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गाँधी जयन्ती पर मधुर साहित्य परिषद् की विचार गोष्ठी सम्पन्न

डौंडीलोहारा। गाँधी जयंती के अवसर पर मधुर साहित्य परिषद की विचार गोष्ठी दंतेश्वरी मंदिर परिसर डौंडी लोहारा में संपन्न हुई। चर्चा का विषय था लाल बहादुर शास्त्री व महात्मा गांधी के व्यक्तित्व एवम् कृतित्व गोष्ठी की शुरुआत माता दन्तेश्वरी की पूजन वन्दन तथा लाल बहादुर शास्त्री एवं महात्मा गाँधी की जयकारे से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.अशोक आकाश ने की, संचालन संस्था के महासचिव देवजोशी गुलाब ने किया।


विचार गोष्ठी की शुरुआत हर्षा देवांगन ने बापू के स्वच्छ भारत की सपना के बारे में बात रखते की गई। “गांधी जी चाहते थे कि देश मात्र कूड़ा करकट से ही साफ न हो अपितु हम सभी स्वच्छ रहे, स्वस्थ्य रहें। देश रिश्वतखोरी कालाबजारी लूटपाट हत्या मारपीट जैसे तमाम बुराइयों से भी स्वच्छ रहे।”

वीरेन्द्र कुमार अजनबी ने दोनो विभूतियों की महानता के बारे में कहा कि ” कद काठी से कोई छोटा या बड़ा नही होता बल्कि मनुष्य अपने कर्म एवं विचारों से महान होता है।”
उन्होंने वर्तमान समय में हो रही घटनाओं के संबंध में व्यंग कसते हुए कहा कि
दुनिया म झूठ लबारी चलत हे,
थोरको का काहंव आरी चलत हे,
कहाँ खोजँव मैं राम राज ला,
चारो मुड़ा गद्दारी चलत हे।
देवरी बंगला से आये अजय कुमार चौहान ने अपनी कविता के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री जी की जीवनी बताई तथा महात्मा गांधी के विचारों एवं आदर्शों के विपरीत हो रहे लोकाचार से व्यथित पंक्तियाँ कही कि

“गांधी जी के थे विचार,
सत्य अहिंसा पर चले संसार,
पर झूठ फरेब ही हो रहा है,
देश मेरा रो रहा है।”

मधुर साहित्य परिषद इकाई डौंडी लोहारा के अध्यक्ष कन्हैया लाल बारले ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ” गांधी जी उच्च कोटि के लेखक भी थे। बचपन में देखी राजा हरिश्चंद्र की नाटक से सत्य से उनका साक्षात्कार हुआ था उन्हीं के आधार पर जीवन भर सत्य का पालन किया और “सत्य के प्रयोग” नामक आत्मकथा लिखी। इसके अलावा वे रूसी लेखक लियो टालस्टाय की कहानियों एवं उपन्यास से बहुत प्रभावित थे। लियो टालस्टाय की “वार एंड पीस” नामक उपन्यास को पढ़कर उन्होंने अहिंसा को अपनाया क्योंकि उस उपन्यास का सार यह है कि युद्ध में किसी का भला नहीं होता। युद्ध के पश्चात विजेता जीतकर भी हार जाता है। उन्ही सत्य और अहिंसा रूपी अमोघ अस्त्र से भारत को आजादी दिलाई।”

तोषण कुमार चुरेंद्र ने अपनी छंद बद्ध रचनाओं से शास्त्री एवं गांधी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का बखान किया।
विचार की अगली कड़ी में मधुर साहित्य परिषद जिला बालोद के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक डॉ अशोक आकाश ने कहा ” महात्मा गांधी को महात्मा ऐसे ही नही कहा जाता है।वे जन जन की भलाई के लिए भारत को आजादी दिलाई तथा छुआछूत ऊंच नीच के भेद भाव को मिटाने के लिए सत्य और अहिंसा को अपनाते हुए संघर्षरत रहे।महान व्यक्ति बनने के लिए अपने परिवार की तरफ पीठ करना पड़ता है। महात्मा वही जो सबके लिए अपनत्व की भाव रखे। महात्मा गांधी के कर्म व विचार इतने महान थे कि उनके सानिध्य में जितने लोग रहे वे सब उन्ही की तरह महान हुए।वे जिस जिस जगहों पर गये वे तीर्थ स्थल बन गए। विचार के पश्चात लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी पर दोहे एवम महात्मा गांधी के विचारों को बयां करते हुए पंथी गीत सुनाया ।
विचार की अंतिम कड़ी के रूप में परिषद के महा सचिव देव जोशी गुलाब ने लाल बहादुर शास्त्री की शालीनता, निर्भीकता आत्मनिर्भरता, ईमानदारी जैसे अनेक गुणों की सत्य घटनाओं की कहानियों को बताते हुए भारत रत्न शास्त्री जी को नमन किया। तत्पश्चात गांधी जी के विचारों को बताया कि विश्वास को तर्क के साथ तोलना चाहिए। इंसान को अपना विचार तोल तोल कर बोलना चाहिए। जिस देश में जानवरों के प्रति व्यवहार जैसा होगा। हमे समझना चाहिए कि वह देश वैसा ही होगा। हमे सदैव यह भान रहे कि हमें कल मरना है परंतु जीने की इच्छा इतना प्रबल हो कि हमे आज कल से बेहतर जीना है। गांधी जी अपनी सेहत के प्रति सदा सजग रहे। वे प्रति दिन सुबह शाम पैदल चलते थे। वे उपवास रहते थे । वे अन्याय के खिलाफ अनशन एवं सत्याग्रह करने में कभी पीछे नहीं रहे। वे सभी धर्मों व अध्यात्म के ज्ञाता थे। वे सर्वधर्म समभाव रखते थे।”
सभी साहित्यकारों ने अपने विचार के पश्चात शास्त्री एवं गांधी जी के प्रति काव्यांजलि अर्पित किए।
कन्हैया लाल बारले के द्वारा उपस्थित साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया गया।तत्पश्चात गोष्ठी की समापन की घोषणा हुई।

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