सांकरा में तालाबंदी की चेतावनी के बाद शिक्षक की समस्या सुलझाने पहुंची एसडीएम कहने लगी: बिना गुरु के एकलव्य जब धनुर्विद्या सीख सकते हैं तो आप लोग क्यों नहीं पढ़ सकते



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एसडीएम के सामने एक छात्र ने साफ कहा: दूसरे टीचर से हमें समझ नहीं आता, एक ही विषय को दो-दो टीचर पढ़ा रहे हैं

इधर चार दिन तक व्यवस्था नहीं होने पर तालाबंदी के निर्णय पर अमल करने की अध्यक्ष ने कही बात, लगाया आरोप: बच्चों को टीसी निकालने की बात कर धमका रहे हैं कुछ शिक्षक

बालोद। बालोद ब्लाक के सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल में एक व्याख्याता विवेक धुर्वे को विगत दिनों हायर सेकेंडरी स्कूल पीपरछेड़ी में व्यवस्थापन के तहत अटैच करके भेज दिया गया है। उन्हें वापस लाने के लिए वाणिज्य संकाय के बच्चों द्वारा मांग की जा रही थी। शाला प्रबंधन समिति को इस संबंध में लिखित आवेदन भी दिया गया था कि हमें वही शिक्षक चाहिए। हमें उसी से पढ़ना है। हमारा टीचर वापस करो। इस मुद्दे को लेकर शाला प्रबंधन समिति सहित ग्रामीणों द्वारा विगत दिनों कलेक्टोरेट पहुंचकर शिक्षक को वापस बुलाने की मांग की गई थी। वरना शुक्रवार को तालाबंदी की चेतावनी दी गई थी। इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन हरकत में आ गया था और शुक्रवार को सुबह 11 बजे ही जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार सहित थाना प्रभारी बालोद भी स्कूल आ गए। पर यहां तो माहौल ही कुछ अलग था। जो ग्रामीण तालाबंदी की चेतावनी दिए थे वह एकजुटता के अभाव में ऐसा कुछ कर नहीं पाए। वहीं बच्चे भी आपस में अपनी मांगों पर बट गए। कुछ ही बच्चे अधिकारियों के समक्ष हाथ उठाकर कहने लगे कि हमें वही शिक्षक चाहिए। तो वहीं अधिकारियों द्वारा बच्चों के साथ माइंड गेम भी खेला गया। उन्हें इस तरह से अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया कि बच्चे किसी तरह से आंदोलन की ओर उन्मुख ना हो। एसडीएम प्रतिमा ठाकरे तो क्लास में जाकर बच्चों को काफी देर तक समझाती दिखी। इस दौरान एक छात्र ने स्पष्ट अपनी समस्या बताई कि विवेक धुर्वे के जाने के बाद हमें जो शिक्षक पढ़ा रहे हैं उनसे समझ नहीं आता है। एक ही विषय को दो-दो टीचर पढ़ाते हैं। इस पर मौके पर मौजूद अधिकारी दबाव पूर्वक समझाइश देते हुए बच्चे को शांत कराने का प्रयास करते रहे। एसडीएम कहने लगी कि बच्चे दायरे में रहे, लक्ष्मण रेखा पार ना करें। दूसरे क्लास में भी जब पीछे बेंच पर बैठे हुए बच्चे विवेक धुर्वे को वापस लाने के लिए हाथ उठाने लगे और बाकी सब शांत बैठे रहे तो अचानक एसडीएम मैडम उन हाथ उठाने वाले बच्चों से विषय से संबंधित सवाल पूछने लग गई। इस तरह अप्रत्यक्ष तरीके से आंदोलन को टालने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया गया। जो बच्चे पहले स्वयं लिखित में आवेदन दिए थे कि हमें वही शिक्षक चाहिए वह अधिकारियों के सामने कुछ कह नहीं पाए और शांत बैठे रहे। इस पर अधिकारियों ने मान लिया कि उन्हें वहीं शिक्षक ही नहीं चाहिए कोई भी शिक्षक की व्यवस्था करेंगे तो इनका काम चल जाएगा। यही आश्वासन दिया गया है कि अगर विवेक नहीं भी आ पाते हैं तो उनकी जगह इस विषय से संबंधित दूसरे शिक्षक की व्यवस्था जल्द करेंगे।

टीसी निकाल देने की दी गई थी बच्चों को धमकी, इसलिए कोई तालाबंदी में सामने नहीं आ पाए

