DAILY BALOD NEWS

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हरियाली विशेष: डॉक्टर किसान की अच्छी पहल: धान की खेती छोड़ अब बना रहे हैं बगीचा, लोगों को कर रहे पर्यावरण बचाने की अपील

धान की खेती से भूजल स्तर गिरने की समस्या को देखते हुए उन्होंने उठाया यह कदम, कई प्रजाति के फल यहां रोपे गए

बालोद। बालोद ब्लाक के ग्राम लाटाबोड़ के डॉक्टर वीरेंद्र गंजीर खेती किसानी में भी रुचि रखते हैं। उन्होंने अपने खेत में नवाचार करते हुए धान की जगह अब फलों की खेती शुरू की है। आज उनकी बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज हरियाली का त्यौहार है। छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार माने जाने वाली हरेली आज मनाया जा रहा है। इस मौके पर हम हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी यह सकारात्मक खबर प्रस्तुत कर रहे हैं। जो बदलाव की बात कहती है। डॉक्टर गंजीर के घर के पीछे ही स्थित खेतों में उन्होंने अब धान की खेती छोड़कर बगीचे का रूप दे दिया है। इस बगीचे में 13 किस्म के आम, 49 लखनवी अमरूद, चीकू, बादाम, आंवला, गरुड़, नीम ,नारियल सहित कुल 150 पौधे लगाए गए हैं और उनका पूरी तरह से संरक्षण भी किया जा रहा है। जहां अभी देश में एक पेड़ मां के नाम अभियान चल रहा है तो इस पहल में अपनी भूमिका निभाते हुए डॉक्टर वीरेंद्र ने धान की खेती छोड़कर अब फलों की खेती शुरू की है। उनका उद्देश्य विशेष तौर पर व्यापार करना भी नहीं है। वे सिर्फ लोगों को पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में आगे आने और भूजल स्तर को बचाने का एक प्रयास कर रहें। ताकि लोग सिर्फ धान की खेती पर ही निर्भर ना रहे। उन्होंने मुलाकात के दौरान बताया कि अभी उनके आधा एकड़ खेत में जो घर के पीछे है उसमें 150 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं ।जो आगे चलकर वृक्ष बनेंगे। अभी 50 पेड़ ऐसे हैं जो 10 से 12 फीट ऊपर हो चुके हैं। खेत को बगीचा बनाने का उद्देश्य पर उन्होंने कहा कि कुछ हटके करने की सोच के साथ होने ऐसा किया। बढ़ते पृथ्वी के तापमान को देखते हुए लोग कूलर एसी खरीद रहे हैं। गर्मी में हर साल तापमान बढ़ते क्रम पर है। इसी को देखकर मुझे विचार आया कि हमें भी कुछ ऐसा उपाय करना चाहिए जिससे पर्यावरण का स्थाई संरक्षण हो सके। समस्या का निदान हो सके। पेड़ ही ऐसा चीज और समाधान है जो एक बार लगा दे तो ज्यादा देख रहे की आवश्यकता नहीं होती। प्रकृति उसे खुद बढ़ाती है और कई वर्षों तक बना रहता है। पेड़ लगाना बहुत ही उचित काम है।

अन्य किसान भी आगे आए

किसानों को मैं यही संदेश देना चाहता हूं कि जो हम सोचते हैं कि बड़े पेड़ होने से धान में छांव पड़ जाएगा तो फसल ठीक नहीं होगी, ऐसा नहीं है। सूरज की धूप सभी तक पहुंचती है। इसलिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा मेड़ों में भी पेड़ लगाने चाहिए।

घर में भी हुई है पूरी तरह से गार्डनिंग

लाटाबोड़ से गुण्डरदेही जाने वाले मार्ग पर स्थित उनके निवास में भी डॉक्टर वीरेंद्र ने विशेष गार्डनिग की है। घर का बाहरी हिस्सा पूरी तरह से हरा भरा है। पेड़ पौधों और फूलों से घर की खूबसूरती देखते ही बनती है। उनके निवास के प्रथम तल में फिजियोथेरेपी सेंटर भी चलता है। इलाज कराने आने वाले लोग पेड़ की छांव में सुकून भरा समय गुजारते हैं। प्रत्येक मरीज और परिजन को भी वे इसी तरह अपने आसपास पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करते हैं।

पौधारोपण में इनका रहा योगदान

खेत को बगीचे में तब्दील करने में मुख्य भूमिका डॉक्टर वीरेंद्र गंजीर के पिता रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गुरुर बीआर गंजीर निभा रहे हैं। साथ ही पौधारोपण में प्रमुख रूप से पूर्व जनपद सदस्य सरोज साहू, कल्याणी साहू, इंजीनियर कुशल साहू, डॉक्टर वीरेंद्र गंजीर, रमऊ राम आदि मौजूद रहे।

देखिए वीडियो

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