जैविक खेती के बदौलत पा चुके कई राष्ट्रीय अवार्ड, दूसरे किसानों के लिए भी बने प्रेरणा स्रोत
बालोद/गुरुर. दीपक देवदास की विशेष रिपोर्ट….। 23 दिसंबर को भारत देश में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस किसानों के योगदान और देश के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास के महत्व को समझने के लिए और नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

किसान दिवस हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती 23 दिसंबर के रूप में भी मनाया जाता है। जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब कुछ साल पहले कोरोना के दौर में मौत का तांडव चल रहा था तो डॉक्टर्स की जुबान पर भी ये बात होती थी कि जिनकी इम्युनिटी पावर यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी वही बच पाएंगे और यह क्षमता तभी आ पाएगी जब हम अच्छा खाद्यान्न लेंगे और किसान ही खाद्यान्न उगाते हैं। यह कोई फैक्ट्री से नहीं, खेत से मिलेगा। किसानों का महत्व आज के दौर में काफी बढ़ चुका है। इस किसान दिवस पर हम गुरुर ब्लॉक के ग्राम अरकार के एक ऐसे किसान से आपका परिचय कराने जा रहे हैं जिनका नजरिया एक आम किसान की तरह नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। इनके वैज्ञानिकता भरे कार्यों के चलते इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई अवार्ड भी मिल चुके हैं। खास बात यह है कि वे खुद शोध करके ऐसे चावल बना चुके हैं जिससे डायबिटीज को भी मात दी जा सकती है। साथ ही सूजन की समस्या से परेशान लोगों को भी राहत मिल सकती है। संजय प्रकाश चौधरी जो जैविक खेती के नाम से पूरे बालोद जिला ही नहीं बल्कि राज्य में एक रोल मॉडल के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने एक धान का इजाद किया है। जिन्हें उन्होंने मैजिक राइस नाम दिया है। जो एंटी डायबिटीज है। इसी तरह एक दूसरा धान इंद्रभेष दुबराज इजाद किया है। जो लोगों को हर तरह के संक्रमण से बचाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। जिसमें जिंक और आयरन की मात्रा भरपूर है। खास बात यह है कि उनके इस धान को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा ब्रीडिंग के कार्यक्रम में भी शामिल किया गया है। यह एक किसान के लिए गर्व की बात होती है कि किसी अनुसंधान संस्थान द्वारा किसान द्वारा शोध किए किसी धान की किस्म को अपने ब्रीडिंग में शामिल किया जाता है। मैजिक राइस सहित इंद्रभेष दुबराज दोनो की डिमांड आज लोगों के बीच काफी बढ़ चुकी है। इस धान में जिंक और आयरन बैलेंस मात्रा में पाए जाते हैं। जिसकी पुष्टि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने भी की है। संजय प्रकाश चौधरी का मानना है कि सभी किसानों को जैविक खेती की ओर लौटना चाहिए। ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक और मजबूत बनी रहे। आज भले ही हम किसी बीमारी से बचने के लिए कैप्सूल, गोली, इंजेक्शन का सहारा लेते हैं। यह हमारे तात्कालिक उपाय हो सकते हैं ।लेकिन आगे चलकर उनके विकार हमारे शरीर में देखने को मिलेंगे। इसलिए खान-पान में जरा भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए और प्राकृतिक चीजों से जुड़े रहना चाहिए। तात्कालिक जंक फूड सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं और हमारे पाचन तंत्र पर असर पड़ता है। आज अधिकतर लोगों को डायबिटीज यानी मधुमेह, सूजन आदि की समस्या रहती है। जो खान-पान में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है।
अरकार गांव बन रहा एग्री टूरिज्म सेंटर
संजय प्रकाश चौधरी के कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों के चलते अन्य किसान भी प्रभावित हो रहे हैं और बालोद जिले सहित दूसरे जिले के किसान और विशेषज्ञों का दल उनके गांव में खेती किसानी देखने के लिए और सीखने के लिए आते हैं। एक तरह से अरकार इन दिनों एग्री टूरिज्म बनता जा रहा है।उनसे प्रेरणा लेकर अन्य किसान भी अब जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इसी का परिणाम था कि विगत वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर उनके ही एक अनुज साथी किसान विरेंद्र साहू ग्राम बेलौदी मगरलोड को कृषि कर्मण राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है।
जैविक खाद और किट नियंत्रकों का करते इस्तेमाल
