DAILY BALOD NEWS

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सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में हुआ देव उठनी का आयोजन

बालोद। बालोद ब्लॉक के सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में मंगलवार को स्कूली बच्चों सहित समस्त स्टाफ ने देव उठनी का पर्व मनाया। इस अवसर पर स्कूल परिसर में स्थापित तुलसी चबूतरा में दीप जलाकर पूजा अर्चना की गई। तो विधि विधान से गन्ना रूपी शालिग्राम और तुलसी के साथ विवाह संपन्न कराया गया। वही सभी बच्चों को तुलसी विवाह को लेकर प्रचलित अलग-अलग कथा कहानियों से भी अवगत कराया गया। इस दौरान बच्चों ने दोहा गाकर राउत नृत्य की प्रस्तुति भी दी।

संस्कृति को बचाए रखने का संदेश भी प्रधानाचार्य ताराचंद साहू ने दिया। तो वहीं स्टाफ द्वारा भी तुलसी विवाह का महत्व, क्यों तुलसी का विवाह शालिग्राम से होता है, इस बारे में प्रचलित कथा बताया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से आचार्य रेख लाल देशमुख, धनंजय साहू, लक्ष्मी साहू, ख़ेमिन साहू, रीना देशलहरे, माधुरी यादव, चैनकुमारी नेताम, रितु पिस्दा, भावना देशलहरे, त्रिवेणी दुबे, नुमेश्वरी विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।

तुलसी विवाह का महत्व बताया

बच्चों को आयोजन के दौरान तुलसी विवाह का महत्व बताया गया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी पर भगवान शालिग्राम संग तुलसी विवाह का बहुत ही विशेष महत्व होता है। चार महीने की योगनिद्रा के बाद जब प्रभु विष्णु जागते हैं तो उस दिन सभी देवी-देवता मिलकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। भगवान विष्णु के जागने पर चार महीने से रुके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। इस दिन भगवान शालिग्राम संग तुलसी विवाह किया जाता है। ऐसा करने पर वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं खत्म होती है और जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आती हैं वह भी दूरी हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी-शालिग्राम का विवाह करने पर कन्यादान के बराबर का पुण्य लाभ मिलता है। अगर किसी के विवाह में तरह-तरह की अड़चनें आती हैं या फिर विवाह बार-बार टूटता है तो इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन शुभ माना गया है।

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