वहीं कुछ बच्चों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्तों पर बताया कि हमें एक दिन पहले कुछ शिक्षकों द्वारा टीसी निकाले जाने की धमकी दी गई थी। कहा गया था कि अगर किसी तरह से तालाबंदी, हड़ताल में शामिल होते हैं तो हमारा टीसी निकालकर दे दिया जाएगा। इस बात से बच्चे डरे सहमे थे और उन्होंने फिर अधिकारियों के सामने विवेक धुर्वे को वापस लाने की पक्ष में किसी भी तरह से बात नहीं रख पाए और डरे सहमे नजर आए। ना ही बच्चे तालाबंदी के लिए सामने आ पाए। स्कूल खुलते ही सभी अपने-अपने क्लास में जाकर पढ़ाई करने लग गए थे। प्रबंधन समिति अध्यक्ष अध्यक्ष भूपत बघेल ने भरसक प्रयास किया कि बच्चे एकजुट हो और तालाबंदी शुरू कर सके। ताकि उनकी मांगे जल्द पूरी हो लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अन्य जनप्रतिनिधि सहित प्रबंधन समिति के लोग अधिकारियों के से बात कर सुलह करने का रास्ता अपनाने लगे। बैठक के दौरान भी समिति के लोग आपस में उलझते नजर आए। बच्चों को टीसी निकालने देने, धमकाए जाने की बात शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूपत बघेल ने भी खुले तौर पर कही और कहा कि इसी वजह से बच्चे कुछ कर नहीं पा रहे हैं। उन्हें डरा दिया गया है। उन्होंने बच्चों को भी अंत में स्पष्ट समझाया कि आज हम आपके हित के लिए आंदोलन करना चाह रहे हैं। ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। आपने ही लिखकर हमें दिया था तभी हम इस तरह का कदम उठाने जा रहे थे लेकिन आज आप लोग ही पीछे हट गए हैं तो फिर आगे हमसे किसी तरह की मदद की उम्मीद ना करें। बैठक के बाद बच्चों की मंशा जानने के लिए एसडीएम क्लास में पहुंची। बच्चों को विवेक धुर्वे के पक्ष में जो भी हैं हाथ उठाने के लिए कह रहे थे। लेकिन बच्चे डरे सहमें से बैठे रहे और कोई जवाब नहीं दे पाए। कुल मिलाकर मामला ठंडा बस्ते में रहा। ना कोई आंदोलन हुआ। सिर्फ औपचारिक बैठक लेकर समझाइश देकर मामले को टाल दिया गया। इधर शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूपत बघेल ने मीडिया के सामने कहा कि एक बार फिर अफसरो ने हमें लॉलीपॉप दिखाया है। दो-चार दिन देख लेते हैं वरना तालाबंदी तो अब तय है।

अलर्ट रही पुलिस प्रशासन भी, पहुंच गई थी पूरी टीम

तालाबंदी की चेतावनी दी गई थी जिसको देखते हुए पुलिस प्रशासन भी अलर्ट थी। सुबह से ही थाना प्रभारी रवि पांडे सहित अन्य अधिकारी यहां पहुंच गए थे। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। बच्चे क्लास रूम में जाते रहे। कुछ देर तक प्रबंधन समिति अध्यक्ष ने एक गेट पर ताला लगाने की कोशिश की लेकिन उनका प्रयास भी असफल रहा और प्रबंधन समिति सहित पंचायत प्रतिनिधियों से ही आपसी एकजुटता के अभाव के चलते तालाबंदी या अन्य कोई भी आंदोलन नहीं हो पाया और बात वही की वहीं रह गई। जो आश्वासन अधिकारी 15 दिन पहले से देते आ रहे थे वही बात घूम फिर कर दोहराई गई। जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मर्कले भी अपनी मजबूरी बताते रहे की एक जगह मांग उठती है तो दूसरे जगह से व्यवस्था करते हैं। तो कहीं ना कहीं व्यवस्था बाधित होती है। शिक्षक की कमी तो लगभग कई जगह है। हम व्यवस्था बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। यहां की दर्ज संख्या के हिसाब से कोशिश करेंगे कि जल्द से जल्द व्यवस्था हो जाए। उन्होंने वस्तुस्थिति से कलेक्टर को अवगत कराने के बाद जो भी निर्देश देंगे उस हिसाब से जल्द समस्या दूर करने की बात कही।

