27 से 28 वर्षों बाद पहुंचे शिक्षक अपने कर्मभूमि के प्रथम संस्था में, कंजेली में हुआ अनूठा आयोजन
बालोद। शासकीय प्राथमिक शाला कंजेली विकास खंड -डौण्डी, जिला-बालोद छत्तीसगढ़ में स्थित संस्था है। विद्यालय की स्थापना जुलाई 1978 में हुई थी। इस साल शिक्षक दिवस पर यहां अनूठा आयोजन किया गया। दरअसल में 27 से 28 साल पहले जो शिक्षक यहां पदस्थ थे उनको एक जगह इकट्ठा किया गया और टीचर्स रीयूनियन का प्रोग्राम हुआ। दो दशक से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद अपने पहली पोस्टिंग के स्कूल में पहुंचे शिक्षक भी उसे पल को याद कर भावुक हो गए तो वही बड़े बुजुर्गों से मिलकर उन दिनों यादें ताजा करने लगे। इस दौरान उनके पढ़ाए बच्चों को आज बड़े होकर अलग-अलग मुकाम में पहुंचे देखकर भी शिक्षक खुद को गौरवान्वित महसूस करने लगे।

ये शिक्षक दे चुके हैं यहां सेवा
वर्तमान में जिला में बालोद में स्थित ट्राईबल ब्लाक – डौण्डी के दूरस्थ बिहड़ वनांचल क्षेत्र में सुविधाओं से विहिन अब तक 11 शिक्षकों एवं 2 शिक्षक ने व्यवस्था के तहत अपनी सेवाएं प्रदान की है। जहां क्रमशः पीलाराम ठाकुर 1978 से 1996तक,श्रीमती नंदा गंधर्व 1990 दो माह तक, श्री बोधन राम कुमारी 1995 मार्च से जुलाई तक,श्रीमती विमला केसरी 1995 में जुलाई से अगस्त तक, सुश्री नीलम शिवहरे 1995 सितंबर से दिसंबर तक, श्रीमती पुष्पा चौधरी , दिसंबर 1995 से 1997 तक, श्रीमती योगेश्वरी लारेंद्र 1999 से 2005 तक, श्री कौशल राम साहू 2005 से 2012 तक, ममता साहू 2006 से अनवरत कार्यरत, श्री दुष्यंत कुमार साहू एक सप्ताह तक,श्री डी.एल.भारद्वाज 2015 से 2022 तक व्यवस्था के तहत रमेश कुमार अश्वार्य 2022 से 2024 तक, श्री अशोक कुमार सेन जुलाई से व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं।

जहां लोग जाने से कतराते हैं ऐसी जगह पर आज शिक्षा का बेहतर वातावरण सृजित हो रहा है।
दूरस्थ वनांचल एवं सुविधा विहीनक्षेत्र होने के कारण अधिकांशत शिक्षक यहां आने से कतराते हैं । ऐसे में इन सब शिक्षकों ने वनांचल क्षेत्र में रहकर इस संस्था हेतु अपनी सेवा प्रदान की। वर्तमान संस्था प्रमुख ने बताया कि जब शाला युवा विकास समिति ने इस बार शिक्षक दिवस मनाने का आग्रह किया तो संस्था प्रमुख द्वारा ,शाला प्रबंधन समिति से विचार-विमर्श करते हुए विद्यालय से जुड़े सभी शिक्षकों से संपर्क कर उन्हें शिक्षक दिवस में आमंत्रित करने का सुझाव रखा गया। जिस पर सब की सहमति बनी और और भरसक प्रयास करके जिन शिक्षकों से संपर्क हो सका उन्हें आमंत्रण दिया गया। जिसे स्वीकार करते हुए सुश्री नीलम शिवहरे (कुसुमकसा), श्रीमती पुष्पा चौधरी (गुण्डरदेही)डी.एल.भारद्वाज रमेश कुमार अश्वार्य ,
साथ हीं संकुल केंद्र मंगलतराई के संकुल प्रभारी एवं प्राचार्य श्री गुलशन कुमार बेसेकर जी ,
संकुल समन्वयक श्री सेमन लाल नेताम जी , जिला-बालोद के बालवाड़ी कार्यक्रम समन्वयक अधिकारी श्री प्रेम नारायण वर्मा एवं तुकाराम टेकरे जी , विकासखंड अंगना में शिक्षा कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती आशा साहू जी, श्री बिप्लव बोस जी कार्यक्रम में उपस्थित हुए। श्रीमती नीलम शिवहरे एवं श्रीमती पुष्पा चौधरी जी लगभग 27 वर्षों पश्चात अपने कर्म क्षेत्र के प्रथम संस्था में पहुंचे। आगंतुक शिक्षकों का स्वागत सत्कार युवा समिति द्वारा अपने पारंपरिक वेशभूषा में किया गया। तत्पश्चात मां शारदे के श्री चरणों में पुष्प सुमन अर्पित कर एवं डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए शिक्षकों द्वारा अपने अनुभवों को क्रमशः रखा गया ।

अपने 27 साल पुराने अनुभव को रखते हुए शिक्षक शिक्षिकाएं भावुक भी हुए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बीहड़ वनांचल क्षेत्र में पोस्टिंग होने के पश्चात सारी सुविधाओं को त्याग कर यहां अपनी सेवाएं उन्होंने दी। इस दौरान उन्हें किस प्रकार की असुविधाओं चुनौतियों का सामना करना पड़ा और गांव वालों का उस समय सहयोग उन्हें मिला। जिसकी वजह से भी यहां रह पाए। दूर से आए इन शिक्षक -शिक्षिकाओं ने अपने पढ़ाए हुए बच्चों उनके परिवार एवं गांव के बुजुर्गों से मुलाकात एवं भेंट वार्ता भी की। सभी ने क्रमशः विद्यालय से जुड़े अपने अनुभवों को उपस्थित ग्रामीण जनों के बीच रखा।

सभी शिक्षकों ने किया सामूहिक नृत्य
आगंतुकों को विद्यालय परिवार की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। साथ ही युवा समिति के सदस्यों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत करते हुए अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी साय रेला रे रेला गीत में नृत्य करवाया गया। पूरा वातावरण भावुक व आनंदित रहा। साथ ही सहायक शिक्षक श्री अशोक कुमार सेन एवं विद्यालय की कक्षा चौथी की कुमारी लावण्या कोमरे का जन्म दिवस मनाया गया। इस अवसर पर न्योता भोज का आयोजन भी किया गया । कार्यक्रम के अंत में सभी ग्रामीण जनों एवं उपस्थित जनों को खीर पुड़ी का वितरण किया गया । आमंत्रित शिक्षक-शिक्षिकाओं को न्योता भोज के रूप में भोजन कराया गया। इस तरह संपूर्ण आयोजन आमंत्रित अतिथियों, विद्यालय परिवार, शाला प्रबंधन समिति ,शाला युवा विकास समिति मध्यान्ह भोजन समूह एवं ग्रामीण जनों की उपस्थिति में सफल रहा। संस्था प्रमुख ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य में आत्मीयता एवं मेल मिलाप का दायरा बहुत सीमित हो चुका है।
एक इंसान होने के नाते एवं शिक्षित होने के नाते हमें आपस मेलजोल एवं आत्मियता बनाते हुए आनंदपूर्वक अपने कार्य को करना चाहिए।
