पपेट शो, अंब्रेला डांस ,गेड़ी नृत्य सहित कई खास नवाचार होते हैं यहां
बालोद। डौंडी ब्लॉक के ग्राम सिंगनवाही के सरकारी प्राइमरी स्कूल की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। अक्टूबर 2022 में जब यहां प्रधानपाठिका के तौर पर खिलेश्वरी देवांगन ने पदभार संभाला तो लगातार यहां ऐसी गतिविधियां शुरू हुई। जिससे अब इस स्कूल को नई पहचान मिलने लगी है। नए-नए तरीकों से पढ़ाई, नवाचार और रोचक गतिविधियों ने बच्चों को भी पढ़ाई से जोड़े रखा है। बच्चों को जादुई पिटारे से रोचक तरीके से पढ़ाई से जोड़ा जाता है। जादुई पिटारे के अंतर्गत बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए रोचक सामग्री रखी गई है। जिसमें मुखौटे,कार्ड्स, पपेट्स, कागज़ के खिलौने,पासे,गणितीय खेल,पजल कार्ड आदि रखे गए हैं। खासतौर से शनिवार बैग लेस का दिन बच्चों के लिए खास होता है। देखें तो सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल यहां के प्रधान पाठिका खिलेश्वरी देवांगन करती है। जो लर्निंग विथ किड्स बाइ खिलेश्वरी देवांगन के नाम से यूट्यूब चैनल बनाकर बच्चों की हर खास गतिविधियों को अपलोड करती हैं। बच्चे घर पर रहकर भी यूट्यूब के जरिए उन गतिविधियों को दोहराकर सिखते रहते हैं। तो वही स्कूल में भी इन गतिविधियों में बच्चों के दिलचस्पी खास रहती है। शनिवार को बारिश हो जाए तो अंब्रेला डांस के जरिए व्यायाम प्रदर्शन किया जाता है। जो अपनी तरह की अलग ही गतिविधि होती है। गेड़ी नृत्य में भी बच्चों को पारंगत किया जाए ही। तो वही विभिन्न खिलौने और मोजे से पपेट तैयार कर पपेट शो के जरिए पढ़ाई को रोचक बनाने का काम यहां के प्रधानपाठिका खिलेश्वरी देवांगन ने किया है। शाला भवन की बात करें तो साफ सफाई, रंगरोगन, पेंटिंग से सुंदरता यहां निखर रही है। तो वहीं कक्षा में सुचारू रूप से बैठक व्यवस्था, बिजली, पेयजल व्यवस्था, प्रिंट रिच वातावरण से पूर्ण रूप से स्कूल सुंदर और आकर्षक नजर आता है। हरियाली भी आसपास बिखरी भी है। प्रकृति की छटा यहां देखने को मिलती है। छात्रों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एफ एल एन (फाऊंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमैरिक) यानी बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान आधारित गतिविधियां कराई जाती है। प्रधानपाठिका श्रीमती देवांगन एफएलएन के डीआरजी ग्रुप में भी शामिल है। सह शैक्षणिक गतिविधियों की बात करें तो छात्रों को पपेट्स के माध्यम से रोचक पूर्ण शिक्षा दी जाती है। अंब्रेला डांस होता है। धान व चावल से राखी व गहने बनाना सिखाया जाता है। समर कैंप का आयोजन भी यहां होता है। जिसमें जीवन उपयोगी हस्तकला सिखाई जाती है। छीन यानी जंगली खजूर से मौर बनाना, फूल पत्तियों, सब्जियों से चित्र बनाना, कागज के खिलौने बनाना, मेहंदी बनाना, झाड़ू बनाना आदि रोचक गतिविधियां यहां बच्चों को कराए जाते हैं। इन गतिविधियों को यूट्यूब पर भी अपलोड किया जाता है। प्रधानपाठिका ने यूट्यूब चैनल बनाकर शिक्षा को एक नई दिशा भी दी है। उनका कहना है कि पपेट शो का आईडिया मुझे दीक्षा एप पर एफ एल एन प्रशिक्षण से मिला था। जिसमें मुझे मोजे से पपेट बनाना बताया गया था। वही यूट्यूब में वीडियो अपलोड करने से बच्चे घर में भी वीडियो देखकर सीख सकते हैं और गतिविधियां सहेज का रखी जाती है। जिसे बच्चों को दोबारा सिखाया और दिखाया जा सके। पपेट शो से बच्चे सीखने में रुचि रहने लगे हैं और भाषाई कौशल का विकास हुआ है। एफएलएन के अंतर्गत डी कोडिंग में बच्चों को मदद मिलती है। स्कूल में लोगो ग्राफिक पठन,लर्निंग कार्नर आदि नवाचार से बच्चे रोज उत्सुकता से पढ़ाई से जुड़ते हैं।
