बालोद। बालोद जिले में हो रही अवैधानिक तरीके से पशुओं के व्यापार पर रोकथाम लगाने और गौ माताओं के संरक्षण के उद्देश्य से बजरंग दल ने उपसंचालक कार्यालय पशु चिकित्सालय विभाग बालोद में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी है। जिला संयोजक उमेश सेन ने दो बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।

जिला संयोजक श्री सेन ने लिखित आवेदन देकर जानकारी मांगते हुए कहा है कि बालोद जिले में पशु व्यापारी कितने हैं, कितने लाइसेंस दिया गया है और किन-किन को, नाम पते सहित जानकारी दी जाए। पशु व्यापारियों द्वारा कितने पशु खरीद सकते हैं। पैदल कितनी दूरी तक ले जा सकते हैं। आने जाने के दौरान उनके चारे की क्या व्यवस्था होती है। सभी नियमों की जानकारी विस्तार से दी जाए।
पशु क्रूरता अधिनियम के तहत होनी चाहिए कार्रवाई
उमेश सेन ने कहा कि जो भी बिना किसी लाइसेंस के पशु खरीदी बिक्री का कारोबार कर तस्करी को अंजाम देते हैं ऐसे लोगों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए ।तो वहीं अगर लाइसेंस धारी भी नियमों का अनदेखी करते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि मवेशियों की वैध खरीदी बिक्री हो, उनकी किसी तरह से तस्करी ना हो।
क्या है पशु क्रूरता निवारण अधिनियम
भारत में पशुओं के खिलाफ क्रूरता को रोकने के लिए साल 1960 में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम लाया गया था। साथ ही इस ऐक्ट की धारा-4 के तहत साल 1962 में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का गठन किया गया। इस अधिनियम का उद्देश्य पशुओं को अनावश्यक सजा या जानवरों के उत्पीड़न की प्रवृत्ति को रोकना है। मामले को लेकर कई तरह के प्रावधान इस ऐक्ट में शामिल हैं। जैसे, अगर कोई पशु मालिक अपने पालतू जानवर को आवारा छोड़ देता है, या उसका इलाज नहीं कराता, भूखा-प्यासा रखता है तब ऐसा व्यक्ति पशु क्रूरता का अपराधी होगा।
क्या है सजा
इसके अलावा अगर कोई किसी पशु को मनोरंजन के लिए अपने पास रखता है और उसके साथ क्रूरता का व्यवहार करता है तो वह भी अपराध है। ये सभी संज्ञेय और जमानती अपराध होते हैं, जिनकी सुनवाई कोई भी मैजिस्ट्रेट कर सकता है। ऐसे अपराधों के लिए कम से कम 10 रुपये से लेकर 2 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है।
