बालोद। जिले में एक आदिवासी महिला के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आरोप है कि इस गंभीर घटना को गांव स्तर पर ही अर्थदंड लेकर दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कुछ दिन बाद पीड़िता थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगाने लगी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार थाना बालोद क्षेत्र की रहने वाली एक आदिवासी महिला ने लिखित शिकायत में बताया कि 22 फरवरी 2026 की रात एक गांव के रहने वाले विकास , रोशन और कमल उसे जबरन अपने साथ ले गए। आरोप है कि रात लगभग 9 बजे से लेकर देर रात तक उसके साथ जबरदस्ती की गई। इस दौरान आरोपियों ने उसके साथ मारपीट भी की और किसी को बताने पर जान से मारने व बदनाम करने की धमकी दी।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि घटना के बाद गांव स्तर पर इसे दबाने की कोशिश की गई। आरोपियों द्वारा ग्राम विकास समिति के सामने घटना स्वीकार करने और अर्थदंड देने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसी आधार पर मामले को गांव में ही रफा-दफा करने की कोशिश की गई थी।
हालांकि पीड़िता ने बाद में अपना मन बदलते हुए पुलिस के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना बालोद में अपराध क्रमांक 107/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 87, 70(1) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के निर्देशन तथा एसडीओपी बोनीफॉस एक्का के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी विकास (26 वर्ष) और कमल (23 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। तीसरे आरोपी की तलाश जारी बताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गंभीर अपराधों को गांव की बैठकों और अर्थदंड के जरिए दबाने की परंपरा आज भी जारी है? अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां सामाजिक दबाव या समझौते के नाम पर पीड़ितों को न्याय से दूर रखा जाता है।
ग्राम स्तर पर मामला दबाने को लेकर जिम्मेदारों की चुप्पी
जानकारी के अनुसार यह गंभीर मामला पहले गांव स्तर पर ही सुलझाने की कोशिश की गई थी, जहां कथित तौर पर आरोपियों से अर्थदंड लेकर समझौता कराया गया। बाद में मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई। इस मामले को लेकर जब ग्राम विकास समिति से जुड़े लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बचते हुए कहा कि “जो होगा देखा जाएगा।” वहीं गांव के कुछ ग्रामीणों का कहना है कि महिला के साथ घटना को लेकर गांव में पहले से ही तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
सूत्रों के अनुसार महिला द्वारा पहले गांव में आवेदन देकर मामले के निपटारे की मांग की गई थी। बताया जा रहा है कि गांव की बैठक में प्रति आरोपियों से करीब 30 से 40 हजार रुपए तक अर्थदंड लिया गया और महिला को भी कुछ हजार रुपए बतौर मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद मामला शांत माना जा रहा था।
हालांकि बाद में महिला ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
ग्राम विकास समिति से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि यदि मामला थाने में ही ले जाना था तो गांव में समाधान के लिए आवेदन नहीं दिया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि गांव के कुछ प्रमुख लोगों ने युवकों का भविष्य खराब न हो, इस सोच के साथ सर्वसम्मति से अर्थदंड लेकर मामला सुलझाने की कोशिश की थी।
फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गंभीर अपराधों को गांव की बैठकों में समझौते और अर्थदंड के जरिए दबाने की कोशिश की जाती है? वहीं अब यह मामला कानून के दायरे में पहुंचने के बाद आगे की कार्रवाई जारी है। वहीं महिला द्वारा गांव स्तर पर मामला निराकृत करवाने के बाद थाने जाने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। इधर आरोपियों के बाद अगर कोई भी आंच ग्राम विकास समिति पर आती है तो ग्रामीण महिला के खिलाफ कड़ा निर्णय लेने की तैयारी भी कर रहें हैं। ग्राम विकास समिति के लोगों का कहना है कि महिला का गांव में व्यवहार कैसा है सभी जानते हैं। हर सिक्के के दो पहलू हैं इस नजरिया से सब इस घटना को भली-भांति समझ रहे हैं।
