बालोद/गुरुर। टॉप टेन में जगह बनाने वाले कुछ बच्चों और उनके पालकों से हमने बातचीत की और उनके इस मुकाम के पीछे की मेहनत के बारे में जानने का प्रयास किया। तो इस तरह की बातें सामने आई ।

दसवीं में टॉप टेन में चौथे स्थान पर आने वाले प्रियदर्शनी पब्लिक स्कूल अर्जुंदा के छात्र राहुल गंजीर के पिता लेख राम ने बताया कि राहुल जेईई की कोचिंग करने के लिए भिलाई चला गया है।

उनके दो बेटे हैं और एक बेटी है। राहुल ने दसवीं में कोई कोचिंग नहीं की। सेल्फ स्टडी से ही उन्होंने पढ़ाई की। लेख राम स्वयं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गब्दी में शिक्षक हैं । तो उनकी पत्नी गुणेश्वरी बघमरा गुण्डरदेही प्राइमरी स्कूल में भी शिक्षक हैं। माता-पिता के शिक्षक होने से शुरू से ही पढ़ाई में राहुल का ध्यान रहा और एक पारिवारिक माहौल मिला। आगे चलकर राहुल आईआईटी के क्षेत्र में जाना चाहता है।
रितिक ने बनाया था मोबाइल को पढ़ाई का जरिया

डुंडेरा के रहने वाले रितिक देवांगन ने भी अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने की कोशिश में मेहनत की। किसान के बेटे ने कमाल किया और टॉप टेन में जगह बनाई। स्कूल से आकर वह होमवर्क पूरा करने पर ध्यान देता था। फिर मोबाइल से वह ऑनलाइन लेक्चर देखकर पढ़ाई भी करता था। इससे उसने अपनी पढ़ाई को और बेहतर किया ।
मर्चेंट नेवी में जाना चाहती है हेमप्रज्ञा साहू

टॉप 10 में आने वाली अर्जुंदा की स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल दसवीं की छात्रा हेमप्रज्ञा साहू पिता टीकाराम साहू ने बताया कि उनका सपना मर्चेंट नेवी में जाने का है। उनके पिता कोटगांव स्कूल में लाइब्रेरियन है। उन्होंने कहा कि उन्हें उनके सभी टीचर्स का पूरा सपोर्ट मिला। साथ ही उनके मामा गिरीश साहू जो डॉक्टर है उनसे काफी प्रेरणा मिली ।जो काफी मेहनती है।

रोज वह घर पर होमवर्क करने के साथ-साथ 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती थी। उनकी माता वेदमती साहू दूसरों को सिलाई सिखाती है ।उन्हें यूट्यूब पर कार्टून देखना पसंद है फिल्मों से वह दूर रहती है ।
गरीब किसान का बेटा खोमेंद्र बनना चाहता है कलेक्टर

दसवीं बोर्ड परीक्षा के एग्जाम में गुरुर ब्लॉक के छात्र-छात्राओं ने अपना कमाल दिखाया है। गरीब परिवार के बच्चों ने अपना और अपने पूरे परिवार सहित शाला परिवार का नाम रोशन किया है। ब्लॉक में इस बार दसवीं बोर्ड में तीन टॉपर निकल कर सामने आए हैं। जिसमें एक है टॉप फाइव में स्थान बनाने वाली पद्मिनी शांडिल्य निवासी उसरवारा, पांचवे स्थान पर ही आने वाली जिज्ञासा पिता जितेश कुमार निवासी ग्राम धनेली और आठववे स्थान पर आने वाले छात्र हैं खोमेंद्र कुमार पिता रेख राम साहू निवासी भानपुरी। टॉप 10 में आने वाले बच्चे और पालकों से हमने बातचीत कर उनके सफलता का राज जानना चाहा। इसके लिए हमने कुछ बच्चों के परिवार जनों से मुलाकात भी की। गुरुर ब्लॉक के ग्राम भानपुरी के दसवीं टॉप टेन में आने वाले खोमेंद्र पिता रेख राम साहू गरीब परिवार किसान का बेटा है ।उनके पिता दो भाई हैं। संयुक्त परिवार के रूप में रहते हैं । खोमेंद्र का सपना कलेक्टर बनने का है। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में शिक्षा की उतनी अच्छी सुविधा नहीं है। कोचिंग की भी सुविधा नहीं है। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक मोबाइल से ही वह अपने भाई जो 11वीं कक्षा में हैं और स्वयं दोनों पढ़ाई किया करते थे। थोड़ा बहुत क्रिकेट का भी शौक है। शिक्षक जो क्लास में समझाते थे उसे गंभीरता से लेते थे। साथ ही एक्स्ट्रा क्लास लेकर भी उन्होंने पढ़ाई को मजबूत किया ताकि और बेहतर प्रदर्शन कर सके और उनकी मेहनत आखिर रंग लाई।
3 साल पहले उठ चुका पद्मिनी के सिर से पिता का साया, मां ने मजदूरी कर पढ़ाया

