DAILY BALOD NEWS

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ढाई साल से नहीं मिली पीएम आवास की राशि, मनरेगा मटेरियल का पैसा भी 1 साल से नहीं आया, सरपंचों ने नए कलेक्टर को बताई अपनी मुसीबत, कलेक्टर बोले आंदोलन की जरूरत नहीं, मैं कुछ करता हूं,,,,,

बालोद। प्रधानमंत्री आवास योजना में राशि न मिलने की समस्या पूरे जिले ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ का मामला है। इसको लेकर कई बार सरपंच संघ आंदोलन कर चुका है। तो वही राशि के अभाव में कई आवास आज तक बन नहीं पाए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना मानो छत्तीसगढ़ राज्य में मजाक बनकर रह गई है। और इसका दंश सिर्फ हितग्राही ही नहीं बल्कि सरपंच भी झेल रहे हैं। क्योंकि पंचायत के जरिए आवास की सूची जारी हुई। फिर लोगों ने किस्तों की आस में मकान बनाना शुरू किया और जब मकान बनने लगे तो उनका पैसा आना मुश्किल हो गया। शासन से फंड के अभाव में राशि जारी नहीं हो रही है। जिसके बाद फिर हितग्राही सरपंचों को परेशान करने लग गए। हितग्राहियों की समस्याओं को समझते हुए सरपंच संघ इस पर एकजुट हुआ और लगातार आंदोलन भी हुए। आज सरपंच संघ की 10 मांगों में पीएम आवास का पैसा भी प्रमुख मांग है। सरपंच संघ की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिले के सरपंच ने भी नए कलेक्टर गौरव कुमार सिंह से मुलाकात की और अपनी बातें रखी। कलेक्टर को विगत आंदोलन के बारे में बताया और कहा कि अगर आगे भी उनकी समस्याओं का हल नहीं निकला तो दोबारा आंदोलन की नौबत आ सकती है। इस पर कलेक्टर ने उन्हें समझाते कहा इसकी जरूरत नहीं है। मैं कुछ करता हूं। समस्या हल करने का प्रयास किया जाएगा। यह आश्वासन नए कलेक्टर ने सरपंचों को दिया है। जिला अध्यक्ष लेखक चतुवेर्दी, ब्लाक अध्यक्ष अरुण साहू, मीडिया प्रभारी दानेश्वर सिन्हा रेणुका गजेंद्र, माधुरी ज्योति, डोमन देशमुख, केशू गंधर्व एवम समस्त जिला पदाकारी उपस्थित थे।

कर्ज लेकर आवास बनाया कईयों ने

बालोद के सरपंच संघ के अध्यक्ष अरुण साहू ने बताया कि लगभग ढाई साल से प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि नहीं आई है। इससे कई गरीबों के आशियाने अधूरे हैं। बरसात में वह मकान नहीं बना पाए तो उनका रहना मुश्किल हो रहा है। कई परिवार ऐसे हैं जो कर्ज लेकर आवास का निर्माण पूरा किया है तो कई लोग ऐसे हैं जिनका लिस्ट में नाम तो है लेकिन योजना में राशि न मिलने से काम ही शुरू नहीं कर पा रहे हैं। लोगों के आक्रोश का सामना सरपंचों को करना पड़ा है।

मनरेगा में मटेरियल की राशि नहीं मिली

भोथली के सरपंच केसु गंधर्व ने कहा कि मनरेगा के विभिन्न निर्माण कार्यों की एजेंसी पंचायत को बना दिया जाता है। पंचायत की निगरानी में मनरेगा के कार्य होते हैं। जिसमें मजदूरी तो वहां काम करने वाले मजदूरों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है लेकिन मटेरियल का पैसा समय पर जारी नहीं होता है। 1 साल से यह मुसीबत झेल रहे हैं। जिससे संबंधित ठेकेदार जो मटेरियल सप्लाई किए रहते हैं, वे सरपंचों को परेशान करते हैं। क्योंकि वह पंचायत के कहने पर सप्लाई किए रहते हैं। पर मटेरियल का भुगतान 1 साल से ना होने से सरपंच को ठेकेदार भुगतान के लिए तंगाते हैं। सिवनी के सरपंच दानेश्वर सिन्हा ने कहा कि सरकार अपना काम तो करवा लेती है योजनाओं में वाहवाही लूट लेती है। पर समय पर भुगतान न होने से परेशानी पंचायत प्रशासन को झेलनी पड़ती है। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते हितग्राही हम पर उंगली उठाते हैं, हम जवाब देते देते थक गए हैं। इस पर शासन प्रशासन को ध्यान देना चाहिए और जल्द से जल्द मनरेगा के मटेरियल की राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।

क्या है सरपंचों की मांगे

सरपंचों की प्रमुख 10 मांगे हैं। जिनको लेकर वे पहले भी मुखर हुए हैं और आंदोलन, रैली, प्रदर्शन कर चुके हैं।

10 सूत्रीय मांगों में ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना की लबिंत राशि का तत्काल हितग्राहियों के खाते में भुगतान व आवास की सूची जो ग्राम सभा मे अनुमोदित है उसे पारित किया जाए, निर्माण कार्यो की एसओआर दर वर्तमान बाजार मूल्य से निर्धारित किया जाए, मनरेगा के लबिंत भुगतान अविलंब किया जाए, पेंशन योजना का लाभ ग्राम सभा मे पारित व्यक्ति को दिया जाए, ग्राम विकास के लिए शासन की योजना के तहत प्रत्येक वर्ष ग्राम पंचायत को 20 लाख रुपए का निर्माण कार्य दिया जाए, गौठान निर्माण हेतु शासन के द्वारा अलग से राशि प्रदान किया जाए, सरपंच और पंचों का भत्ता सम्मान जनक किया जाए, कार्यकाल के दौरान अगर किसी प्रकार से दुर्घटना का शिकार हो तो दुर्घटना बीमा निर्धारित किया जाए, नामांतरण एवं फौती का अधिकार पूर्ववत ग्राम पंचायत को दिया जाए व गांव में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाना प्रमुख है।

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