बालोद । विगत 4 नवंबर से जारी सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल से 14 नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी पर खतरा मंडरा रहा था। जो शासन प्रशासन की तत्परता सहित मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के साथ टल गया। अंततः 12 नवंबर की शाम को सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। उनकी जो मांगी थी उन पर जल्द कार्यवाही का आश्वासन भी मिला तो वहीं कुछ मांगों पर विभाग ने शासन को प्रस्ताव भी भेजने की लिखित आश्वासन दिया है। तो वही तात्कालिक तौर पर कर्मचारियों की जो 6 वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि की मांग थी उसे 24 घंटे के भीतर पूरा करते हुए 25% वेतन वृद्धि की जाएगी। इस सौगात के साथ कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त की और अब सभी अपने काम पर लौट रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो अब 14 नवंबर से शासन द्वारा तय तारीख पर धान खरीदी शुरू की जा सकेगी। हड़ताल खत्म होने पर किसानों ने भी राहत की सांस ली। जो धान कटाई मिजाई कर पहले दिन से ही धान बेचने के लिए टोकन कटवा कर बैठे हैं। इधर लगातार हड़ताल के चलते सोसाइटी में ताले लटके हुए थे।कई जगह सिर्फ कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे ही काम चल रहा था।
मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल से समिति प्रबंधकों की हड़ताल समाप्त
मुख्यमंत्री के समक्ष 12 नवंबर को विभागीय अधिकारियों के साथ प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल के संबंध में सकारात्मक चर्चा हुई। उनके द्वारा त्वरित कार्यवाही का भरोसा दिया गया। मुख्यमंत्री की सराहनीय पहल पर समिति कर्मचारियों की 06 वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि की मांग को पंजीयक सहकारी संस्थाएं, छ०ग० द्वारा 24 घंटे के भीतर पूर्ण किया जाकर समिति कर्मचारियों के वेतन में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गयी। इसके साथ ही अन्य 02 मांगों के संबंध में शासन स्तर पर अंतर्विभागीय समिति का गठन कर उचित कार्यवाही की जा रही है। इसलिए हडताली समिति कर्मचारी संघ की मुख्य मांगों के निराकरण हेतु मुख्यमंत्री के आश्वासन पर सहकारिता विभाग द्वारा सकारात्मक पहल कर त्वरित कार्यवाही से संघ संतुष्ट हुआ इसलिए समिति कर्मचारियों की जारी हड़ताल समाप्त घोषित की है। साथ ही समस्त समिति कर्मचारी शासन की समस्त योजनाओं का समिति स्तर से क्रियान्वयन किए जाने हेतु प्रतिबद्धता जताई है। समिति कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री, सहकारिता मंत्री सहित सहकारिता के पंजीयक सहकारी संस्थाएं एवं खाद्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
क्या थी हड़तालियों की मांगे
छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति कर्मचारियों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल में थे। कर्मचारी अपनी समस्याओं और अधिकारों के प्रति सरकार का ध्यान खींचने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। धान खरीद सीजन के शुरू होने के कुछ ही दिन पहले उठाए गए इस कदम से आगामी खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी इससे किसानों के लिए समस्याएं उत्पन्न हो सकती थी। हालांकि समय रहते कर्मचारियों और शासन प्रशासन की बीच सुलह से अब धान खरीदी बिना किसी बाधा के शुरू हो सकेगी। इस हड़ताल का प्रमुख उद्देश्य सरकार तक अपनी तीन मुख्य मांगों को पहुंचाना था। इन मांगों में पहला प्रबंधकीय अनुदान है जो मध्यप्रदेश शासन द्वारा सहकारी समितियों को दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें 5 लाख रुपए का प्रबंधकीय अनुदान प्रदान किया जाए।
नई भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत हो समायोजन
दूसरी मांग सेवा नियमों में संशोधन की है ताकि कर्मचारियों को सुरक्षित और स्थिर सेवाओं का लाभ मिल सके। इसके साथ ही, कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में पदोन्नति दी जाए और नई भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत समायोजित किया जाए। तीसरी मांग धान उपार्जन नीति से जुड़ी है। कर्मचारी चाहते हैं कि नीतिगत बदलाव हो ताकि समितियों को होने वाले नुकसान से बचाव हो सके और उनकी आय को संरक्षित किया जा सके.
गुरुर के कर्मचारी दुर्ग में संभाग स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
खरीदी के आदेश में भी हुआ बदलाव: एक माह के भीतर होगा धान का उठाव
वहीं इस हड़ताल का असर भी देखने को मिला । शासन प्रशासन ने अपनी खरीदी व्यवस्था में भी बदलाव लाया है । जिसके तहत 12 नवंबर को ही एक नया आदेश जारी कर सभी संभाग आयुक्त और कलेक्टर को निर्देशित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी नीति की कंडिका 2 में निम्नानुसार प्रावधान है :-
“खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य के किसानों से धान की नगद व लिकिंग में खरीदी दिनांक 14 नवंबर, 2024 से 31 जनवरी, 2025 तक की जावेगी ।” उक्त नीति की कंडिका 15.8 एवं 15.9 में पूर्व में उल्लेखित प्रावधान के स्थान पर अब निम्नानुसार प्रावधान प्रतिस्थापित किया जाता है :-
“खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान खरीदी की अंतिम तिथि के पश्चात् मार्कफेड द्वारा खरीदी केन्द्र में भण्डारित समस्त धान को एक माह के भीतर मिलर एवं परिवहनकर्ताओं के माध्यम से उठाव कराया जायेगा, यदि एक माह के पश्चात भी खरीदी केन्द्र में धान शेष रहता है, तो उठाव हेतु शेष धान की मात्रा पर समिति को सूखत प्रदाय करने के लिए खाद्य विभाग द्वारा प्रस्ताव वित्त विभाग को प्रेषित की जाएगी।”