शिक्षकों में दिख रहा सामंजस्य का अभाव, विवेक धुर्वे के संलग्नीकरण में राजनीति की साजिश

कहीं ना कहीं सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों के बीच ही सामंजस्य का अभाव देखने को मिल रहा है । जिसके चलते यहां की जो समस्या हैं वह भी समय पर निराकृत नहीं हो पा रही है। वर्षों से भवन की समस्या बनी हुई है। तो कुछ महीनो बाद दो से तीन शिक्षकों की कमी भी हो जाएगी। जो शिक्षक यहां से स्थानांतरित होकर या संलग्न के तहत जाते हैं वे फिर यहां आ नहीं पाते। ऐसे में प्रबंधन समिति को डर है कि फिर शिक्षकों की कमी ना हो जाए। इसलिए कहा जा रहा है कि अगर संभव हो तो विवेक धुर्वे को ही वापस भेज दिया जाए। अगर उनका आना नहीं हो पाएगा तो उसी विषय से संबंधित दूसरे शिक्षक की व्यवस्था तत्काल की जाए। अभी भी उनकी जगह जो वर्तमान में पदस्थ शिक्षक हैं वह भी खुद को उन विषयों को पढ़ाने में कठिनाई महसूस कर रहें तो बच्चों को भी जल्दी समझ नहीं आ रहा है। अर्थशास्त्र विषय पर एक शिक्षक सिर्फ थ्योरी पढ़ा रहे हैं तो उसी विषय के सांख्यिकी भाग (गणित संबंधित) को दूसरे शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इस तरह एक ही विषय को बच्चे दो-दो शिक्षक से पढ़ रहे हैं। जिस शिक्षक से वर्षों से बच्चे पढ़ रहे थे उनसे उनका जुड़ाव था। उनकी शिक्षण पद्धति उन्हें आसानी से समझ आती थी। लेकिन सामने परीक्षा है और आधे सत्र में ही उनसे शिक्षक छीन कर शिक्षा विभाग ने कहीं ना कहीं बच्चों के साथ अन्याय कर दिया है और राजनीति की भेंट चढ़ते हुए मामले को सुलझाने के बजाय आपसी मनमुटाव और सामंजस्य का अभाव यहां देखने को मिल रहा है।

अध्यक्ष ने कहा : अधिकारी हमें लॉलीपॉप पकड़ा कर चले गए

सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूपत बघेल ने कहा कि हमने तालाबंदी की चेतावनी दे दिए थे। लेकिन एसडीएम मैडम और जिला शिक्षा अधिकारी हमें और बच्चों को लॉलीपॉप पकड़ा कर चले गए। दर्ज संख्या के आधार पर हमें तत्काल शिक्षक की जरूरत थी। लेकिन बात तो कह गए हैं कि चार दिन के अंतर्गत व्यवस्था कर देंगे और रही बात बच्चों की कल तक मेरे पास बच्चों का आवेदन दिया गया था कि हमें विवेक धुर्वे ही चाहिए। लेकिन कल कुछ बच्चों द्वारा मुझे फोन करके बताया गया कि किसी शिक्षक ने उन पर दबाव बनाया है कि उनका टीसी काट कर दे देंगे। ऐसा धमकाना गलत है। बच्चों को धमकाया जा रहा है कि यदि आप लोग हड़ताल, तालाबंदी में शामिल होते हैं तो टीसी काटकर दिया जाएगा। यह दबाव किसके द्वारा बनाए गए हैं मुझे मालूम नहीं है ।अधिकारी हमें आश्वासन दिए हैं। बुधवार या गुरुवार तक यदि व्यवस्था नहीं किया गया तो शाला प्रबंधन समिति और पालक समिति पुनः तालाबंदी के लिए बाध्य हो जाएंगे। अधिकारियों द्वारा बच्चों के साथ माइंड गेम के साथ खेल खेला गया। जिससे अपनी मांग और मुद्दे पर बच्चे डिवाइड हो गए। बच्चे मूल मुद्दे से भटक गए। हम चाहते हैं कि कैसे भी हो शिक्षक की व्यवस्था होनी चाहिए। एक अच्छा टीचर आए। चाहे विवेक धुर्वे आए चाहे उसके जगह कोई दूसरा पर हो उसी विषय का । विवेक धुर्वे एक मुद्दा था। क्योंकि बच्चों ने ही हमें स्वयं से आवेदन दिया था लेकिन वर्तमान में बच्चे चाहे शिक्षक के दबाव या किसी के दबाव में आकर अपने मूल मुद्दे से भटक गए हैं।

