अर्जुन्दा। अर्जुंदा के शासकीय महाविद्यालय में छात्रों के बीच लगातार बढ़ते असंतोष और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के विरोध में आज एक दिवसीय ताला बंदी की गई। छात्रों ने महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती रश्मि सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें समस्याओं की अनदेखी और अकुशल प्रबंधन मुख्य हैं।
प्रमुख शिकायतें और घटनाक्रम
छात्रों का आरोप है कि महाविद्यालय में लंबे समय से व्याप्त समस्याओं के संबंध में प्राचार्य को बिंदुवार शिकायतें दी गई थीं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों का कहना है कि विभिन्न माध्यमों, विशेषकर व्हाट्सएप ग्रुप और व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए, वे लगातार महाविद्यालय में हो रही दिक्कतों को प्राचार्य के समक्ष रखते आ रहे थे। बावजूद इसके, प्राचार्य ने इन समस्याओं का समाधान नहीं किया, जिससे छात्रों के बीच आक्रोश बढ़ता गया।

इसके अलावा, दो छात्रों—दुष्यंत देशमुख और दानेश्वर सिंह—के खिलाफ अतिथि कीड़ा सहायक और राजनीतिशास्त्र के अतिथि व्याख्याता द्वारा लगाए गए चरित्र हरण के आरोपों से स्थिति और भी गंभीर हो गई। छात्रों का दावा है कि इन आरोपों के आधार पर उन्हें थाना अर्जुंदा बुलाकर पूछताछ की गई, जिससे वे मानसिक अवसाद से ग्रसित हो गए हैं।
छात्रों का कहना है कि प्राचार्य को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने छात्रों के पक्ष में कोई कदम नहीं उठाया। इसके विपरीत, आरोप है कि प्राचार्य ने अतिथि व्याख्याताओं को छात्रों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराने को प्रोत्साहित किया। इससे छात्रों के बीच असंतोष और भय का माहौल उत्पन्न हो गया है।

ताला बंदी और अल्टीमेटम
आज महाविद्यालय में छात्रों ने एक दिवसीय ताला बंदी करते हुए प्राचार्य के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें मांग की गई है कि प्राचार्य श्रीमती रश्मि सिंह अपने पद से इस्तीफा दें और उनका प्रभार किसी योग्य सहायक अध्यापक को सौंपा जाए।
छात्रों का साफ कहना है कि अगर इस समयावधि में उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे। उनका आरोप है कि प्राचार्य के अकुशल प्रबंधन और महाविद्यालय की अव्यवस्था के कारण उनका शैक्षणिक और मानसिक शोषण हो रहा है।

प्राचार्य का मौन और छात्रों का संघर्ष
छात्रों का कहना है कि प्राचार्य के नेतृत्व में महाविद्यालय का प्रशासन असफल रहा है। छोटे-छोटे मुद्दों का समाधान महाविद्यालय स्तर पर आसानी से हो सकता था, लेकिन प्राचार्य द्वारा छात्रों को थाने का डर दिखाकर उन पर दबाव बनाया जा रहा है। इससे छात्रों में नाराजगी और तनाव का माहौल बढ़ रहा है।
छात्रों ने साफ कहा है कि वे अपने हक और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे और कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। महाविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण पहले ही प्रभावित हो चुका है, और छात्रों ने प्रशासन से जल्द से जल्द उचित कदम उठाने की मांग की है।
यह मामला महाविद्यालय के लिए एक गंभीर संकट का रूप ले सकता है, अगर समय रहते छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। सभी छात्र-छात्राएं प्राचार्य के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं और स्थिति के जल्द न सुलझने पर शैक्षणिक गतिविधियों के ठप पड़ने की संभावना है।
