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बीजेपी पार्षदों से ज्यादा मेलजोल पड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष टिकेश्वरी को भारी, कांग्रेस ने किया निलंबित, पढ़िए पूरी कहानी

लगातार पार्टी विरोधी गतिविधि के चलते गुरुर नगर पंचायत अध्यक्ष टिकेश्वरी साहू कांग्रेस से निलंबित

बालोद/गुरुर। विगत कुछ महीने से कांग्रेस से चुनकर आई टिकेश्वरी साहू के द्वारा लगातार पार्टी विरोधी कार्यों के सक्रियता के चलते उन्हें कांग्रेस से निष्कासित यानी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। भाजपा पार्षदों से ज्यादा मेल जोल उन्हें महंगा पड़ा है। लगातार इस संबंध में उनकी शिकायत थी कि वह अपने ही समर्थित यानी कांग्रेस पार्षदों को नगर पंचायत में दरकिनार कर भाजपा के पार्षदों को ज्यादा महत्व दे रही है यहां तक कि उन्हें पीआईसी तक के मेंबर में भी शामिल की थी। जिसके बाद से मामला बिगड़ा हुआ था। निलंबन के संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी से संगठन प्रभारी महामंत्री अमरजीत चावला द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया है। जिस तरह से लगातार टिकेश्वरी साहू द्वारा कांग्रेस और संगठन को गुरुर में दरकिनार कर कार्य किया जा रहा था उससे इस बात का पूरा अंदेशा था कि वह कांग्रेस में ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएंगे और अंततः हुआ भी वही। निलंबन आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उन पर यह कार्यवाही की जा रही है। आरोप है कि कांग्रेस समर्थन में नगर पंचायत का चुनाव जीतने के बाद भी उनका बीजेपी के लोगों यानी उनके पार्षदों से मेलजोल ज्यादा था। वे लगातार कांग्रेस पार्षदों की अवहेलना और अपनी मनमानी कर रही थी। कुछ कांग्रेस पार्षदों के साथ अभद्रता किए जाने का मामला भी सामने आ चुका है।


हद तो तब हुई थी जब उन्होंने कांग्रेस के पार्षदों की उपेक्षा कर बीजेपी के पार्षदों को पीआईसी मेंबर बनाया था। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ लोगों ने उन्हें काफी समझाया लेकिन वह सभी की समझाइश को नजर अंदाज करती रही । अपने अड़ियल रवैय्ये में अड़ी रही। संगठन ने बार बार समझाया। लेकिन उनकी अनुशासन हीनता बढ़ते जा रही थी । उन्हें नोटिस तक जारी किया गया था। लेकिन संतोषजनक जवाब नही आया, ना स्वयं मौजूद होकर जवाब दी। संगठन के लोगों को महत्व नहीं देती थी । बार-बार समझाने के बाद भी बात नही मानने पर गुरुर ब्लॉक कांग्रेस ने निष्कासन के लिए अनुसंशा पत्र प्रदेश कांग्रेस को भेजा गया था। जिसे स्वीकार कर लिया गया। और अब आदेश जारी हो गया।

विधायक संगीता के कुशल रणनीति में जीती थी चुनाव

खास बात ये है कि नगर पंचायत में बीजेपी के आठ और कांग्रेस से सात पार्षद थे। इस कांटे की टक्कर के बावजूद विधायक संगीता सिन्हा के कुशल रणनीति के चलते वह अध्यक्ष बनने में कामयाब हुई थी। चुनाव जीतने के बाद टिकेश्वरी का कांग्रेस के प्रति नजरिया बदलने लगा और वह अपने लोगों से दूर होकर विरोधी पार्टी के पार्षदों को महत्व देने लगी थी।

जिसकी शिकायत लगातार प्राप्त हो रही थी। उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक आ चुका था। हालांकि कोर्ट कचहरी के जरिए स्टे लाने में भी कामयाब हुई थी। गुरुर नगर पंचायत अक्सर राजनीति का अखाड़ा बना हुआ था। अब कांग्रेस से टिकेश्वरी के निष्कासन के बाद गुरुर की राजनीति में नया मोड़ क्या आएगा यह देखने वाली बात होगी।

बीजेपी से मेलजोल करने वाले रहे सावधान

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष तामेश्वर साहू ने कहा पार्टी विरोधी गतिविधियों में टिकेश्वरी की शिकायत लगातार थी। संगठन ने उचित कार्रवाई करते हुए समझाइश दिया था पर उनका रवैय्या अड़ियल रहा। संगठन को कुछ नही समझी। इसलिए कार्रवाई की गई। ऐसे कोई भी नेता जो बीजेपी के साथ सांठगांठ कर रहे हैं वे भी ऐसी कार्रवाई के लिए सावधान रहें।

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