संजय प्रकाश चौधरी के खेतों और बाड़ी में ली जाने वाली फसलें पूरी तरह से जैविक प्राकृतिक होती है। खेत के मेड़ पर नीम,करण, अर्जुन के पेड़ लगाए गए हैं। जिनकी पत्ती और छाल से फसल सुरक्षा किट नियंत्रक आदि तैयार किए जाते हैं। साथ ही गोमूत्र, बेसन, गुड़, गोबर आदि से भी वे खाद तैयार करते हैं। जिसमें पोषक तत्वों की भरपूर्ता होती है। हरी खाद, दलहन, सनई, ठेंचा, तीली, सरसों, धनिया के जरिए भी प्राकृतिक खाद बनाते हैं। जब उक्त पौधों में फल आने की स्थिति होती है तो उन पौधों को मिट्टी में मिला दिया जाता है जो कि धान के लिए पूरा पोषण का कार्य करते हैं। 2018-19 में उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा भारत सरकार का प्रतिष्ठा पूर्ण राष्ट्रीय अवार्ड प्लांट जीनोम सेवियर अवार्ड यानी गुणवत्ता युक्त खाद्यान्न उत्पादन एवं संरक्षण के लिए अवार्ड प्राप्त हो चुका है।
वैज्ञानिकों ने भी किया प्रमाणित
संजय प्रकाश चौधरी दुर्लभ किस्म के इंद्रभेष दुबराज धान का संरक्षण कर रहे हैं। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में परिक्षण में उक्त धान में 30 पीपीएम जिंक एवं 22 पीपीएम आयरन की मात्रा पाई गई है। उक्त धान की किस्म अच्छी गुणवत्ता होने की वजह से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने भी उसे ब्रीडिंग प्रोग्राम में शामिल किया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक शर्मा का भी मानना है कि संजय प्रकाश ने देसी प्रजातियों के अनेक किस्मों के बीज संकलित कर रखे हैं। उनके इंद्रभेष दुबराज में काफी मात्रा में जिंक और आयरन होने की वजह से काफी गुणवत्ता युक्त है।
गेहूं, मूंग, हल्दी, मिर्च आदि के बीज भी किए हैं सुरक्षित
संजय प्रकाश चौधरी ने धान के 11 किस्म के अलावा अरकार मूंग, आमटी मूंग, गेहूं और हल्दी के भी पूर्वजों के समय के ऐसी प्रजातियों को सुरक्षित कर रखें हैं, जिनका उत्पादन भले ही सामान्य है। मगर गुणवत्ता काफी अधिक है। उन्हें इसके संरक्षण के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पादप जीनोम संरक्षक कृषक पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है ।इसके अलावा खूबचंद बघेल राज्य अलंकरण से भी सम्मानित हो चुके हैं। गांव में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए भी उनका विशेष प्रयास सराहनीय है। जिसके जरिए उन्होंने गांव के कई सूखे बोर में वाटर रिचार्ज करने की पहल विगत वर्षों में किया है।
क्या कहते हैं किसान संजय प्रकाश चौधरी
किसान ने बताया मेरे द्वारा धान के जो दो किस्म इजाद की गई है। उन्हें मैने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में रजिस्टर्ड करवा लिया है। अब यह किस्म सिर्फ मेरे पास ही मिल सकता है। इंद्रभेष दुबराज में जिंक और आयरन की मात्रा बहुत ज्यादा और बैलेंसिंग रूप में है। जो सभी प्रकार के वायरस, संक्रमण से बचाने की पूरी क्षमता रखती है। दूसरा हमने एक मैजिक राइस बनाया है जिसमें एंटी डायबिटीज प्रॉपर्टी यानी मधुमेह खत्म करने की शक्ति है। उसमें गामा साइटो स्ट्रॉल तत्व है। जो हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उपरोक्त चावल सिर्फ मेरे पास है। इसका विशेष गुण ये भी है कि ये बीज ऐसे जमीन जिसमें मैं बोता हूं उसी में आ सकता है। इसका कारण यह है निरंतर सालों साल से उसमें देसी गाय कोसली नस्ल का गोबर और गोमूत्र में बेसन और गुड़ मक्खन मिलाकर खाद बनाता हूं। यह गाय चलने और चरने वाली है। इसके लिए हमने अलग से चारागन बनाया है। जिसमें औषधि गुण युक्त घास है। जब गाय उसे चरती है तो उसके गोबर और गोमूत्र में भी औषधि गुण आता है। और वही गुण खेतों के जरिए फसल में आता है और वही गाय जब दूध देती है तो दूध में भी औषधि गुण होता है। दूध से बने पदार्थ दूध, दही, घी यह भी औषधि युक्त हैं। यह भी हमारी उपलब्धि है। हम प्राकृतिक रूप से जैविक खेती करते हैं।
खेती से विमुख हो रहे युवाओं को जोड़ रहे वापस खेती से
उनसे प्रेरणा लेकर ऐसे युवा जो कृषि कार्य से विमुख होकर शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं उन्हें अद्भुत क्षमता और व्यवहार से खेती में जोड़ रहे ।उन्हें उन्नत खेती की ओर आगे बढ़ा रहे हैं। कुछ तो राष्ट्रीय स्तर तक भी अवार्ड ले चुके हैं। जिसमें बेलौदी मगरलोड के वीरेंद्र साहू भी उनमें से एक है जो कि उनके शिष्य हैं। संजय ने कहा ऐसे और कई शिष्य हैं जो हमसे प्रेरणा लेकर सीख रहे हैं। वे स्वयं के खर्चे से अपने खेत में कैंप लगाते हैं। जिसमें युवाओं को आमंत्रित कर खेती से जोड़ते हैं। यह महा अभियान विगत 25 साल से निरंतर जारी है। अपने 135 एकड़ में वे खेती करते है। बड़ी बात ये है कि 40 एकड़ खेत में चरांगन बनाया गया है। जैविक खेती करना है तो गाय पालन जरूरी है। फसल सुरक्षा के लिए हमने नीम, करंज कहुआ के पेड़ लगाए हैं। यह तीनों ऐसे महा औषधि हैं जिनका आयुर्वेद में बहुत उल्लेख है। तीनों के निरंतर प्रयोग और उपयोग से मैं फसल सुरक्षा और उत्पादन करता हूं। इसके गुणधर्म भी अनाज में आते हैं।
