सिर्फ यह सूचना जारी की है
जिला शिक्षा अधिकारी बालोद ने बताया है कि युक्तियुक्तिकरण 2025 के तहत अतिशेष हुए सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधान पाठक, व्याख्याता के काउंसलिंग की समय सारणी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया अंतर्गत 2 जून 2025 को जिला पंचायत कार्यालय में व्याख्याता ई संवर्ग की काउंसलिंग सुबह 10:00 बजे से 11:30 तक, व्याख्याता टी संवर्ग की काउंसलिंग 11.30 बजे से दोपहर 1:00 तक, प्रधान पाठक माध्यमिक शाला/ शिक्षक ई संवर्ग की काउंसलिंग दोपहर 1:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला/शिक्षक टी संवर्ग की काउंसलिंग शाम 4:00 बजे से किया जाएगा। इसी तरह 3 जून को जिला पंचायत कार्यालय में प्रधान पाठक प्राथमिक शाला/सहायक शिक्षक ई संवर्ग की काउंसलिंग सुबह 10:00 बजे से 1:30 बजे तक तथा प्रधान पाठक प्राथमिक शाला/टी संवर्ग की काउंसलिंग दोपहर 1:30 बजे से किया जाएगा। उन्होंने शिक्षकों को उपरोक्त संवर्गवार निर्धारित की गई तिथियों में नियत समय एवं स्थान पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
हद है ये तो….
जितेंद्र शर्मा, जिला संचालक शिक्षक साझा मंच ने बताया जिला बालोद के अतिशेष शिक्षकों का 2 और 3 जून को काउंसलिंग करने का आदेश तो निकल गया है परंतु अभी कौन शिक्षक अतिशेष है यही नही पता, तो काउंसलिंग में शामिल कौन होगा ? यह लापरवाही है,लेटलतीफी है या अंदरखाने किसी को उपकृत करने की कोशिश..!!! जिले के 354 स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का आंकड़ा भी DPI जारी कर चुका है परंतु अभी तक उन स्कूलों के नाम भी सार्वजनिक नही किये गए है आखिर डर किस बात की है..? संगठन से जुड़े शिक्षकों ने शासन से मांग की है कि युक्तियुक्तकरण की आड़ में सरकारी स्कूलों को बन्द करने और शिक्षकों के पदों को कम कर गरीब बच्चों का जीवन, उनका आधार खराब ना किया जाए ,केवल शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय शाला में शिक्षक भेजिए वो भी उन्हें जो 2008 सेटअप में स्वीकृत पद के विरुद्ध अधिक हों, बाकि स्कूलों को छेड़ना बन्द करिए। जिले के शिक्षक काउंसलिंग का जमकर विरोध करेंगे और सरकारी स्कूल और गरीब बच्चों की शिक्षा को बचाने का प्रयास होगा
काउंसलिंग होगी कैसे जब ना हीं शिक्षकों की और ना ही रिक्त स्थान की जानकारी हो
अनैतिक रूप से कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षक को वरिष्ठ और नैतिक को कनिष्ठ बताकर अतिशेष के रूप में की जा रही है परेशान
शिक्षकीय दायित्व के उच्च मापदंडों पर नवाचारी गतिविधि के साथ कार्य कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त शिक्षक हो रहे परेशान
प्रदेश में इन दिनों शिक्षा विभाग में व्यवस्था के नाम पर युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया बहुत सरगर्मी पर है। जिसका विभिन्न खामियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक संगठन एवं जन-मानस के द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है। पुरजोर विरोध के स्वर के बीच शासन प्रशासन अपने कार्य को जल्दी से जल्दी अंजाम तक पहुंचाने के लिए आनन – फानन में आदेश तो निकाल रही है लेकिन पता नहीं है कि किन शिक्षकों को अतिशेष किया गया है, किस नियम अनुसार किया गया है। अतिशेष की कार्रवाई की सूची प्रदर्शित नहीं है, ना ही अतिशेष सूची पर कोई दावा आपत्ति ली जा रही है ।ऐसे बहुत सारे खामियों के बीच में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया विरोध के बावजूद विभागीय दबाव में तेज रफ्तार से दौड़ती नजर आ रही है। लेकिन इस तेज रफ्तार के कारण कई दुर्घटनाएं अर्थात गड़बड़ी भी हो रही है। जिसको शासन प्रशासन नजर अंदाज करके इस प्रक्रिया को सफल कैसे कर लेगी?
