शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलाव, सुधार की आवश्यकता एवं शिक्षक ,पालक एवं बालक की भूमिका पर हुआ शैक्षणिक चिंतन
बालोद। डौंडी ब्लॉक के वनांचल में स्थित ग्राम कंजेली में 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर शैक्षिक संगोष्ठी का अनूठा आयोजन हुआ। जिसके
माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलाव एवं उनमें सुधार की आवश्यकता एवं शिक्षक ,पालक एवं बालक की भूमिका आदि विषय पर शैक्षणिक चिंतन किया गया। वर्तमान समय में विषयगत शिक्षा सुधार के संबंध में बहुत से कार्य किया जा रहे हैं किंतु बच्चों में अधिकांशत व्यवहारगत त्रुटियां सामने आ रही है। जिसे पालक, शिक्षक एवं समाज के हर वर्ग के द्वारा महसूस किया जा रहा है। वर्तमान में हमें विषयगत शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक शिक्षा पर भी बल देना होगा।

और इसके लिए पालक शिक्षक सभी को अपने-अपने स्तर पर किस तरह से प्रयास करने होंगे।
साथ ही व्यस्ततम क्रियाकलापों के बीच शिक्षकों को किस तरह से बच्चों के हित में कार्य करना होगा इन विषयों पर चर्चाएं की गई। संगोष्ठी में शाला के प्रधान पाठक द्वारा उक्त विषय पर चिंतन हेतु सभी शिक्षकों को खुला आमंत्रण दिया गया था।
जिसमें रुचि लेते हुए कादम्बिनी लोकेश पारकर यादव व्याख्याता हायर सेकेंडरी स्कूल बड़गांव, विकासखंड डौण्डीलोहारा, जिला-बालोद, वेद प्रकाश यदु (सीएसी कुआंगोंदी, डौण्डी) ईश्वरी कुमार सिंहा शिक्षक (शासकीय प्राथमिक शाला आमापानी ,विकास खंड -गुरुर), सेमन लाल नेताम (सीएसी बेलोदा, डौण्डी), गोपिका राजपूत (शासकीय प्राथमिक शाला पेण्ड्री,डौण्डी), दीपक यादव पत्रकार बालोद से, संजय कुमारी साहू आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घोटिया से, आशो ठाकुर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंजेली,मनीष खुर्शायाम अध्यक्ष युवा समिति कंजेली , मुकेश सेन,पूजा ठाकुर युवा समिति सदस्य , परदेसी राम कुरैटी, रूपा आंचल, श्रीमती चमेली बाई स्मार्ट माता कंजेली, मंगलूराम नेताम, गजेंद्र कुमार, संतोष कुमार सुनिधि कुमारी एवं शाला से ममता सोनेश्वर, अशोक कुमार सेन एवं बच्चों ने उपस्थिति प्रदान की। श्रीमती कादम्बिनी यादव द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के साथ-साथ बेटा बचाओ और बेटा पढ़ाओ पर भी बल देने की बात पालको के बीच रखी। वर्तमान समय में बिटिया तो आगे बढ़ रही है पर इस भाग दौड़ भरी दुनिया में बेटों के रास्ते बदल रहे हैं ।
बेटे कहीं पीछे ना छूट जाए इसलिए उन पर भी ध्यान देने की जरूरत है इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने चिंतन सबके समक्ष रखा। ईश्वरी कुमार सिंहा के द्वारा भारत सरकार के राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यालयों में आईसीटी यानी इनफॉरमेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के उपयोग हेतु प्रयास करने,पुस्तकालयों के विकास एवं उपयोग पर जोर देने एवं भाषाई समझ में बढ़ोतरी करने , मोबाईल एवं टैक्नोलॉजी का शैक्षणिक उपयोग करने पर विस्तार से चर्चा किया गया। साथ ही सभी उपस्थित शिक्षक ,पालक एवं युवाओं के साथ एक गणितीय गतिविधि के माध्यम से बताया कि कैसे जीवन में घटाव एवं बढ़ाव या कभी बराबर रहने के अवसर आते हैं। इन सभी परिस्थितियों में हमें बहुत अधिक हर्षित या बहुत अधिक दुखी ना होकर केवल आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

