कपरमेटा में कक्षा आठवीं के छात्र की संदिग्ध मौत- भनक लगी तो एक हफ्ते बाद मामले में पूछताछ करने पहुंचे भाजयुमो नेता अजेंद्र व साथी



कोई कह रहा ट्रैक्टर से गिर गया तो कोई पेड़ से, परिजन व ग्रामीण कर रहे गुमराह

पुलिस को नहीं दी गई थी सूचना, 2 घंटे के भीतर दफनाया, मामला संदिग्ध, 16 जून की शाम की है घटना

बालोद। बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक के ग्राम कपरमेटा में कक्षा आठवीं के छात्र शिवा सोरी पिता मन्नूलाल की संदिग्ध मौत 16 जून की शाम 4:30 बजे को हुई है। मामले का खुलासा कुछ दिनों बाद हुआ है। जब इसकी चर्चा होने लगी है। मौत के 2 घंटे के भीतर ही बच्चे के शव को दफनाए जाने से मामला संदिग्ध है। जिसकी भनक लगने के बाद गुरुर से भाजयुमो नेता महामंत्री अजेंद्र साहू, मंत्री मुकेश साहू, मंत्री नीलांबर साहू, मीडिया प्रभारी हर्ष साहू, कार्यकारिणी सदस्य रूपेश रावटे, युगल किशोर भी गांव पहुंचे। और छात्र के पिता व अन्य ग्रामीणों से मुलाकात कर मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया गया ।लेकिन इस पूरे पूछताछ और जांच के दौरान परिजन सहित ग्रामीण भी उन्हें गुमराह करते नजर आए। सब अलग-अलग बातें बता रहे थे। परिजन इस बात पर अड़े थे कि छात्र की मौत पेड़ से गिरने से हुई है। जिस पेड़ से गिरने की बात हुई उस जगह जाकर भी देखा गया लेकिन वहां भी घटना की पूरी पुष्टि नहीं हो पा रही है। भाजयुमो महामंत्री अजेंद्र साहू द्वारा उनके परिजनों को समझाया गया कि बात जो भी है सच्चाई बताएं। ताकि शासन की योजना का लाभ मिले और अगर किसी की लापरवाही की वजह से मौत हुई है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करें। जन चर्चा है कि किसी दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु हुई है जो किसी की लापरवाही की वजह से हुई है। क्योंकि मामला गांव के किसी रसूखदार का है जिसके चलते मामले को दबाया जा रहा है। परिजन तो परिजन शिक्षा विभाग के लोग भी इसमें संलिप्तता दिखा रहे हैं। यहां तक की मृतक छात्र के पिता द्वारा भी अपने बच्चे की मौत पेड़ से गिरने की बात लिख कर देते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी अर्जी लगाई गई है। तो वहीं मौत पर पूरी तरह से संदेह जाहिर करते हुए युवा मोर्चा मंडल गुरुर के महामंत्री अजेंद्र साहू व उनके साथियों ने जांच की मांग की है।

दबी जुबान से ग्रामीण बता रहे हैं कि बच्चे की मौत ट्रैक्टर की चपेट में आने से हुई है। लेकिन पूरे गांव भर में यह अफवाह फैलाई गई है कि बच्चा पेड़ से गिरा है और मौत हुई है। सच्चाई क्या है हम इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं करते हैं। लेकिन मामला उस वक्त संदिग्ध हो जाता है जब मौत के 2 घंटे के भीतर ही बच्चे का कफन दफन कर दिया गया था। यानी शाम को 4:30 बजे की घटना हुई और आनन-फानन में बच्चे का अंतिम संस्कार शाम 6:30 बजे कर दिया गया। जब तक स्कूल वालों को खबर मिली प्रधान पाठक रामेश्वर सिंग यादव गांव पहुंचे तब तक वहां बच्चे के शव को मुक्तिधाम ले जाया गया था ।मामला पूरी तरह से दबा दिया गया। इतना ही नहीं घटना के बाद पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग तक को भी इसकी कोई खबर ही नहीं दी गई। जबकि छात्र की दुर्घटना में मौत चाहे जैसी भी हो, इसकी जानकारी देनी जरूरी होती है। शासन द्वारा छात्र दुर्घटना योजना के तहत बीमा का लाभ भी मिलता है ताकि विभाग द्वारा डेथ सर्टिफिकेट जारी किया जाए। लेकिन मामले में पालक सहित ग्रामीणों द्वारा लापरवाही बरती गई और मामले को दबाते हुए अंतिम संस्कार तक कर दिया गया है। जो कई सवाल खड़े करती है।

