बालोद। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बालोद जिले के ग्राम दरबारी नवागांव में एक अनोखा और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब चार साल की दो नन्हीं बेटियां ‘गंगा जल मितान’ के पवित्र रिश्ते में बंध गईं। इस विशेष अवसर ने गांव में परंपरा, संस्कृति और स्नेह का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। खास बात यह रही कि दोनों बच्चियों की शक्ल-सूरत इतनी मिलती-जुलती है कि लोग उन्हें पहचानने में भी भ्रमित हो जाते हैं।
चार वर्षीय आराध्या साहू (पिता– बोधन साहू, माता– मोनिका साहू) और सिवन्या ठाकुर (पिता– पुरुषोत्तम ठाकुर, माता– सावित्री ठाकुर) ने महाशिवरात्रि के दिन गंगा जल को साक्षी मानकर जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया। दोनों बच्चियां एक ही गांव दरबारी नवागांव की रहने वाली हैं और बचपन से ही एक-दूसरे की अच्छी मित्र रही हैं। अब यह मित्रता पवित्र ‘मितान’ रिश्ते में बदल गई है।
गायत्री पंडित हमेश्वर ठाकुर ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करवाई और गंगा जल मितान की रस्म पूरी करवाई। मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान के बीच दोनों बच्चियों ने गंगा जल के साथ यह संकल्प लिया कि वे जीवन भर एक-दूसरे का साथ निभाएंगी। इस अवसर पर गांव में धार्मिक और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में दोनों परिवारों के साथ कई परिजन और ग्रामीण उपस्थित रहे। आराध्या साहू की दादी पूनिया बाई साहू और सिवन्या ठाकुर की दादी तितोचिया बाई ठाकुर सहित मुरली देहरी, कुलेश साहू, लक्ष्मीनारायण ठाकुर, सुगंधि बाई साहू, सुरपति बाई, दशरथ ठाकुर, सीता यादव, रेखा साहू, शैलेन्द्र साहू, ईश्वरी बाई, बुआ भगवती साहू, संजय साहू व अन्य ग्रामीणों ने दोनों बच्चियों को आशीर्वाद दिया और इस पवित्र रिश्ते के साक्षी बने।
दोनों बच्चियां सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में अध्ययनरत हैं। वे क्लास अरुण में पढ़ती हैं और दोनों की उम्र केवल चार वर्ष है। स्कूल में भी दोनों बच्चियां अपनी समान शक्ल-सूरत और मित्रता के कारण हमेशा चर्चा में रहती हैं।
विद्यालय की शिक्षिका माधुरी यादव ने मुस्कुराते हुए बताया कि, “दोनों के चेहरे इतने ज्यादा मिलते-जुलते हैं कि कई बार स्कूल में हम भी पहचान नहीं पाते कि कौन आराध्या है और कौन सिवन्या। कई बार तो हमें दुविधा हो जाती है और बच्चों से पूछकर ही पहचान करना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि दोनों बच्चियां पढ़ाई और व्यवहार में भी एक-दूसरे से काफी मिलती हैं और हमेशा साथ रहती हैं।
गांव के लोगों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में गंगा जल मितान की परंपरा बहुत पुरानी और पवित्र मानी जाती है। इस परंपरा में गंगा जल को साक्षी मानकर दो परिवार या बच्चे जीवन भर के लिए भाई-बहन या सखी के रिश्ते में बंधते हैं। यह रिश्ता खून के रिश्तों जितना ही मजबूत और सम्मानजनक माना जाता है।
महाशिवरात्रि के पावन दिन इस तरह का आयोजन गांव के लिए खास बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि आधुनिक समय में जहां रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है, वहीं ऐसी परंपराएं समाज को जोड़ने और प्रेम व अपनत्व को बढ़ाने का कार्य करती हैं।
दोनों परिवारों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह रिश्ता केवल एक रस्म नहीं बल्कि जीवन भर का साथ है। आगे भी दोनों बेटियां एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहेंगी और इस पवित्र बंधन को निभाएंगी। महाशिवरात्रि पर बना यह अनोखा रिश्ता अब पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों के दिलों को छू रहा है।