प्रयास के भाव से सोचे हम क्या कर सकते हैं?
ममता सोनेश्वर के द्वारा वर्तमान जीवन में व्यस्तता एवं आ रही चुनौतियों को देखते हुए हम क्या कर सकते हैं की मजबूरी को छोड़कर , हम क्या कर सकते हैं (प्रयास) इस पर चिंतन के द्वारा विवेक से अपने कार्यों को उत्कृष्टता के साथ करने साथ ही शिक्षा में बेहतर परिणाम के लिए शिक्षा की नींव अर्थात प्रारंभिक कक्षाओं बालवाड़ी एवं कक्षा 1,2,3 पर विशेष रूप से कार्य करने की आवश्यकता पर ध्यान देने की बात रखी। क्योंकि पौधे के विकास के लिए खाद और पानी जड़ों में देना जरूरी है । बाहर या ऊपर से खाद पानी देकर मजबूत पेड़ खड़ा नहीं किया जा सकता। इसलिए बुनियादी कक्षाओं में विशेष मेहनत के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। इसके साथ ही कार्य के साथ सभी को बेहतर स्वास्थ्य एवं स्वयं के लिए भी समय निकालकर अपने कार्यों को आनंद पूर्वक करने की बात कही । वेदप्रकाश यदु द्वारा अकादमिक समझ को साथ एवं प्राथमिकता तय करते हुए अपने कार्यों को सही ढंग से और समय प्रबंधन पर ध्यान देने के संबंध में विचार साझा किया गया।
सेमनलाल नेताम द्वारा
समन्वय के साथ आपसी तालमेल बैठाते हुए बच्चों के हित में कार्य कर पाने की बात रखी गई। श्रीमती संजय कुमारी साहू के द्वारा प्रारंभिक शिक्षा के रूप में आंगनवाड़ी के बच्चों के साथ कार्य करने के अपने अनुभव को सबके साथ साझा करते हुए व्यवहारगत एवं शैक्षणिक सुधार हेतु पालकों की अहम भूमिका, बच्चों के समक्ष मोबाइल देखने, लड़ाई झगड़े से बचने , बच्चों की शिक्षा में बेहतरी के लिए शिक्षकों के साथ-साथ पालकों की सहभागिता भी बहुत जरूरी होने की बात रखी ।

बच्चों को बताएं मोबाइल की दुरुपयोग और सदुपयोग
पत्रकार दीपक यादव ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में मोबाइल की उपयोगिता को लेकर बातें रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के साथ-साथ पालकों को भी बच्चों को मोबाइल के सदुपयोग और दुरुपयोग के बारे में जागरूक करना होगा। ताकि मोबाइल की लत से पढ़ाई में होने वाले व्यवधान से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षण संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले सर्वे में यह बात सामने आती है कि ज्यादातर मोबाइल देखने से बच्चे चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। आने वाली पीढ़ी के लिए यह एक गंभीर चिंतन का विषय है। मोबाइल शिक्षा का बेहतर माध्यम हो सकता है। इसलिए बच्चों को शिक्षा से संबंधित वीडियो देखने के लिए प्रोत्साहित करने कहा गया, ना कि गलत चीजों की देखने। बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे हैं इस पर भी पालकों की नजर होनी चाहिए।
गोपीका राजपूत द्वारा अपने शिक्षकीय जीवन के अनुभव साझा किया गया। आशो ठाकुर ने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए उनके बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाली की ओर विशेष ध्यान देने की बातें की। इसके लिए बच्चे के पैदा होने से पूरे गर्भावस्था से ही गर्भवती माता के ख्याल रखकर इस की शुरुआत करना जरूरी है क्योंकि सही पोषण ना मिलने से यदि बच्चा कमजोर पैदा होता है तो इससे उसे बेहतर शिक्षा प्राप्त करने में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था से ही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए माताओं का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है। इसके साथ ही आए हुए पालक गण एवं युवा समिति के सदस्यों के द्वारा भी अपने अनुभव एवं विचारों को सबके साथ साझा किया गया।

