बालोद। सहकारिता के माध्यम से जिले में संचालित एकमात्र इकलौते उद्योग दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना करकाभाट को अब पीपीपी मोड पर चलाने अथवा उसके निजीकरण की तैयारी से जिले में हड़कंप मच गया है। शेयर धारक किसानों से इस संबंध में न तो कोई चर्चा की गई है और न ही किसी तरह का समझौते पर सहमति बनी है और शासन स्तर से जल्द ही कारखाना प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वह इसके निजीकरण का प्रस्ताव भेजे। निजी हाथों में शक्कर कारखाने को सौंपे जाने की हो रही चर्चा ने किसानों व कर्मचारियों को चिंता में डाल दिया है। प्रशांत बोकडे अध्यक्ष युवा कांग्रेस ने कहा है कि अगर दंतेश्वरी शक़्कर कारखाना का निजीकरण हुआ तो किसानो के साथ सड़कों पर जनसैलाब उमड़ेगा। इसका हम पुरजोर विरोध करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रथम चरण में बालोद के शक्कर कारखाना के निजीकरण के प्रस्ताव पर मुहर लगाने की पूरी तरह से तैयारी की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो जिले के गन्ना किसानों के साथ साथ वहां काम करने वाले मजदूरों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो जाएगी। क्योंकि निजीकरण होने से कम्पनी अपनी शर्तों के मुताबिक कारखाने का संचालन करेगी।
निजीकरण का होगा पुरजोर विरोध
शक्कर कारखाना के अध्यक्ष महेंद्र देशमुख, महासचिव भगत सिंह राणा, कृपा राम बलिहार, भूषण देशलहरे, हीरा पन्ना मिर्चे आदि ने कहा कि कारखाने का आय बढ़ाने और किसानों को समय पर भुगतान देने की चिंता के बजाय इसे निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिसका शेयर धारक गन्ना किसान और यूनियन द्वारा पूरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने बताया किसानों के उत्थान के उद्देश्य से सहकारी शक्कर कारखाने का सौगात बालोद को मिली थी। जिससे पिछले 16 साल से स्थानीय लोगों को रोजगार हासिल होने के साथ ही किसान भी आत्मनिर्भर हो रहे है, लेकिन इसी बीच अचानक शक्कर कारखाने को निजी हाथों में सौंपे जाने की तैयारी से किसान, कर्मचारी और मजदूर चिंतित हैं।
बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
जिले के गन्ना उत्पादक किसान संघ की बैठक झलमला स्थित गंगा मैया प्रांगण में रखी गई थी इस बैठक में गन्ना उत्पादक किसान संघ इस विषय के लेकर शासन ने अगर निजीकरण की दिशा में काम आगे शुरू किया तो आंदोलन की रणनीति बनाई।
कर्मचारी संघ ने भी किया विरोध
निजीकरण के विरोध में अब शक्कर कारखाना कर्मचारी संघ ने भी विरोध दर्ज करते हुए कहा है कि सहकारी शक्कर कारखाना का निजीकरण गलत है। संघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि शक्कर कारखाने का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जा रहा है और 28 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा की गई। जिसमें शक्कर कारखाना का आर्थिक हानि का उल्लेख किया गया है। जिसमें बालोद और सूरजपुर कारखाना को निजी क्षेत्र में पी. पी. पी.मोड या निजी क्षेत्र को सौंपने का विचार किया गया है। संघ ने विज्ञप्ति में बताया है कि दंतेश्वरी मैया सहकारी कारखाने में 500 कर्मचारी एवं दैनिक श्रमिक कार्यरत हैं एवं लगभग 1200 गन्ना किसान गन्ने की फसल लगा रहे हैं और उनका परिवार का भरण पोषण कारखाना से जुड़ा हुआ है और अगर कारखाना को निजी क्षेत्र में सौंप दिया जाता है तो समस्त कर्मचारी मजदूर तथा गन्ना किसान व मजदूरों के समस्या रोजी-रोटी की समस्या हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कारखाना को निजी क्षेत्र में ना देते हुए सहकारिता विभाग के माध्यम से संचालित किया जाए और कारखाने के सफल संचालन के लिए शासन स्तर पर गन्ने के रकबे बढ़ाने हेतु ठोस प्रयास किया जाए।
