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Mother’s Day Special : कभी ये बालोद जिले की युवराज सिंह बन जाती हैं तो कभी सुष्मिता सेन: पढ़िए एक कुंवारी मां की कहानी

“सुश्री एनुका शार्वा” एक ऐसी मां जिन्होंने शादी नहीं की पर दो प्यारी बेटियों की मां है!

बालोद। डौंडीलोहारा की रहने वाली सुश्री एनुका शार्वा दत्तक पुत्री अधिग्रण द्वारा अधिरा शार्वा और अद्रिजा शार्वा की मां है। उनका यह कदम बालोद जिले के साथ-साथ हमें लगता है कि छत्तीसगढ़ में पहला ऐसा केस होगा। जिसमें बिना शादी के वह मां बनी है। परंतु जीवन के संघर्ष उनका पीछा ही नही छोड़ रहे!
कोरोना काल में उनकी मां का साथ छूट गया, बच्चों का संपूर्ण लालन पालन वह स्वयं करती है। सुश्री शार्वा अनुभव साझा करती है कि हर महिला के अंदर दया करुणा प्रेम का वास होता है, मां बच्चे की पहली शिक्षिका होती है।

सुश्री शार्वा बताती है कि इस निर्णय में उनके पिता श्री सियाराम शार्वा (तहसील अध्यक्ष पेंशन समाज), और उनके भाइयों का विशेस योगदान रहा। इस पहल पर चर्चा करते हुए, वह बताती है कि मैने कोई नया कार्य नही किया, जैसकि हमारे पौराणिक ग्रंथों के पात्र ही हमारे आदर्श है, श्री कृष्ण जी की माता देवकी और यशोदा जी रहें, मैंने भी ऐसा मार्ग चुना है।
अधिरा और अद्रिजा को लेकर शार्वा बताती है, कि ये मेरा सौभाग्य बच्चे मुझ आसानी से स्वीकार किया।बच्चे सिर्फ,खाना, पानी,और सोने के लिए ही बस रोते हैं।

27 अप्रैल को बच्चों की फाइनल हियरिंग हुई, जिसमें जिलाधीश मयूरभंज द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

सुश्री शार्वा समाज और व्यक्तिगत जीवन के प्रति सभी दायित्वों का निर्वहन करने के लिए समय का प्रबंध होना चाहिए कहती हैं। सभी के लिए सुश्री शार्वा का संदेश है जीवन में जो कर सकते हो वही निर्णय लेना चाहिए और उस निर्णय को सार्थकता प्रदान करनी चाहिए।

पारंपरिक समाज के ताने बाने को छोड़कर अनोखे निर्णय को लेकर सुश्री शार्वा कहती हैं,

  1. मेरा निर्णय अन्य लोगों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।.कई दंपती जो वर्तमान में अभिभावक नही बन पा रहे,क्योंकि वर्तमान में लोग देरी से शादी कर रहे हैं बच्चों के लिए कई समस्याएं हो रही है और उनके निर्णय से वह चाहती हैं कि ऐसे कई परिवार जो 10 साल 15 साल इलाज करवाते हैं और फिर अपने शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं इस तरीके की निर्णय लेकर जीवन के सुख का आनंद ले सकते हैं।
  2. वंशवाद जैसी मानसिकता से लोग ऊपर उठेंगे।
  3. और पढ़े लिखे सभ्य समाज दत्तक पुत्र ग्रहण से परिवार सुख अनुभव करेंगे। शार्वा कहती हैं कि जीवन में सभी लड़कियों को एक बार जरूर मातृत्व सुख का लाभ लेना चाहिए। यह अनुभव अद्भुत होते हैं। मैंने मातृत्व सुख का अनुभव और आनंद लेना चाहा और मुझे यह प्राप्त हो रहा है।

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