सभी आगंतुकों को शिक्षक ईश्वरी सिन्हा ने भेंट की “गीता”
आयोजन में ईश्वरी कुमार सिन्हा द्वारा सभी शिक्षकों एवं पालकों को ज्ञान की गंगा “गीता” एवं शिक्षा एवं विद्या – पं. श्रीराम शर्मा आचार्य,भाषा -संशय और शोधन,वैदिक गणित,बच्चों के लिए 101 प्रभावी बातें अन्य महत्वपूर्ण पुस्तको के साथ एक नीम का एक पेड़ भेंट किया गया। वहीं श्रीमती कादंबिनी के द्वारा बच्चों को कलर पेंसिल एवं विद्यालय को चार्ट एवं कलर सेट प्रदान किया गया। साथ ही
वेद प्रकाश यदु द्वारा सभी बच्चों के लिए पेंसिल रबर एवं विद्यालय को पेन भेंट किया गया। शाला परिवार की ओर से अतिथियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। कार्यक्रम के पश्चात पोषण वाटिका से प्राप्त राष्ट्रीय सब्जी कद्दू के साथ सबने न्योता भोजन किया। अंत में आयोजन में अपनी सहभागिता प्रदान करने के लिए शाला विकास युवा समिति के सदस्य परदेसी राम कुरेटी एवं पूजा ठाकुर द्वारा आए हुए शिक्षकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस प्रकार इस आयोजन के माध्यम से विश्व शिक्षक दिवस पर शिक्षा के क्षेत्र में आ रहे चुनौतियों और उसके लिए समाधान पर शैक्षिक चिंतन के माध्यम से चर्चा की गई। एवं शिक्षकों को आपस में मेल मुलाकात एवं एक दूसरे के विद्यालय का भ्रमण कर निरंतर सीखते रहने। साथ ही शिक्षा एवं व्यवहारगत आचरण को सुधारने में पालकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। अंत में शैक्षिक और धार्मिक भ्रमण के रूप में मालीपानी अमृत कुंड स्थल का भ्रमण भी किया गया। और वहां की विशेषताओं से परिचित हुए।
अरपा पैरी के धार,,,,गीत संयोजन के साथ जटिल योग का हुआ प्रदर्शन
छात्रा कुमारी लावण्या एवं गीतिका द्वारा छग के राजकीय गीत अरपा पैरी के धार,,,, गीत संयोजन के साथ विभिन्न प्रकार के जटिल योगों को सहजता से प्रस्तुत किया गया। साथ ही बालकों द्वारा सूर्य नमस्कार के बारह आसनों का प्रस्तुतीकरण किया गया। योग शिक्षक के रूप में अशोक कुमार सेन ने अपनी योग सीखने की यात्रा पर और वर्तमान में योग सीखने के महत्व पर चर्चा की।

विश्व शिक्षक दिवस का जानिए इतिहास
विश्व शिक्षक दिवस की स्थापना यूनेस्को द्वारा 1994 में की गई थी। 1996 में, यह शिक्षकों की स्थिति के बारे में अनुशंसा पर हस्ताक्षर करने की याद में मनाया गया। यह अनुशंसा शिक्षकों के अधिकारों, जिम्मेदारियों, प्रशिक्षण, रोजगार और कार्य स्थितियों पर केंद्रित थी। 1994 से, यह दिन प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में शिक्षकों द्वारा सामना की जाने वाली उन्नति या चुनौतियों से संबंधित एक अनूठी थीम पर केंद्रित होता है। इस वर्ष के विश्व शिक्षक दिवस की थीम है – शिक्षकों की आवाज़ को महत्व देना: शिक्षा के लिए एक नए सामाजिक अनुबंध की ओर,,है।
दुनिया भर में शिक्षकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है – कम वेतन से लेकर खराब कामकाजी परिस्थितियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी तक। यह दिन उनके सामने आने वाली समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करता है और हमारे जीवन में शिक्षकों की भूमिका के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। यह एक ऐसा दिन भी है जब छात्र शिक्षकों के प्रति अपना आभार व्यक्त कर सकते हैं और बता सकते हैं कि उन्होंने अपने शिक्षकों के जीवन को कैसे आकार देने में मदद की।