गुरुर ब्लॉक के ही ग्राम उसरवारा की रहने वाली पद्मिनी शांडिल्य जो की फागुनदाह हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करती है, ने दसवीं टॉप टेन में जगह बनाई है। पद्मिनी का जीवन संघर्षमय है। वह इसलिए क्योंकि 3 साल पहले ही उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है । पिता भूपेंद्र शांडिल्य के निधन के बाद उनकी माता प्रतिभा शांडिल्य ने ही उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। घर में कोई जमीन जायजाद नहीं है। सिर्फ मजदूरी के भरोसे उनकी माता ने मेहनत करके परिवार चलाया और बेटी को पढ़ाया। आज बेटी ने उनका नाम रोशन कर दिया। स्कूल के साथ-साथ घर पर वह 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। पद्मिनी कहती है सभी शिक्षकों का उन्हें पूरा साथ और मार्गदर्शन मिला।

उन्हें खो-खो खेलना पसंद है। वह प्रेरणा स्रोत अपनी मम्मी प्रतिभा को ही मानती है। पद्मिनी कहती है मेरी मां बहुत मेहनती है ।मेहनत से कभी कतराती नहीं है और उसी से मुझे पढ़ाई करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान आसपास काफी शोर होता था तो घर पर दादी की तबीयत भी अक्सर खराब रहती थी। ऐसे में मां को भी बहुत परेशानी होती थी। उनका घर के काम में हाथ बटाने के साथ-साथ मैं पढ़ाई करती थी। हम दो बहन हैं बड़ी बहन का नाम गीतांजलि है ।आगे चलकर वह सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती है। उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की। सेल्फ स्टडी और शिक्षकों के मार्गदर्शन में उन्होंने पढ़ाई की। वह दूसरे बच्चों को भी अच्छे से पढ़ाई करने और अपने मां-बाप का नाम रोशन करने की सीख देती हैं। कहती है कि चुनौतियों से कभी घबराना नहीं चाहिए बल्कि उनका डटकर सामना करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने जताई खुशी

हाईस्कूल/हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा 2024 , कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं में उत्तीर्ण सभी विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बालोद की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। दोनों कक्षाओं के राज्य टापर्स को उनके विशेष उपलब्धि के लिए विशेष शुभकामनाएं दी गई। जिला अध्यक्ष दिलीप साहू ने कहा 12 वीं के प्रवीण्य सूची में जिले से 1 विद्यार्थी व 10 वी के प्रवीण्य सूची में जिले के 11 विद्यार्थियों ने स्थान बनाया है। सभी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को एवं उनके शाला परिवार को हार्दिक बधाई देते है। पद्मनी साहू निवासी उसरवारा ने कक्षा 10 वी मे छत्तीसगढ़ से टॉप 5 रैंक,588 अंक (98%)एवं बालोद जिला मे टॉप 2 रैंक प्राप्त कर गुरुर ब्लॉक और जिले का मान बढ़ाया है।
हर्षवती ने कला संकाय से पढ़ाई कर की कमाल

झलमला की हर्षवती ने टॉप 5 में आने के बाद कहा कि अब सिविल सर्विसेस में जाने की तैयारी कर रही है। बालोद जिले के झलमला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली हर्षवती साहू ने 12 वी की कक्षा में टॉप 10 में स्थान बनाया है उसकी इस कामयाबी से विद्यालय और परिजन काफी खुश हैं, झलमला विद्यालय ने अपना रिकॉर्ड बरकरार रखा है आपको बता दें कि हर्षवती साहू आर्ट्स यानी कला संकाय की स्टूडेंट हैं और वो आगे शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहती है, वहीं हर्षवती ने बताया कि मेहनत करते हैं तो सफलता जरूर मिलती है। बिना मेहनत के सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। कला संकाय का होने के बावजूद बालोद जिले से अकेले 12वीं में उसने टॉप टेन में जगह बनाई है। बेटी की इस सफलता से पूरा परिवार खुश है। उनके पिता किरण साहू कृषि मजदूरी का काम करते हैं।

वे कहने लगे आज मेरे सारे मेहनत का प्रतिफल मिला है।

इस सफलता के बाद बधाई देने तांता लगा हुआ है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई होती है बेहतर, साबित किया डॉली ने

इसी तरह बालोद के स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय में पढ़ने वाली डॉली साहू ने दसवीं में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया है। गणित में 100 में से 100 अंक लेकर उत्तीर्ण हुई है। वह भी आगे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है आगे गणित विषय लेकर वह पढ़ाई करेगी। पिता ने कहा कि बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं रखना चाहिए और शासकीय स्कूलों के प्रति लोगों का विश्वास हमेशा बरकरार रहना चाहिए। आज मेरी सभी बेटियां शासकीय स्कूलों में पढ़ती है। पिता पुषण साहू व्याख्याता के पद पदस्थ हैं। डॉली ने बताया कि हमेशा उनके माता पिता ने उनका प्रोत्साहन किया है और मैंने उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास किया है। मैं अपने शिक्षकों माता पिता का धन्यवाद ज्ञापित करती हूं के मुझे इस काबिल उन्होंने बनाया। डॉली साहू ने बताया कि दिन में तीन से चार घंटे ही पढ़ाई करती थी।
