रसोइयों की हडताल का असर- डीईओ का आदेश दरकिनार, समूहों ने नही दिया ध्यान, आधे से ज्यादा स्कूलों में नहीं पका भोजन, बच्चों ने भूखे रह की पढ़ाई



समूह वाले कहने लगे 50 रुपए में तैयार नहीं होते पकाने को मजदूर, खेती किसानी में मिल जाता है 150 रुपए

बालोद। स्कूलों में मध्यान्ह भोजन को लेकर समस्या बढ़ती चली जा रही है। रसोइए 12 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जिसके बाद शिक्षा विभाग के अफसरों ने भोजन की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह पर डाली है। तो वहीं शिक्षकों को खाना पकाने से मना किया गया है। शुरुआत में कई जगह शिक्षक किचन संभाल रहे थे लेकिन इससे बच्चों की प्रभावित होती पढ़ाई को देखते हुए डीईओ प्रवास बघेल ने स्पष्ट आदेश दिया कि भोजन पकाने की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की है। रसोईया नहीं आ रहे हैं तो भोजन स्व सहायता समूह वालों को ही पकाना है। शिक्षकों को इससे दूर रहने की नसीहत दी गई है। ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो। इधर 12 जुलाई से शुरू हो गई रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से व्यवस्था मानो लड़खड़ा गई है। आधे से ज्यादा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन नहीं बन पाया। स्वयं जब शिक्षा विभाग के अफसर स्कूलों का जायजा लेने के लिए पहुंचे तो भोजन नहीं बना पाया गया। बालोद ब्लॉक के कई स्कूलों में बच्चों को भूखे पेट रहकर पढ़ाई करनी पड़ी। जिन बच्चों के घर नजदीक थे वे दोपहर में खाना छुट्टी के समय अपने घर जाकर खाना खाकर लौटे तो कई बच्चों के माता-पिता काम पर गए थे तो उन्हें भूखे पेट रहकर स्कूल में शाम तक पढ़ाई करनी पड़ी। रसोइयों को प्रतिदिन 50 रुपए के हिसाब से मानदेय मिल रहा था। स्व सहायता समूह के लोगों का कहना है कि वैकल्पिक रूप से रसोईया तो मिल जाएगा लेकिन 50 रुपए में कोई खाना बनाने को तैयार नहीं होता है। अस्थाई मजदूर या रसोइए 150 रुपए की मांग करते हैं। क्योंकि गांव तरफ ही खेती किसानी में डेढ़ सौ रुपए 1 दिन का मिल जाता है। पर जहां शासन से रसोइयों को 50 के हिसाब से 1500 रुपए मानदेय दिया जा रहा है। ऐसे में 50 में कोई खाना बनाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। तो कह सकते हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था भी धराशाई होती नजर आ रही है।

कई जगह नहीं बने थे भोजन, वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के निर्देश

ब्लॉक के मध्यान्ह भोजन प्रभारी रजनी वैष्णव ने बताया कि वे स्वयं स्कूलों का जायजा करने के लिए पहुंचे थे। पाया कि कई जगह पर समूह भोजन पकाने से मना कर रहे। कई जगह पर भोजन नहीं बना था। बच्चों को खाना छुट्टी दी गई। वह घर जाकर खाना खाकर आए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था बनाने कहा गया है पर वे तैयार नहीं हो रहे हैं। उनका कहना कि 50 में खाना बनाने के लिए कोई आता नहीं है। कम से कम 150 रुपए दिया जाना चाहिए। लेकिन हम भी शासन के निर्देश के अनुसार भुगतान कर सकते हैं। जुंगेरा के शिक्षक दीपक सोनी ने कहा कि गांव में 150 रुपए रोजी मजदूरी में लोग काम पर चले जाते हैं। 50 में खाना बनाने को कोई तैयार नहीं हो रहा है। जुंगेरा में भी खाना बनाना बंद था। बाद में जब ब्लॉक मध्यान भोजन प्रभारी रजनी वैष्णव पहुंची और लोगों को समझाइश दी तब जाकर वे खाना बनाने राजी हुए। लेकिन मंगलवार को यहां भी बच्चों को भोजन नहीं मिल पाया।

लाटाबोड़ में दिखी मार्मिकता

लाटाबोड़ स्कूल में निरीक्षण के दौरान अफसरों के सामने मार्मिक स्थिति नजर आई। यहां 301 बच्चे पढ़ाई करते हैं। जहां आज भोजन ही नहीं पका था। उनमें से एक बच्चा अफसरों के निरीक्षण के दौरान ही आकर मासूमियत से कहने लगा कि सर भूख लगी है खाना दो ना। बच्चे की यह मासूमियत भरी बातें सुनकर अफसर भी भावुक हो गए। कई बच्चों के माता-पिता काम पर जाते थे। वे दोपहर को खाना छुट्टी होने पर घर पहुंचे तो घर पर ताला लगा था। उन्हें भूखे पोस्ट वापस लौटना पड़ा। ऐसी स्थिति कई जगह देखने को मिली। रोज भोजन मिल जाता है यह सोचकर पालक बच्चों के लिए खाना नहीं रखते हैं। सुबह से उन्हें स्कूल भेजकर स्वयं भी काम पर निकल जाते हैं। बच्चे सीधे शाम को घर आते हैं और पालक भी काम करके आते हैं। पर अब भोजन न बन पाने से बच्चों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

इन स्कूलों में बंद रहा मध्यान्ह भोजन

सांकरा ज संकुल में डेंगरा पार,जुंगेरा प्राइमरी व मिडिल, झलमला प्राइमरी, सेमर कोना, साल्हे टोला, बोरी, परसाहि,बघमरा प्राइमरी मिडिल,
पीपर छेड़ी, अमली डीह, तरौद प्राइमरी मिडिल भांठापारा, रानीतराई, अमोरा, करही भदर, मुजगहन, लाटाबोड़,नेवारी कला,नेवारी खुर्द, टेकापार,कोहंगाटोला में भोजन नही बना इसी तरह सांकरा ज, झलमला, बोरी के समूह ने काम नही करने आवेदन दिया है।

वहीं स्वयं सहायता समूह जामगांव द्वारा रोज़ी में एक खाना बनाने वाले के साथ स्वयं मध्यान्ह भोजन संचालिका खाना बना रही है.

बारिश के बावजूद धरना स्थल पर डटे रसोइये

वहीं बालोद के बस स्टैंड में अनिश्चित कालीन हड़ताल के पहले दिन जिले भर के रसोइयों ने धरना दिया बुधवार को भी रसोइये घर में रहकर हड़ताल करेंगे. क्योंकि शासन से धरना प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति मिली थी. जिले के रसोइयों ने अपनी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर 12 जुलाई मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। संघ की तीन मांगे हैं कि उनके कार्य का समय निर्धारित किया जाए। समान वेतन लागू किया जाए। ₹50 में महंगाई के जमाने में गुजारा नहीं हो सकता। रसोइयों ने कोर्ट द्वारा तय 9780 के हिसाब से प्रतिमाह मानदेय देने की मांग भी की व रसोइयों की नियुक्ति व हटाने का अधिकार शासन स्तर पर देने की बात भी कही।

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