पतासाजी के लिए पहुंचे गांव तो सच्चाई आई थी सामने

मामले की अपुष्ट सूचना मिलने के बाद हम भी पतासाजी के लिए गांव पहुंचे। जहां ग्रामीणों और कुछ स्कूली बच्चों से जानकारी हासिल की गई। पहले तो ग्रामीण आनाकानी करने लगे कि ऐसा कुछ हुआ नहीं है। ज्यादातर लोग यही बताने लगे कि बच्चा पेड़ से गिरकर खत्म हुआ है। तो वहीं कुछ ग्रामीण, शिक्षकों व बच्चों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जानकारी दी कि बच्चा ट्रैक्टर से गिरा है। दुर्घटना हुई है। ट्रैक्टर का चालक भी नाबालिग था। घटना के बाद ग्रामीणों ने 108 को भी सूचना दी थी। जब तक गांव में 108 पहुंची बच्चे की मौत हो गई थी। जिसके बाद 108 वापस खाली लौटी। यह जांच का विषय बन चुका है कि आखिर बच्चे की मौत कैसे हुई थी। अगर बच्चा ट्रैक्टर की चपेट में आया था तो पुलिस केस भी बनता। संबंधित परिजनों को ट्रैक्टर चालक व मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवानी होती। कहीं ना कहीं यह माना जा रहा है कि एक्सीडेंट पर मामले को दबाया गया है और इसे पेड़ से गिरने की घटना बताया जा रहा है। अब पूरे गांव में यही कहानी बना दी गई है। अब देखने वाली बात होगी कि सच्चाई कब तक दबी रह सकती है। बच्चा कपरमेटा का रहने वाला था और नाहन्दा के मिडिल स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ाई करता था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल के पहले दिन छुट्टी होने के बाद 4:00 बजे स्कूल से निकलने के बाद वह गांव लौट रहा था। इस बीच वह गांव के ट्रैक्टर में अन्य 4 साथियों के साथ सवार हुआ था। उसके बाद आगे ट्रैक्टर से गिरने से उसकी मौत हुई या पेड़ से गिरने से इसकी पुष्टि हम नहीं करते। यह जांच का विषय है।

क्या बोले प्रधानपाठक

प्रधान पाठक रामेश्वर सिंह यादव का कहना है कि बच्चे की मौत होने की जानकारी देर शाम को मिली। जब वहां पहुंचे तो बच्चे के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था। इसलिए ज्यादा किसी से जानकारी नहीं ले पाए। बच्चे के पिता ने लिखकर दिया है कि पेड़ से गिरने से उसकी मौत हुई। ट्रैक्टर वाली बात पता नही है।

डीईओ बोले- करवाता हूं जांच

इधर मामले में डीईओ प्रवास बघेल का कहना है कि मामले की जानकारी आप के जरिए मुझे मिली है। इसकी मुझे कोई खबर नहीं है। संबंधित बीईओ से मामले की जांच करवाता हूं। बच्चे की मौत चाहे जैसे भी हुई हो यह अलग मुद्दा है लेकिन छात्र दुर्घटना के तहत एक लाख बीमा का लाभ उनके परिजनों को मिलना चाहिए साथ ही बच्चे की मौत का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा मामला दबाना उचित नहीं है।

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