प्राचार्य ने कहा : बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हो रही है

प्रभारी प्राचार्य टीआर ठाकुर ने कहा कि जिला शिक्षा विभाग से विवेक धुर्वे का पीपरछेड़ी के व्यवस्थापन का आदेश आया। आदेश आते ही दूसरे दिन मैंने स्टाफ को बुलाकर बैठक ली। सभी को बताया कि व्यवसाय अध्ययन और अर्थशास्त्र पढ़ाना है। जिसमें गौतम सर और श्रीवास्तव सर 11वीं इकोनॉमिक्स के तैयार हो गए। व्यवसाय अध्ययन केडी देशमुख और एलपी देशमुख दोनों पढ़ाने के लिए तैयार हो गए। उसी के आधार पर टाइम टेबल बना रहे थे। फिर दूसरे दिन बीईओ और तहसीलदार आए। उन्हें भी हमने व्यवस्था करने की और पढ़ाई बाधित नहीं होने की बात कही। शुक्रवार को अधिकारी पुनः स्कूल आए थे और शाला समिति के समक्ष बैठक लेकर आश्वासन दिए हैं कि दो-तीन दिन के भीतर टीचर की व्यवस्था कर देंगे। चाहे विवेक धुर्वे हो चाहे कोई भी कोई भी उसी विषय का व्याख्याता होना चाहिए। जो बच्चों को पढ़ा सके। पूर्व में इंग्लिश का व्याख्याता यहां तीन थे जिसमें से एक खरथूली चला गया। जो दो टीचर है उनसे पढ़ा रहे हैं। उनकी क्लास बाधित नहीं हो रही। लेकिन अब आगे टीचर की व्यवस्था नहीं करेंगे तो शाला प्रबंधन समिति को इस बात से अवगत कराया जाएगा। आगे की कार्रवाई समिति करेगी। शिक्षकों को यही कहूंगा कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो आप क्लास लीजिए। मैं भी जून 2025 में रिटायर होने जा रहा हूं। मेरे से पहले वरिष्ठ व्याख्याता श्री देशलहरे (संस्कृत) भी अप्रैल 2025 में रिटायर हो जाएंगे। इससे और यहां फिर दो शिक्षक की कमी हो जाएगी। जिससे यहां पढ़ाई बाधित होगी। व्यवस्था बिगड़ जाएगी। मैं प्रशासनिक अधिकारियों से कहना चाहूंगा कि इस कमी को तत्काल दूर करें।विवेक धुर्वे, जो शुरू से बच्चे को पढ़ा रहे थे, बच्चे उनसे जुड़े हुए थे। उनकी एक-एक बातों को समझते थे और किस पद्धति से पढ़ाते थे वह जानते थे। अचानक उनके चले जाने के बाद दूसरे टीचर आएंगे। उनकी शब्दावली पद्धति अलग होगी। वह अपने अनुसार पढ़ाएंगे तो बच्चों को उनकी भाषा पद्धति समझने में कठिनाई होगी। सामने परीक्षा भी है। अधिकारी आए थे और दो-तीन दिन में व्यवस्था करने की बात कहे हैं। कब तक व्यवस्था होती है अभी हम कुछ कह नहीं सकते।

सरपंच बोली: मांग पूरी नहीं हुई तो करेंगे आंदोलन

सांकरा ज की सरपंच वारुणी शिवेंद्र देशमुख ने कहा कि शुक्रवार को शाला प्रबंधन समिति की बैठक स्कूल में रखी गई थी। जिसमें डीईओ, एसडीएम तहसीलदार, थाना प्रभारी आदि उपस्थित हुए थे। जिसमें टीचर के मांग के बारे में बात रखी गई। बच्चों का भी कहना है कि व्याख्याता विवेक धुर्वे के पीपरछेड़ी में व्यवस्थापन से पढ़ाई बाधित हो रही। उन्हें वापस बुलाया जाए। यहां शिक्षक की कमी हो रही है। पढ़ाई बाधित हो रही है। बच्चों ने अभी अपनी बात रखी। अधिकारियों ने भी कहा कि हम चार-पांच दिन के अंदर टीचर की व्यवस्था करते हैं। अगर विवेक धुर्वे नहीं भी आते हैं तो उनके विषय से संबंधित शिक्षक की नियुक्ति करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो आगे हम बच्चों के साथ मिलकर अपनी कार्रवाई करेंगे।

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