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जलसंचय नारी शक्ति और शिक्षा की पुरोधा थी लोकमाता अहिल्याबाई – रंजना साहू

पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होलकर की 300 जयंती मे शामिल हुए सांसद भोजराज नाग और पूर्व विधायक धमतरी रंजना साहू

बालोद । लोकमाता मालवा की महारानी अहिल्या बाई होलकर के 300 वी जयंती पर भाजपा जिला कार्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मुख्यरूप से कांकेर सांसद भोजराज नाग, मुख्यवक्ता धमतरी की पूर्व विधायक रंजना साहू, जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए सांसद भोजराज नाग ने उनके जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने लोकहित में अनेक मूलभूत सुविधा के कार्य किये। उनके अदम्य साहस और वीरता की गाथा आज भी मालवा क्षेत्र में याद कर उनकी पूजा की जाती है। भारतीय संस्कृति को सहेजने वाली धर्मपरायण महिला अहिल्या बाई होलकर को मालवा सहित मध्यक्षेत्र में माता स्वरूप माना जाता है । उन्हें क्षेत्र में लोकमाता का दर्जा प्राप्त है तथा उनकी अनेक मंदिर बनवाये तथा उनकी मूर्ति स्थापित है । जिसकी पूजा वहां की जनता करती है।आयोजन कार्यशाला की मुख्यवक्ता रंजना साहू ने अपने उद्बोधन में लोकमाता के जीवन पर विस्तार से बताया कि भारत में कई वीरांगनाओं ने जन्म लिया परंतु भू पटल पर अमित छाप छोड़ने वाली अहिल्याबाई होल्कर एक महान मराठा शासिका थीं, जिन्होंने 1767 से 1795 तक मालवा क्षेत्र पर शासन किया वे एक कुशल शासक, कुशल प्रशासक और एक परोपकारी के रूप में जानी जाती हैं। अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौडी गांव में हुआ था, और उनका निधन 13 अगस्त 1795 को इंदौर में हुआ वे अपने शासनकाल में मालवा क्षेत्र में हजारों कुएं तालाब और बावड़ी बनवाये और जल संचय का कार्य किया । उन्होंने मुगलों के द्वारा तोड़े गए अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया और नए मंदिर भी बनवाये। वहीं नारी शिक्षा और किसानों की आय बढ़ाने जैसे अनेक लोकहित के कार्य उन्होंने किये अहिल्याबाई का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम मनकोजी शिंदे था, जो अपने गांव के पाटिल थे. 12 वर्ष की उम्र में उनका विवाह मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ पति की मृत्यु के बाद, अहिल्याबाई विधवा हो गईं और उन्होंने अपने राज्य की देखभाल करना शुरू किया जीवन में उन्होंने इतने संघर्ष किया उनके लिए कहा जा सकता है कि पुरुषार्थ केवल पुरुष ही नहीं करते, नारी भी पुरुषार्थ करने में किसी से कम नहीं। उनकी न्याय प्रियता इतनी थी कि आसपास के राजा भी उनसे सलाह लेने आते थे। उन्होंने अपने पुरुषार्थ से अनेक राजाओं को पराजित किया। पर दुर्भाग्य है कि ऐसी भारतीय वीरांगना को इतिहास से मिटाने का कुकृत्य कार्य यहां के इतिहासकारों ने किया है जो निंदनीय है। नारी शक्ति का वास्तविक सुशासन की पुरोधा रही। जिनका पुरा जीवन समाजिक सुधार सुशासन की अवधारणा को धरातल पर साकार करने और संस्कृति पुनर्जागरण के लिए समर्पित रहा। स्वागत उद्बोधन में जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा 300 वर्ष बाद पुण्यश्लोक लोक माता अहिल्याबाई होल्कर के बारे में जानने का सौभाग्य मिल रहा है। उनके जीवन की प्रेरणा जन-जन तक पहुंचे इस हेतु कार्यक्रम की रचना हुई है ।कार्यक्रम का आभार व्यक्त करते हुए निवर्तमान जिला अध्यक्ष पवन साहू ने कहा कि आज जनहित में जो योजनाएं चलाई जा रही है प्रकृति के संरक्षण में जो उपाय किए जा रहे हैं लोकहित में जो सुशासन किया जा सकता है वो सभी कार्य 300 वर्ष पूर्व लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने किया था। इससे पता चलता है कि वे कितनी दूरदर्शी थी। कार्यशाला आयोजन में विशेष रूप से यशवंत जैन, पवन साहू कृष्णकांत पवार, लेखराम साहू,यज्ञदत्त शर्मा , अभिषेक शुक्ला,राकेश छोटू यादव, देवेन्द्र जायसवाल , नरेश यदु, ठाकुर राम चंद्राकर,जिला पंचायत अध्यक्ष तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष तोमन साहू पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी,तोरण साहु, लाल देवेंद्र सिंह टेकाम सरस्वती टेमरिया सोनबरसा दीपा साहू , लक्ष्मी साहू ,प्रभा नायक, मीना साहू ,मोहंती चोरका, कुंती देवांगन, कांति सोनेश्वरी, नीतू सोनवानी, प्राची लालवानी ,कमलेश सोनी ,पुष्पेंद्र चंद्राकर, सहित मंडल अध्यक्ष महामंत्री, निवर्तमान मंडल अध्यक्ष,जिला पदाधिकारी जनप्रतिनिधि एवं भाजपा के अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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