DAILY BALOD NEWS

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8 वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज- डॉ प्रदीप जैन ने डाकघर में लगाई योग पर आधारित टिकट की प्रदर्शनी

बालोद। डाक टिकट संग्राहक डॉ प्रदीप जैन ने लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन बालोद नगर के मुख्य डाकघर में किया है। समय-समय पर उनके द्वारा विभिन्न दिवस के अवसर पर डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। ताकि लोगों को उससे जोड़ा जा सके। डाक घर आने वाले लोग उन टिकट को देखकर उनके बारे में जानते हैं और अपनी जिज्ञासा दूर करते हैं। ऐसी ही जिज्ञासा भरी टिकटों का प्रदर्शन योग दिवस की थीम पर किया गया है। डॉ जैन ने बताया भारतीय डाक विभाग द्वारा योग के विभिन्न मुद्राओं पर समय-समय पर कई डाक टिकट जारी किए हैं। वर्ष 1991 में 4 टिकटों का एक विशेष सेट जारी किया था जिसमें धनुरासन, उष्टासन, धनुरासन व उतीष्ट त्रिकोणासन की मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया था। इसी प्रकार सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राओं को अलग-अलग 12 डाक टिकटों पर मुद्रित किया गया था। टिकट 5 रूपए मूल्य वर्ग एवं 25 रूपए मूल्य वर्ग के हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पहली 21 जून 2015 को जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया गया तो भारतीय डाक विभाग द्वारा  5 रूपए मूल्य का एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया था। साथ ही योग दिवस के अवसर पर सन 2015 में 100 रुपए एवं 5 रुपए के सिक्के भी भारत सरकार द्वारा जारी किये गये थे।बालोद के वरिष्ठ चिकित्सक एवं डाक टिकट संग्राहक डॉ प्रदीप जैन ने योग पर जागरूकता हेतु स्थानीय पोस्ट ऑफ़िस में इन सामग्रियों को डाकघर में प्रदर्शित किया है।

भारत की प्राचीन विधा योग ने विश्व में अपना प्रभाव स्थापित किया। हजारों वर्ष प्राचीन स्थापत्य कला एवं मूर्ति कला में होते हैं आध्यात्मिक योग के दर्शन। भारत की अत्यंत प्राचीन विधा योग का प्रभाव आज धीरे-धीरे संपूर्ण विश्व में देखा जा रहा है। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस  8वीं बार मनाया जा रहा है। योग की महत्ता को लेकर भारत के प्रयासों के चलते दुनिया भर के देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्वीकारा और 21 जून 2015 में पहली बार इसे विश्व स्तर पर मनाया गया। इस वर्ष – “योग मानवता के लिये” की थीम के साथ पूरा विश्व योग दिवस मनायेगा। वैश्विक महामारी कोरोना ने विश्व पटल पर योग की महत्वता को प्रदर्शित किया है।  सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर रोग प्रतिशोधक क्षमता विकसित करने के लिए योग की महत्वता अब किसी से छिपी नहीं है। हजारों वर्ष प्राचीन स्थापत्य कला एवं मूर्ति कला में भी आध्यात्मिक योग के दर्शन होते हैं।

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