बालोद। राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के सक्रिय स्वयं सेवक यशवंत कुमार टंडन ने पर्यावरण संरक्षण व हरियाली के लिए नवाचार से घर में ही नीम व करण, बीजों से पौधा तैयार कर रहे है, साथ ही घरों में मौसमी फल के बीज, आम के गुठलियों ,खेतों व अन्य जगह से बीज और अंकुरित बीजों को संग्रहित करके पौधरोपण कर रहे हैं, साथ ही दिवाल ,व इटों के बीच पीपल व अन्य प्रकार के पौधा उग जाते है, उसे संरक्षित करके पॉलीथीन या पुरानी प्लास्टिक बाल्टी, बोतल, टिन का उपयोग करके पौधरोपण के लिए तैयार करके एक निश्चित स्थान में रोपण कर रहे हैं। साथ ही विवाह- समारोह ,जन्मदिवस ,रक्षाबंधन व अन्य दिवस में उपहार में पौधा भेंट करते हैं, पर्यावरण संरक्षण के सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर, इंस्ट्राग्राम के माध्यम से जागरूकता करते है। यशवंत कुमार टंडन रासेयो सक्रिय स्वयंसेवक मानसून (जुलाई से सितंबर )अवधि सहित अन्य अवसरों पर पौधारोपण करते है। इस दौरान बरसात में कई पौधे जड़ें पकड़ लेते हैं। पर्याप्त बरसात और पानी के अभाव में हजारों पौधे नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जीवन में पर्यावरण प्रेम को जागृत करना होगा।
पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के लिए शासकीय महाविद्यालय अर्जुन्दा के बी.ए द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत “जैविक कृषि” वैल्यू एडेड कोर्स में सर्टिफिकेट प्राप्त व वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के सक्रिय स्वंय सेवक यशवंत कुमार टंडन इन दिनों बरसात के मौसम में हरियाली बिखेरने सीड बाल तैयार कर रहे हैं। सीट बाल से धरती पर हरियाली लाई जाएगी। शासकीय महाविद्यालय अर्जुंदा के जैविक कृषि के छात्र यशवंत कुमार टंडन पर्यावरण संरक्षण के लिए एक पहल बीज बाल तैयार कर रहे है। सीड बाल तैयार करने के लिए गोबर खाद व मिट्टी के मिश्रण करके गिला मिट्टी को लड्डू के आकार बनाकर उसके अंदर विभिन्न प्रकार के बीच करंजा ,अशोक, कनेर, नीम, इमली,गुलमोहर,आम,मुनगा के विभिन्न प्रकार के बीच को इकट्ठा करके अपने घर के छत में सीड बाल तैयार कर रहे हैं। जिसे बारिश आने से पहले सीड लड्डू के रूप में तैयार कर रहे हैं। यशवंत कुमार टंडन ने बताया कि लगभग 100 लड्डू तैयार करेंगे। जिसे शासकीय महाविद्यालय अर्जुंदा के प्राचार्य को सौंप कर महाविद्यालय में आने जाने वाले छात्रों कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए सौंपा जाएगा। जिसे अपने घर बाड़ी में लगाकर देखभाल करेंगे। यशवंत टंडन विगत लगभग 2 वर्षों से पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत काम कर रहे हैं। स्थानीय शासन प्रशासन के मदद से विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण जैसे काम करते आ रहे हैं पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न मंचों के माध्यम से सम्मानित भी किया जा चुका है।
इस तरह तैयार किया जाता है सीड बाल
सीड बाल तैयार करने के लिए सबसे पहले आपको बीज इकट्ठा करना होगा फिर उपजाऊ मिट्टी के साथ-साथ गोबर खाद या कंपोस्ट खाद का बराबर मात्रा में मिश्रण तैयार करके गिला किया जाता है फिर उसे लड्डू के रूप में बनाकर बीचो-बीच बीज डालकर लड्डू की तरह बंद कर दिया जाता है फिर इसे सूखने के लिए जहां पर सूरज की किरने ना पहुंच सके उसी स्थान पर रखकर सुखाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि धूप के किरण नहीं पड़ने से गीली मिट्टी के बीच में रहने के बाद भी बीज में अंकुरण नहीं आ पाता जब पूर्ण रूप से सूख जाने पर आप अपने हिसाब से खाली पड़ी स्थानों पर बारिश के मौसम में छोड़ देने पर मिट्टी गीला होने के बाद जहां पर डालेंगे वहां पर पौधा उग जाएगा।
ये है सोच
यशवंत का कहना है हर दुख-सुख में पौधा रोपण व उपहार में पौधा भेंट करना चाहिए। पुरुस्कार व सम्मान में पौधों को शामिल करना चाहिए। विद्यालय, महाविद्यालय प्रतियोगिता,कार्यशाला में पौधारोपण-वृक्षारोपण शामिल करना चाहिए। इस तरह के प्रयासों से लोग पर्यावरण से जुड़ेंगे।