प्रक्रिया में ऐसे हो रही है गड़बड़ियां
नाम प्रकाशित न करने की शर्तों पर शिक्षा विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों और शिक्षकों ने बताया कि जिला व प्रदेश के कई हाई स्कूल जहां पुराना सेटअप के अनुसार अंग्रेजी गणित और विज्ञान के दो दो व्याख्याता स्वीकृत सेटअप अनुसार कार्यरत थे ।जिसमें विषय गणित के दो दो व्याख्याता एक ही आदेश के अनुसार कार्यरत रहे लेकिन उनकी विद्यालय में वरिष्ठता पर शुरुआत से विवाद बना रहा है ।ऐसे ही एक वाक्या बालोद जिला के शासकीय हाई स्कूल में बना हुआ है। इसका बिना किसी समाधान किये ऐसे शिक्षक को कनिष्ठ माना जाता रहा है जो सत्र 2003 से संविदा शिक्षक के रूप में सुदूर वनांचल बस्तर क्षेत्र में 5 वर्ष का सेवा देने के पश्चात 2008 में इसी जिला में इसी प्रकार के युक्तियुक्तकरण के परेशानियो का पहले भी सामना कर चुका है और जो अपने शिक्षक की दायित्व के अतिरिक्त कर्तव्यों के उच्चतम मापदंडों नवाचारी गतिविधि का निर्वहन करते हुए जिला का प्रथम मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण शिक्षा श्री से सम्मानित, ततपश्चात राज्य शिक्षक सम्मान 2022 जिसे राज्यपाल पुरस्कार भी कहा जाता है, से सम्मानित है। जो व्यावसायिक शिक्षा मंडल के सत्र 2009-10 मेरिट क्रम में 13वें स्थान पर रह कर नियुक्ति पाकर नियुक्ति आदेश के नियमानुसार आदेश प्रसारण के दो दिन पश्चात चिकित्सा प्रमाण पत्र बनने पर नियमानुसार नैतिक रूप से पदभार ग्रहण किया तथा विभागीय वरिष्ठता सूची में भी 8 -10 स्थान वरिष्ठता है।इसी विद्यालय में इसी आदेश अनुसार उसी विषय के दूसरा शिक्षक जो मेरिट क्रम में प्रथम शिक्षक से लगभग 70 -80 स्थान निचले क्रम पर था, वरिष्ठता पाने के चक्कर में नियुक्ति आदेश के नियमों का अवहेलना करते हुए बिना मेडिकल प्रमाण पत्र बनाएं आदेश प्रसारण दिनांक को ही विभाग से मिली-भगत के द्वारा अनैतिक रूप से कार्यभार ग्रहण कर लिया । जबकि नियुक्ति आदेश के पदभार ग्रहण संबंधी शर्त के कंडिका (1) और कंडिका (6 ) में इस बात का बार-बार उल्लेख किया गया है कि बिना किसी चिकित्सा प्रमाण पत्र के कराई गई कार्यभार मान्य नहीं मानी जाएगी । इस प्रकार के कुकृत्य से सिविल सेवा अधिनियम का भी उल्लंघन होना परीलक्षित होता है ।
विकासखंड मुख्यालय के विद्यालयों के रिक्त पदों को छुपाया जाना प्रक्रिया को संदेह की दायरे में लाता है
इसी युक्तियुक्तकरण में समस्याओं के बीच में एक समस्या ऐसा भी है जिसमें अतिशेष शिक्षकों को जिन विद्यालयों के रिक्तता पर समायोजन किया जाना है, उन ऐसे विद्यालय जो जिला या विकासखंड मुख्यालय के आसपास आते हैं वहां के रिक्त पदों को भी पारदर्शिता पूर्ण प्रदर्शित न कर छिपाया जाना भी उक्त प्रक्रिया को संदेह के दायरे में लाता है कि कहीं पूर्व में हुए शिक्षकों के पदोन्नति के दौरान की गई बड़े पैमाने पर पद स्थापना आदेश संशोधन की भांति काउंसलिंग के बाद टेबल के नीचे से घालमेल सेटिंग कर इन विकासखंड मुख्यालय के विद्यालयों के रिक्त स्थानों की व्यवस्था तो नहीं की जाएगी?
भाजपा सरकार का यह है दावा
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से राज्य में कुल 10,463 स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का बड़ा फैसला लिया है। भाजपा सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री श्री साय ने यह दूरदर्शी निर्णय स्कूल शिक्षा को बेहतर, समावेशी और प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल साबित होगा। युक्तियुक्तकरण से न केवल शैक्षणिक संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होगा, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निरंतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।
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