बालोद। प्रधान न्यायाधीश बालोद एस एल नवरत्न ने अपने फैसले में ग्राम राणा खुज्जी निवासी लीलाराम साहू को कर्ज की राशि को चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी को अदा नहीं करने पर एक माह(30 दिन) का सिविल जेल में बंद करने का आदेश दिया है। जानकारी अनुसार लीला साहू ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से एक वाहन टाटा एस फाइनेंस कराया था। जिसकी किस्तों की अदायगी नहीं करने पर फाइनेंस कंपनी द्वारा लीलाराम को लिखित व मौखिक सूचना भेजी गई। जिसके बाद भी निर्णितऋणी ने राशि नहीं पटाई । इसके बाद कंपनी ने अनुबंध के मुताबिक आर्बिट्रेटर (मध्यस्थ) के समक्ष एक आवेदन सुलहनामा के लिए पेश किया गया। इस पर मध्यस्थ न्यायालय ने अवार्ड पारित किया
जिसमें निर्णितऋणी से कंपनी को 2,30,574 रुपए दिलाने का आदेश पारित किया गया।जिसकी सूचना लीला राम को दी गई इसके बाद उन्होंने ऋण अदायगी में रुचि नहीं ली। इस पर फाइनेंस कंपनी की ओर से अधिवक्ता ने प्रधान जिला न्यायाधीश बालोद के समक्ष अवार्ड के निष्पादन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया । जिस पर न्यायालय ने निर्णितऋणी से कर्ज की राशि प्राप्त करने के लिए कंपनी के पक्ष में आदेशित किया। प्रकरण 5 वर्ष से लंबित होने पर भी कर्जदार लीला ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद चल संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन कोई भी कुर्क योग्य वस्तु प्राप्त नहीं हुई । तब न्यायालय द्वारा चोलामंडलम के आवेदन पर लीलाराम को कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए आदेशित किया कि क्यों ना आपको सिविल कारागार में निरोध किया जाए। जिसका समुचित कारण सहित जवाब नहीं दिया गया और न ही कर्ज की राशि अदा किए जाने पर न्यायालय द्वारा लीलाराम को सिविल कारागार में भेजने का आदेश दिया है।
चोलामंडलम से लिए गए ऋण की वसूली के संबंध में प्रधान जिला न्यायाधीश बालोद ने सुनाया ऋणी को एक महीने सिविल जेल में रखने का फैसला
